*इंटक के अपने बयान ने ही फंसा दिया: जर्जर भवन में लाइब्रेरी खोलकर बच्चों और नागरिकों की जान से खिलवाड़ का आरोप*

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*इंटक के अपने बयान ने ही फंसा दिया: जर्जर भवन में लाइब्रेरी खोलकर बच्चों और नागरिकों की जान से खिलवाड़ का आरोप*

किरंदुल (NMDC BIOM कॉम्प्लेक्स)। इंटक श्रमिक संगठन ने आज पुराने पोस्ट ऑफिस भवन को लेकर अपना पक्ष रखा। संगठन का दावा है कि डाकघर का स्थानांतरण भवन की जर्जर स्थिति और प्रशासनिक निर्णय का नतीजा था, इंटक का इसमें कोई हाथ नहीं। उन्होंने कहा कि पुराना भवन सड़क से नीचे होने के कारण बरसात में पानी भर जाता था, दीवारों-छत में सीलन आ गई थी और “किसी भी समय इस जर्जर भवन से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।” इसलिए तत्कालीन उपडाकपाल ने 2018 में ही एनएमडीसी प्रबंधन से नए भवन की मांग की थी।

*लेकिन इंटक के इसी बयान ने संगठन को सबसे बड़े सवालों के घेरे में ला खड़ा कर दिया है।*

*इंटक खुद मान रहा है — भवन “अति जर्जर” और खतरनाक था*

इंटक के आधिकारिक बयान में साफ लिखा है:

भवन अत्यंत जर्जर हो चुका था।

दीवारों और छत में सीलन।

बरसात में पानी भरने की समस्या।

“किसी भी समय दुर्घटना की आशंका।”

यही भवन अब इंटक के तत्वावधान में पुस्तकालय के रूप में चल रहा है। जहां एनएमडीसी कर्मचारियों के परिवार, स्कूली छात्र-छात्राएं और स्थानीय नागरिक अध्ययन के लिए जाते हैं।

सवाल सीधे-सीधे उठता है:

*जो भवन “किसी भी समय बड़े खतरे” को जन्म दे सकता था, उसी में बच्चों और नागरिकों को बैठाकर इंटक और एनएमडीसी किसकी जान से खिलवाड़ कर रहे हैं?*

जनसेवा का दावा करने वाली नवरत्न कंपनी एनएमडीसी और श्रमिक संगठन इंटक ने इस अति जर्जर ढांचे को न तो जमींदोज कराने की मांग की, न ही नए सुरक्षित भवन के निर्माण की ठोस पहल की। इसके बजाय उसी खतरनाक इमारत में लाइब्रेरी खोल दी गई। उद्देश्य “सामाजिक एवं शैक्षणिक” बताया जा रहा है, लेकिन सुरक्षा का सवाल पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।

*पोस्ट ऑफिस के लिए नई बिल्डिंग क्यों नहीं मांगी?*

इंटक का कहना है कि पुराना भवन इतना खराब था कि डाकघर वहां नहीं चल सकता था। फिर वही भवन लाइब्रेरी के लिए कैसे सुरक्षित हो गया?

अगर भवन सच में इतना जर्जर था तो:

इंटक ने एनएमडीसी से क्यों नहीं मांग की कि पुरानी इमारत को गिराकर नई सुरक्षित बिल्डिंग बनाई जाए?

पोस्ट ऑफिस को बस स्टैंड वाले पुराने स्थान पर ही नए भवन में पुनः संचालित करने की जनहित की मांग क्यों नहीं उठाई?

ग्रामीणों, पोस्ट ऑफिस कर्मचारियों और पूरे किरंदुल नगर परिवार की सुविधा को ध्यान में रखकर नया निर्माण क्यों नहीं कराया?

जनता आज फिर से पोस्ट ऑफिस को बस स्टैंड क्षेत्र में ही संचालित करने की मांग कर रही है। लेकिन इंटक के पदाधिकारी इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। क्या इंटक अब भी उसी “अति जर्जर” भवन को लाइब्रेरी के रूप में चलाते हुए बच्चों की सुरक्षा को नजरअंदाज करता रहेगा? या फिर पोस्ट ऑफिस के लिए नए भवन की मांग उठाकर असल जनसेवा का प्रमाण देगा?

*“कब्जा” नहीं, लेकिन सुरक्षा का सवाल अनसुलझा*

इंटक ने लाइब्रेरी को “कब्जा” बताने वाले आरोपों को निराधार करार दिया है और इसे शुद्ध सामाजिक कार्य बताया है। लेकिन सुरक्षा का मूल मुद्दा उनके अपने बयान से ही उजागर हो गया है। जो इमारत 2018 में इतनी खतरनाक मानी गई कि डाकघर वहां से हटाना पड़ा, वही इमारत आज छात्रों और नागरिकों के लिए “अध्ययन केंद्र” बन गई है। यह विरोधाभास इंटक के लिए जवाब देना बेहद मुश्किल बना रहा है।

किरंदुल के नागरिक और शिक्षाविद अब पूछ रहे हैं — क्या जनसेवा का मतलब खतरनाक इमारत में बच्चों को बैठाना है? या असली जनसेवा सुरक्षित नए भवन का निर्माण कराना है?

*इंटक के अपने शब्दों ने ही सवालों का पहाड़ खड़ा कर दिया है। अब जवाब इंटक को देना होगा।*

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