*बीजापुर में एनएचएम कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल: 10 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन तेज, सामाजिक कार्यकर्ता राजू जी गांधी ने किया समर्थन*
बीजापुर, 21 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारी संघ ने 18 अगस्त 2025 से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है। यह हड़ताल 10 सूत्रीय मांगों को लेकर की जा रही है, जिसमें संविलियन एवं स्थायीकरण, पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना, ग्रेड पे निर्धारण, लंबित 27% वेतन वृद्धि, कार्य मूल्यांकन में पारदर्शिता, नियमित भर्ती में सीटों का आरक्षण, अनुकंपा नियुक्ति, मेडिकल एवं अन्य अवकाश सुविधा, स्थानांतरण नीति, और न्यूनतम 10 लाख रुपये तक का कैशलेस चिकित्सा बीमा शामिल हैं। इस हड़ताल से जिले की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, जिससे मरीजों को इलाज के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
*हड़ताल का प्रभाव और मांगों की गंभीरता*
एनएचएम कर्मचारी संघ के इस आंदोलन ने पूरे छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर डाला है। बीजापुर में भी यह हड़ताल स्वास्थ्य व्यवस्था को प्रभावित कर रही है, जहां विशेष नवजात देखभाल इकाई (SNCU), ब्लड बैंक और लैब जैसी आपातकालीन सेवाएं भी ठप होने की कगार पर हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं, और सरकार द्वारा बार-बार अनदेखी के बाद उनके पास हड़ताल के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
संघ के प्रवक्ता संदीप वर्मा ने कहा, “यह आंदोलन केवल कर्मचारियों के हक की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और लाखों मरीजों के हित से जुड़ा है। सरकार की उपेक्षा के कारण हमें यह कदम उठाना पड़ा।”
*सामाजिक कार्यकर्ता राजू जी गांधी का समर्थन*
इस हड़ताल को बीजापुर के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता और ‘ब्लड मैन’ के नाम से मशहूर राजू जी गांधी का समर्थन प्राप्त हुआ है। राजू जी गांधी ने धरना स्थल पर पहुंचकर हड़ताल में शामिल एएनएम (ऑक्जिलियरी नर्स मिडवाइफ) बहनों का हौसला बढ़ाया और उनकी मांगों को जायज ठहराया। उन्होंने सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। राजीव ने कहा, “एनएचएम कर्मचारी, विशेष रूप से हमारी एएनएम बहनें, समाज की रीढ़ हैं। ये लोग दिन-रात मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं। उनकी मांगें न केवल जायज हैं, बल्कि इन्हें तुरंत पूरा करना सरकार का नैतिक दायित्व है।”
राजू जी गांधी, जो रक्तदान और सामाजिक कार्यों के लिए अपनी पहचान रखते हैं, ने इस आंदोलन को सामाजिक समर्थन प्रदान कर इसे और मजबूती दी है। उनके समर्थन से हड़ताल को व्यापक जन-ध्यान मिलने की उम्मीद है।
*मांगों का विश्लेषण: क्यों जरूरी हैं ये मांगें?*
संविलियन एवं स्थायीकरण: एनएचएम कर्मचारी लंबे समय से संविदा पर काम कर रहे हैं। स्थायीकरण उनकी नौकरी की सुरक्षा और भविष्य की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना: यह मांग स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक संगठित और प्रभावी बनाने के लिए है।
ग्रेड पे निर्धारण और 27% वेतन वृद्धि: कर्मचारियों का कहना है कि 2016 के कोर्ट आदेश के बावजूद समान काम के लिए समान वेतन लागू नहीं किया गया है।
कार्य मूल्यांकन में पारदर्शिता: यह मांग कर्मचारियों के प्रदर्शन मूल्यांकन में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए है।
अनुकंपा नियुक्ति और अवकाश सुविधा: ये मांगें कर्मचारियों के कल्याण और उनके परिवारों की सुरक्षा से जुड़ी हैं।
स्थानांतरण नीति और कैशलेस चिकित्सा बीमा: ये मांगें कर्मचारियों के कार्य-जीवन संतुलन और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं।
*सरकार का रुख और भविष्य की संभावनाएं*
छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ के अनुसार, सरकार को 15 अगस्त तक का अल्टीमेटम दिया गया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। 13 अगस्त को हुई राज्य स्वास्थ्य समिति की बैठक में मांगों पर चर्चा तो हुई, लेकिन इसके मिनट्स अभी तक जारी नहीं किए गए हैं, जिससे कर्मचारियों में रोष और बढ़ गया है।
हालांकि, 17 अगस्त को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में 27% वेतन वृद्धि और अन्य मांगों पर सैद्धांतिक सहमति दी गई थी, लेकिन वित्त विभाग की मंजूरी के अभाव में यह लागू नहीं हो सका।
*निष्कर्ष
बीजापुर में एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल और उनकी 10 सूत्रीय मांगें न केवल कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई हैं, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। राजू जी गांधी जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन इस आंदोलन को और बल दे रहा है। यह जरूरी है कि सरकार जल्द से जल्द इन मांगों पर सकारात्मक कदम उठाए, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू हो सकें और कर्मचारि*यों का मनोबल बढ़े।

