*छत्तीसगढ़ की ‘सबसे धनी’ ग्राम पंचायत कोडेनार: नालियों में जंगल, मूलभूत सुविधाओं का अभाव – सरपंच पर लगे लापरवाही के आरोप*
दंतेवाड़ा, 28 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की ग्राम पंचायत कोडेनार, जो राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) की किरंदुल माइंस के साये में बसी होने के कारण पूरे राज्य की सबसे धनी पंचायतों में शुमार है, आजकल निवासियों के गुस्से का केंद्र बनी हुई है। वर्षों से अनदेखी के कारण मुख्य मार्गों पर बनी नालियां जंगलों में तब्दील हो चुकी हैं, जिससे स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी गंभीर खतरे पैदा हो गए हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पंचायत को मिलने वाले भारी राजस्व के बावजूद मूलभूत सुविधाओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। क्या यह धनाढ्य पंचायत का ‘अमीरों का अभिशाप’ बन गया है?
धनी पंचायत का ‘अंधेरा’ पक्ष
कोडेनार ग्राम पंचायत एनएमडीसी की किरंदुल आयरन ओर माइंस के ठीक बगल में स्थित है, जो देश की सबसे बड़ी आयरन ओर उत्पादक इकाइयों में से एक है। एनएमडीसी परियोजना से जुड़े राजस्व साझेदारी और अन्य लाभों के कारण यह पंचायत छत्तीसगढ़ में सबसे समृद्ध ग्राम पंचायतों में गिनी जाती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ऐसी पंचायतों को माइनिंग रॉयल्टी, सीएसआर फंड्स और अन्य स्रोतों से करोड़ों रुपये का आवंटन होता है, जो सड़क, स्वच्छता और जल निकासी जैसी बुनियादी जरूरतों पर खर्च किए जाने चाहिए।
हालांकि, ग्राउंड रिपोर्ट एक अलग ही तस्वीर पेश करती है। पंचायत के मुख्य मार्गों पर बनी चौड़ी नालियां वर्षों से सफाई के अभाव में घास-फूस और कचरे से अटकी पड़ी हैं। स्थानीय निवासी बताते हैं कि बारिश के मौसम में ये नालियां जलमग्न हो जाती हैं, जिससे सड़कें तालाब बन जाती हैं और मलेरिया-डेंगू जैसे रोगों का खतरा बढ़ जाता है। “यहां एनएमडीसी जैसी बड़ी कंपनी है, लेकिन हमारी पंचायत की हालत किसी जंगल से बेहतर नहीं,” एक बुजुर्ग निवासी ने शिकायत की।
*पांच बार की सरपंच: विकास या लापरवाही?*
विवाद का केंद्र बनी हैं पंचायत की सरपंच मीना मंडावी, जिन्होंने पिछले पांच चुनावों में लगातार जीत हासिल की है। उनके कार्यकाल में नालियों का निर्माण तो हुआ, लेकिन रखरखाव का कोई ठोस प्रयास नजर नहीं आया। निवासियों का कहना है कि निर्माण के नाम पर बने ये ढांचे अब ‘सफेद हाथी’ साबित हो चुके हैं। “बच्चा भी देख ले कि इन नालियों की कभी सफाई नहीं हुई। मूलभूत सुविधाओं के लिए आने वाला पैसा कहां जा रहा है?” एक महिला निवासी ने सवाल उठाया।
विश्लेषण से पता चलता है कि कोडेनार जैसी माइनिंग प्रभावित पंचायतों में राजस्व का बड़ा हिस्सा विकास योजनाओं पर खर्च होता है, लेकिन पारदर्शिता की कमी अक्सर भ्रष्टाचार और लापरवाही को जन्म देती है। छत्तीसगढ़ सरकार की ‘पंचायत सशक्तिकरण’ योजनाओं के तहत ऐसी पंचायतों को अतिरिक्त फंड मिलते हैं, लेकिन ऑडिट रिपोर्ट्स में अक्सर रखरखाव की अनदेखी उजागर होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर सामुदायिक निगरानी समितियों को मजबूत करने से ऐसी समस्याओं पर अंकुश लग सकता है।
*निवासियों की मांग: साफ-सुथरी पंचायत का हक*
पंचायत के सैकड़ों निवासी अब जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। “हमें साफ नालियों और स्वच्छ मार्गों का हक है। एनएमडीसी का लाभ पंचायत को मिलता है, तो निवासियों को क्यों नहीं?” एक युवा कार्यकर्ता ने कहा। जिला कलेक्टर कार्यालय से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन स्थानीय स्रोतों के अनुसार, जल्द ही एक जांच टीम का गठन हो सकता है।
यह मुद्दा न केवल कोडेनार तक सीमित है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के खनन क्षेत्रों में फैले विकास के असंतुलन को उजागर करता है। यदि समय रहते सुधार न हुए, तो यह ‘धनी पंचायत’ की छवि को धूमिल कर सकता है। निवासी उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और कोडेनार फिर से एक मॉडल गांव बनेगा – जहां धन विकास का साथी हो, न कि बाधा।

