*जिला दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा: गोधाम योजना के साथ आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर होम की मांग को गति*
दंतेवाड़ा, 21 अगस्त 2025: जिला कार्यालय के डंकनी सभाकक्ष में आयोजित बैठक में कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने राज्य शासन की गोधाम योजना के तहत घुमंतू पशुओं के व्यवस्थापन और सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम पर जोर दिया। इस योजना के तहत गौवंशीय पशुओं के लिए गौठानों की स्थापना, उनके रखरखाव, चारा विकास, नस्ल सुधार और गौ-उत्पादों को बढ़ावा देने की बात कही गई। साथ ही, कलेक्टर ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गौठानों के लिए भूमि चयन और चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही, जिले में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को देखते हुए स्थानीय लोगों और पशु प्रेमियों ने आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर होम की स्थापना की मांग को तेज कर दिया है। यह मांग अब और भी प्रासंगिक हो गई है, क्योंकि गोधाम योजना के तहत पशु कल्याण के लिए उठाए जा रहे कदमों ने इस दिशा में उम्मीद जगाई है।
*गोधाम योजना: एक नजर में*
उद्देश्य: घुमंतू गौवंशीय पशुओं का व्यवस्थापन, सड़क दुर्घटनाओं और पशु क्रूरता की रोकथाम, गौ-उत्पादों को बढ़ावा।
प्रमुख बिंदु:
प्रत्येक गोधाम में अधिकतम 200 गौवंशीय पशु रखे जाएंगे।
पंजीकृत गौशालाओं से अलग, गोधाम छ.ग. कृषक परिक्षण नियम 2014 के तहत जब्त पशुओं के लिए होंगे।
चारा, नस्ल सुधार, और रोजगार सृजन पर जोर।
प्रति पशु 10 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से अनुदान।
चरवाहों और वर्करों को मानदेय।
जिला और विकासखंड स्तर पर समितियों द्वारा संचालन और निगरानी।
निर्देश:
एनएच मार्गों पर चेतावनी बोर्ड लगाने और पशु विचरण स्थलों का चिन्हांकन।
पशुपालकों में जागरूकता और जुर्माने की व्यवस्था।
रेडियम पट्टी और कॉलर के उपयोग का प्रस्ताव।
टोल-फ्री नंबर और “काउ केचर” गाड़ियों की व्यवस्था।
आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर होम की मांग
जैसे गोधाम योजना घुमंतू गौवंशीय पशुओं की समस्या का समाधान कर रही है, वैसे ही दंतेवाड़ा में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके कारण होने वाली घटनाओं ने स्थानीय प्रशासन और समुदाय का ध्यान खींचा है। कुत्तों के लिए शेल्टर होम की मांग निम्नलिखित कारणों से महत्वपूर्ण है:
सुरक्षा: आवारा कुत्तों के कारण सड़क दुर्घटनाएं और हमले की घटनाएं बढ़ रही हैं।
पशु कल्याण: कुत्तों के लिए उचित आश्रय, भोजन, और चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करना।
सार्वजनिक स्वास्थ्य: रेबीज और अन्य बीमारियों की रोकथाम के लिए टीकाकरण और नसबंदी की जरूरत।
समुदाय की मांग: स्थानीय लोग और पशु प्रेमी संगठन लंबे समय से इस मुद्दे पर ध्यान देने की मांग कर रहे हैं।
*सकारात्मक प्रभाव*
गोधाम योजना के तहत पशु कल्याण के लिए उठाए जा रहे कदम न केवल गौवंशीय पशुओं के लिए बल्कि अन्य आवारा पशुओं, विशेष रूप से कुत्तों के लिए भी एक मॉडल बन सकते हैं। कलेक्टर द्वारा दिए गए निर्देश, जैसे भूमि चिन्हांकन और जागरूकता अभियान, कुत्तों के लिए शेल्टर होम स्थापित करने में भी सहायक हो सकते हैं। यह कदम निम्नलिखित लाभ दे सकता है:
आवारा कुत्तों का व्यवस्थापन: शेल्टर होम में कुत्तों को रखकर उनकी देखभाल और नसबंदी की जा सकती है।
रोजगार सृजन: शेल्टर होम के संचालन से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा।
सामुदायिक सुरक्षा: सड़कों पर आवारा कुत्तों की संख्या कम होने से दुर्घटनाएं और हमले कम होंगे।
पशु क्रूरता पर रोक: उचित देखभाल से कुत्तों के प्रति क्रूरता की घटनाएं कम होंगी।
*निष्कर्ष*
कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत की अध्यक्षता में गोधाम योजना के तहत पशु कल्याण के लिए उठाए जा रहे कदम सराहनीय हैं। इस पहल ने आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर होम की मांग को और प्रासंगिक बना दिया है। स्थानीय प्रशासन से अपील है कि गोधाम योजना की तर्ज पर कुत्तों के लिए शेल्टर होम की स्थापना को जल्द से जल्द अमल में लाया जाए। यह न केवल पशु कल्याण को बढ़ावा देगा, बल्कि जिले में सामुदायिक सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य को भी मजबूत करेगा।
संपर्क: पशु दुर्घटना से संबंधित जानकारी और शिकायत के लिए जल्द ही टोल-फ्री नंबर जारी किया जाएगा। अधिक जानकारी के लिए जिला प्रशासन या पशुधन विभाग से संपर्क करें।
