*विश्व आदिवासी दिवस पर किरंदुल में मंच साझा, लेकिन आदिवासियों की बुनियादी समस्या पर चुप्पी*

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*विश्व आदिवासी दिवस पर किरंदुल में मंच साझा, लेकिन आदिवासियों की बुनियादी समस्या पर चुप्पी*

किरंदुल (दंतेवाड़ा)। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर किरंदुल नगरपालिका के अध्यक्ष व पार्षदों, कोड़ेनार पंचायत के सरपंच एवं पंचों तथा किरंदुल मण्डल के पदाधिकारियों ने एक मंच साझा किया। स्थानीय स्तर पर यह दृश्य राजनीतिक और प्रशासनिक एकता का प्रतीक बनकर सामने आया।

हालांकि इस साझा मंच से आदिवासी समुदाय की सबसे ज्वलंत स्थानीय समस्या पर कोई ठोस चिंता या प्रण सामने नहीं आया। कोड़ेनार पंचायत और किरंदुल नगरपालिका क्षेत्र के ग्रामीण आदिवासी परिवार अपने रोजमर्रा के सामान की बिक्री के लिए किरंदुल के एकमात्र मुख्य बाजार पर निर्भर हैं। यहां उन्हें बैठने के लिए उचित जगह उपलब्ध नहीं है। नतीजतन वे मुख्य मार्ग पर बैठने को मजबूर हो जाते हैं, जहां 14 और 16 चक्का वाले भारी वाहन लगातार गुजरते रहते हैं। इससे दुर्घटना का खतरा लगातार बना रहता है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि आदिवासी विक्रेता अपनी जान जोखिम में डालकर भी बाजार में जगह बनाने की कोशिश करते हैं, क्योंकि वैकल्पिक सुरक्षित स्थान की व्यवस्था नहीं है। विश्व आदिवासी दिवस के मंच पर एकत्र जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जा रही थी कि वे इस व्यावहारिक समस्या पर ध्यान देंगे और समाधान का वादा करेंगे।

सवाल यह है कि क्या कोड़ेनार पंचायत और किरंदुल नगरपालिका के जनप्रतिनिधि इस ओर गंभीरता से ध्यान देंगे, या 2027 के विश्व आदिवासी दिवस पर फिर वही मंच सजेगा और आदिवासियों की रोजमर्रा की सुरक्षा व आजीविका की चिंता फिर से हाशिए पर रहेगी।

यह घटनाक्रम दिखाता है कि प्रतीकात्मक मंच साझा करने से आगे बढ़कर जमीनी समस्याओं—खासकर बाजार में सुरक्षित व व्यवस्थित विक्रय स्थान—का समाधान आदिवासी कल्याण की असली कसौटी है। स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा है कि वे इस मुद्दे पर शीघ्र ठोस कदम उठाएं।

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