*किरंदुल में सामुदायिक एकजुटता की मिसाल: गौरव पथ के गड्ढों को श्रमदान से भरा, अब लोगो की मांग किरंदुल. से दंतेवाड़ा मार्ग पर श्रमदान*

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

*किरंदुल में सामुदायिक एकजुटता की मिसाल: गौरव पथ के गड्ढों को श्रमदान से भरा, अब लोगो की मांग किरंदुल. से दंतेवाड़ा मार्ग पर श्रमदान*

दंतेवाड़ा, 28 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल शहर में गौरव पथ पर बने बड़े-बड़े गड्ढों ने न केवल स्थानीय निवासियों की परेशानी बढ़ाई थी, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही को भी उजागर किया। लेकिन शहर के नगरपालिका उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी, बी टी ओ ऐ स्थानित ठेकेदार जमील खान बिपुल राय और , कुछ पत्रकारों और गणमान्य नागरिकों ने मिलकर इस समस्या का समाधान निकाला। उन्होंने श्रमदान के माध्यम से गड्ढों को रेत, गिट्टी और सीमेंट से भर दिया, जो अब शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस नेक कार्य की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है, और अब जिले के अन्य हिस्सों से भी इसी तरह की मांगें उठने लगी हैं।79b1b6

*घटना का विवरण: श्रमदान की भावना से बदली सड़क की सूरत*

पिछले कुछ महीनों से किरंदुल का गौरव पथ, जो शहर की मुख्य यातायात धमनी है, बड़े-बड़े गड्ढों से जूझ रहा था। बारिश के मौसम में ये गड्ढे और गहरे हो गए, जिससे कम से कम 3-4 दुर्घटनाएं हो चुकी थीं। कुछ लोग गंभीर रूप से घायल हुए और अस्पताल में भर्ती होने पड़े। स्थानीय निवासियों की बार-बार शिकायतों के बावजूद नगरपालिका और जिला प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया।

ऐसे में कांग्रेस नेता और नगरपालिका उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी ने पहल की। उन्होंने वार्ड निवासियों,राजू रेड्डी जोवीस पापाचंद और कुछ पत्रकार किशोर कुमार रामटेके (खबर फास्ट के जिला संवाददाता) और रवि सरकार के साथ मिलकर श्रमदान अभियान चलाया इस जनहित के कार्य के लिऐ बी टी ओ ऐ अध्यक्ष मनोज सींग सचिव आकाश गोयल भी श्रमदान करने कार्यस्थल पहुचे और 20 बोरी सीमेंट का सहयोग किया स्थानीय ठेकेदार बिपुल राय जमील खान ने भी 20   20 बोरी सीमेंट दान किया और सहयोग किया। टीम ने गड्ढों को रेत, गिट्टी और सीमेंट से भरकर यातायात सुचारू कर दिया। सिद्दीकी ने कहा, “महीनों से शिकायतें की गईं, लेकिन प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। हमें खुद आगे आना पड़ा ताकि लोगों की जान बचाई जा सके। यह कार्य पूरी तरह निःस्वार्थ भाव से किया गया, जो शहर के गली-मोहल्लों और सोशल मीडिया पर सराहना बटोर रहा है। लोग इसे ‘समुदाय की ताकत’ का प्रतीक मान रहे हैं।

*सामुदायिक प्रतिक्रिया: तारीफों के पुल, लेकिन कुछ आलोचनाएं भी*

इस अभियान की सफलता ने किरंदुल में उत्साह पैदा किया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स तारीफों के पुल बांध रहे हैं, जैसे “यह सच्ची सेवा है, जहां सरकार सो रही है, वहां जनता जाग गई।” हर गली-मोहल्ले में चर्चा है कि कैसे एक छोटी सी पहल ने बड़ी समस्या हल कर दी। हालांकि, कुछ स्वार्थी तत्वों ने इस नेक कार्य पर भी टिप्पणियां की हैं, जैसे आरोप लगाना कि यह राजनीतिक स्टंट है। लेकिन अधिकांश लोग इसे सकारात्मक मानते हैं और कहते हैं कि जो खुद नहीं कर पाते, वे दूसरों की मेहनत पर सवाल उठाते हैं।

एक स्थानीय निवासी (नाम गोपनीय) ने कहा, “हम टैक्स देते हैं, लेकिन बदले में क्या मिलता है? सिर्फ खतरनाक सड़कें। प्रशासन सोया हुआ है।” यह प्रतिक्रिया दर्शाती है कि जनता अब खुद जिम्मेदारी लेने को तैयार है।

*विश्लेषण: प्रशासनिक लापरवाही और समुदाय की भूमिका*

यह घटना प्रशासनिक लापरवाही की गंभीरता को उजागर करती है। किरंदुल जैसे औद्योगिक शहर में, जहां एनएमडीसी जैसे बड़े प्लांट हैं, बुनियादी ढांचे का रखरखाव प्राथमिकता होनी चाहिए। लेकिन सड़क रखरखाव के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आवंटित फंड्स का कथित रूप से दुरुपयोग अन्य परियोजनाओं में हो रहा है। कानूनी दृष्टि से, बॉम्बे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, गड्ढों से होने वाली दुर्घटनाओं के लिए नगर निगम जिम्मेदार है, और गंभीर मामलों में आईपीसी की धारा 304ए (लापरवाही से मौत) लागू हो सकती है।

दूसरी ओर, यह श्रमदान सामुदायिक एकजुटता की शानदार मिसाल है। नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्र में, जहां विकास चुनौतीपूर्ण है, ऐसे प्रयास न केवल तात्कालिक राहत देते हैं बल्कि लोगों में विश्वास जगाते हैं। यह दिखाता है कि जब सरकार चूकती है, तो जनता खुद आगे आ सकती है। लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं—नियमित निरीक्षण, फंड्स का सही उपयोग और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई जरूरी है।

*दंतेवाड़ा मार्ग पर उठी मांग: अब पुल-पुलियों के गड्ढों की बारी*

इस सफलता से प्रेरित होकर दंतेवाड़ा जिले के लोग अब किरंदुल से दंतेवाड़ा जाने वाले मुख्य मार्ग की मरम्मत की मांग कर रहे हैं। बीजेपी शासन में हाल ही में बने इस मार्ग पर 6 महीने भी नहीं हुए कि जगह-जगह पुलों पर बड़े गड्ढे हो गए हैं। स्थानीय लोग कहते हैं, “हमें भी श्रमदान की जरूरत है। हम सहयोग करेंगे, आप आगे बढ़ें।” बहुत जल्द ग्रामीणों और राहगीरों के सहयोग से इन गड्ढों को भरा जाएगा। सभी से अपील है कि इस नेक कार्य में शामिल हों।

यह खबर न केवल एक समस्या का समाधान दिखाती है, बल्कि सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जगाती है। अगर समुदाय और प्रशासन मिलकर काम करें, तो ऐसी परेशानियां दूर हो सकती हैं।

Leave a Comment

और पढ़ें

Buzz4 Ai

Read More Articles