*किरंदुल में पोस्ट ऑफिस को बस स्टैंड पर वापस लाने की मांग जोर पकड़ रही, अब सवाल सीधे-सीधे खड़ा हो गया है*
किरंदुल नगरवासी और आसपास के ग्रामीण अब पुराने पोस्ट ऑफिस को बस स्टैंड क्षेत्र में पुनः स्थापित करने की मांग को और तेज कर रहे हैं। दंतेवाड़ा जिले के इस महत्वपूर्ण औद्योगिक कस्बे में डाक सेवाओं की सुविधा आम नागरिकों, एनएमडीसी कर्मचारियों और आसपास के गांवों के लोगों के लिए बेहद जरूरी मानी जा रही है।
जानकारी के अनुसार, पुराने पोस्ट ऑफिस भवन में वर्तमान में श्रमिक संगठन इंटक द्वारा पुस्तकालय संचालित किया जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक यह भवन एनएमडीसी द्वारा इंटक को उपलब्ध कराया गया था। भवन की हालत बेहद जर्जर बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी पुरानी और कमजोर इमारत में कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
अब सवाल सीधे-सीधे खड़ा हो गया है—किरंदुल क्षेत्र के निवासियों, एनएमडीसी कर्मचारियों, आम नागरिकों और आसपास के ग्रामीणों की सुविधा के लिए क्या इंटक यूनियन एनएमडीसी से मांग करेगी कि इस पुराने जर्जर भवन को ध्वस्त कर उसकी जगह नया, गुणवत्तापूर्ण और सर्वसुविधा युक्त भवन बनाया जाए, जहां पोस्ट ऑफिस और पुस्तकालय दोनों एक साथ संचालित हो सकें?
या फिर जनता जनार्दन की सुविधाओं और मांगों को अनदेखा कर दिया जाएगा?
श्रमिक संगठन होने के नाते इंटक पर सामाजिक दायित्व का भी सवाल है। क्या संगठन जनहित में पुराने पोस्ट ऑफिस भवन में डाकघर को पुनः संचालित करने या नए आधुनिक भवन की मांग करने में अपनी जिम्मेदारी निभाएगा? किरंदुल जैसे क्षेत्र में जहां हजारों लोग रोज डाक सेवाओं पर निर्भर रहते हैं, वहां बस स्टैंड पर पोस्ट ऑफिस की बहाली न सिर्फ सुविधा का मुद्दा है, बल्कि जनसुरक्षा और विकास का भी सवाल बन चुका है।
सीजी संविधान न्यूज की इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट है कि किसी भी संगठन के नाम के साथ कब्ज़ा गलत शब्द इस्तेमाल करने से सामाजिक स्तर पर गलत संदेश जाता है। इसलिए पूरी चर्चा को जनहित और सुविधा के नजरिए से ही देखा जाना चाहिए। अब गेंद इंटक और एनएमडीसी दोनों के पाले में है। जनता इंतजार कर रही है कि क्या सामाजिक दायित्व निभाया जाएगा या फिर पुरानी इमारत और सुविधाओं की उपेक्षा जारी रहेगी।
