*किरंदुल में रेबीज का बढ़ता खतरा: आवारा कुत्तों की समस्या से शहर पर मंडराता संकट, सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी*

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*किरंदुल में रेबीज का बढ़ता खतरा: आवारा कुत्तों की समस्या से शहर पर मंडराता संकट, सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी*

किरंदुल (छत्तीसगढ़), 21 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ के किरंदुल शहर में रेबीज संक्रमण की हालिया घटनाएं स्थानीय निवासियों के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का संकेत दे रही हैं। हाल ही में एक गौमाता की रेबीज से मौत और अब गजराजकैंप में एक बैल के संदिग्ध संक्रमण ने शहरवासियों को चिंतित कर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में रेबीज से सालाना करीब 18,000-20,000 मौतें होती हैं, और आवारा कुत्ते इनमें से 99% मामलों के लिए जिम्मेदार हैं।d53509 किरंदुल जैसे छोटे शहरों में आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी और नगरपालिका की कथित लापरवाही इस खतरे को और बढ़ा रही है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बावजूद, यहां शेल्टर होम बनाने या कुत्तों के वैक्सीनेशन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं, जो एक बड़ी चूक साबित हो सकती है। आइए इस समस्या का गहन विश्लेषण करें और समझें कि समय रहते सुधार क्यों जरूरी हैं।

*हालिया घटनाएं: रेबीज संक्रमण का फैलाव*

पिछले दिनों किरंदुल के न्यू टाइप 3 मोहल्ले में एक गौमाता को आवारा कुत्तों ने काट लिया, जिसके बाद उसे रेबीज हो गया। गौ सेवकों और नगरपालिका ने इसे पकड़कर एक पेड़ से बांध दिया, लेकिन बारिश में इसे खुले में छोड़ दिया गया। स्थानीय युवाओं की सतर्कता से इसे शीतला माता मंदिर में स्थानांतरित किया गया, लेकिन अगली सुबह इसकी मौत हो गई। यदि युवाओं का हस्तक्षेप न होता, तो संक्रमित गौमाता को कुत्तों द्वारा नोचने से रेबीज पूरे शहर में फैल सकता था, जो मानव जीवन के लिए घातक होता।

इसी क्रम में आज गजराजकैंप से मिली जानकारी ने खतरे की घंटी बजा दी है। यहां एक बैल को कुत्ते ने काटा था, और अब उसके मुंह से लार गिर रही है। बैल आक्रामक हो गया है – कल यह किसी घर की छत पर चढ़ गया और तांडव मचाया, हर किसी पर हमला करने की कोशिश की। स्थानीय लोगों के अनुसार, अगर यह रेबीज संक्रमित है, तो शहर के अन्य पशुओं के लिए यह अत्यधिक खतरा है। बाजारों और घरों के सामने लोग गौ, बैल, कुत्तों और बकरियों को एक साथ खाना देते हैं, जिससे संक्रमण का फैलाव 100% बढ़ सकता है। किरंदुल में कुत्तों के झुंड रोजाना 1-2 काटने की घटनाएं दर्ज करा रहे हैं, जो शहर को एक बड़े संकट की ओर धकेल रहा है।

*रेबीज का राष्ट्रीय परिदृश्य: एक घातक समस्या*

भारत रेबीज से सबसे अधिक प्रभावित देशों में से एक है, जहां वैश्विक मौतों का 36% हिस्सा यहां होता है।9d29f5 WHO के अनुमानों के मुताबिक, सालाना 17.4 मिलियन डॉग बाइट्स होते हैं, जिससे 20,565 मानव रेबीज मौतें होती हैं।e2e128 हाल के वर्षों में मामलों में गिरावट आई है – 2005 में 274 मानव रेबीज मौतें थीं, जो 2022 में घटकर 34 रह गईं – लेकिन 2025 में भी दिल्ली जैसे शहरों में 3,196 डॉग बाइट्स जनवरी में ही दर्ज हुए।563347 किरंदुल में अपर्याप्त वेस्ट मैनेजमेंट कुत्तों को आक्रामक बनाता है, क्योंकि वे भोजन की तलाश में हमलावर हो जाते हैं। नेशनल एक्शन प्लान फॉर डॉग मीडिएटेड रेबीज एलिमिनेशन (NAPRE) 2030 तक भारत को रेबीज मुक्त बनाने का लक्ष्य रखता है, लेकिन स्थानीय स्तर पर वैक्सीनेशन और स्टेरलाइजेशन की कमी इसे बाधित कर रही है।

*सुप्रीम कोर्ट का आदेश: एक मिसाल, लेकिन अनदेखी*

11 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में बढ़ते कुत्तों के काटने और रेबीज मामलों पर एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया। कोर्ट ने सभी आवारा कुत्तों को 8 सप्ताह में पकड़कर स्टेरलाइजेशन, वैक्सीनेशन और परमानेंट शेल्टर्स में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया।a0f86c70473fc0e626 कोर्ट ने एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) रूल्स को “absurd” बताते हुए बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि माना और कहा कि कोई बच्चा रेबीज का शिकार नहीं होना चाहिए। यह आदेश दिल्ली-NCR तक सीमित नहीं है; यह पूरे देश के लिए एक संदेश है कि आवारा कुत्तों पर सख्त नियंत्रण जरूरी है।edfc49

संविधान के आर्टिकल 243(W) के तहत, नगरपालिकाएं कुत्तों की पॉपुलेशन कंट्रोल, स्टेरलाइजेशन और शेल्टर्स बनाने के लिए जिम्मेदार हैं।93be4e छत्तीसगढ़ में भी PIB ने स्पष्ट किया है कि म्यूनिसिपैलिटीज को स्ट्रे डॉग्स कंट्रोल करना चाहिए। लेकिन किरंदुल नगरपालिका ने अब तक कोई शेल्टर होम नहीं बनाया। गौठान में उपलब्ध कमरे कचरा से भरे पड़े हैं, और संक्रमित पशुओं को अलग रखने की कोई व्यवस्था नहीं। यह लापरवाही NAPRE के लक्ष्यों को कमजोर कर रही है और शहर को महामारी के कगार पर ला खड़ा कर रही है।

*विश्लेषण: लापरवाही के परिणाम और समाधान*

किरंदुल में रेबीज का खतरा इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि आवारा कुत्तों की आबादी अनियंत्रित है। विशेषज्ञों के अनुसार, खराब वेस्ट मैनेजमेंट कुत्तों को भोजन स्रोत प्रदान करता है, जिससे वे आक्रामक होते हैं और रेबीज फैलाते हैं। अगर नगरपालिका सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना अपनाती, तो वैक्सीनेशन अभियान, डॉग-कैचिंग टीम्स और शेल्टर्स से समस्या हल हो सकती है। युवाओं की बहादुरी सराहनीय है, लेकिन सिस्टेमेटिक सुधार बिना यह अपर्याप्त है।

*समाधान के रूप में:*

तत्काल कदम: नगरपालिका को हेल्पलाइन शुरू करनी चाहिए, कुत्तों का वैक्सीनेशन और स्टेरलाइजेशन बढ़ाना चाहिए।

पब्लिक अवेयरनेस: निवासियों को सलाह – संदिग्ध कुत्तों से दूर रहें, बाइट पर तुरंत पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) लें।

दीर्घकालिक: गौठान सुधारें, शेल्टर्स बनाएं और वेस्ट मैनेजमेंट मजबूत करें।

यह घटना एक चेतावनी है: अगर सुधार नहीं हुए, तो किरंदुल में रेबीज महामारी फैल सकती है, खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां मेडिकल सुविधाएं सीमित हैं। सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू करने का समय है – जीवन बचाने के लिए लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जा सकती। स्थानीय प्रशासन से अपील है कि शहर को सुरक्षित बनाएं, वरना परिणाम घातक होंगे।

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