*पहलगाम आतंकी हमले के बाद किरंदुल पुलिस का सराहनीय कदम: घर-घर जाकर किरायेदारों की जांच, नगरपालिका की लापरवाही उजागर*
किरंदुल/बचेली, 28 अप्रैल 2025: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले के बाद देश भर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के तहत छत्तीसगढ़ के किरंदुल में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए किरायेदारों की जांच शुरू कर दी है। किरंदुल पुलिस ने पिछले दो दिनों में 120 से अधिक घरों का दौरा कर 300 से 400 लोगों की जानकारी जुटाई है। इस अभियान में पुलिस घर-घर जाकर किरायेदारों का विवरण, पहचान पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच कर रही है। पुलिस की इस सक्रियता को स्थानीय लोग खूब सराह रहे हैं, लेकिन साथ ही नगरपालिका की लापरवाही भी सामने आ रही है, जो इस तरह की जानकारी रखने में पूरी तरह विफल रही है।
*पहलगाम हमले के बाद बढ़ी सतर्कता*
पहलगाम आतंकी हमले के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने सभी राज्यों को निर्देश दिए कि बाहरी राज्यों से आए लोगों, विशेष रूप से संदिग्ध व्यक्तियों और पाकिस्तानी नागरिकों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। इसके तहत किरंदुल पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए किरायेदारों की जांच शुरू की। पुलिस टीमें दिन-रात शहर के विभिन्न मोहल्लों में पहुंच रही हैं और किराये के मकानों में रहने वालों की जानकारी एकत्र कर रही हैं। इस अभियान में पुलिस न केवल स्थानीय किरायेदारों, बल्कि बाहरी राज्यों से आए मजदूरों और अन्य व्यक्तियों की भी जांच कर रही है।
*नगरपालिका की लापरवाही आई सामने*
किरंदुल और बचेली में पुलिस की इस मुहिम ने स्थानीय प्रशासन, खासकर नगरपालिका की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सीजी संविधान न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, किरंदुल और बचेली में एनएमडीसी जैसी बड़ी कंपनियों में काम करने वाले लगभग 2000 से 3000 मजदूर बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और अन्य राज्यों से आए हैं। ये मजदूर किराये के मकानों में रहते हैं, लेकिन उनकी जानकारी न तो नगरपालिका के पास होती है और न ही स्थानीय पुलिस थाने में दर्ज होती है।
नगरपालिका ने किराये के मकानों और उनके मालिकों का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा है। शहर में कितने किराये के मकान हैं, कितने लोग इनमें रहते हैं, इसकी जानकारी नगरपालिका के पास उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि बाहरी राज्यों से आए लोग आसानी से गुमनाम तरीके से किरंदुल और बचेली में रह रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगरपालिका की इस लापरवाही का फायदा असामाजिक तत्व उठा सकते हैं, जिससे सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
*प्राइवेट कंपनियों की भी जिम्मेदारी पर सवाल*
सीजी संविधान न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में यह भी उजागर किया कि किरंदुल और बचेली में एनएमडीसी के साथ काम करने वाली 3 से 4 बड़ी प्राइवेट कंपनियां बाहरी राज्यों से आए मजदूरों को काम पर रखती हैं। लेकिन इन मजदूरों की जानकारी न तो नगरपालिका को दी जाती है और न ही स्थानीय थाने में दर्ज की जाती है। यह स्थिति प्रशासनिक ढिलाई को दर्शाती है, जो सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है।
*पाकिस्तानी वीजा पर भी कोई जानकारी नहीं*
गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों में यह भी शामिल था कि पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा, जिन्हें भारत सरकार ने तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है, उनकी पहचान की जाए। लेकिन किरंदुल और बचेली में नगरपालिका के पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है कि शहर में कितने विदेशी नागरिक रह रहे हैं। यह स्थिति नगरपालिका की उदासीनता को और उजागर करती है।
*किरंदुल पुलिस की मेहनत को सलाम*
स्थानीय लोगों ने किरंदुल पुलिस की इस मुहिम की जमकर तारीफ की है। एक स्थानीय निवासी फीकेश्वर ठाकुर ने कहा, “पुलिस न केवल अपनी जिम्मेदारी निभा रही है, बल्कि नगरपालिका का काम भी कर रही है। अगर पुलिस इतनी मेहनत नहीं करती, तो शायद हमें पता ही नहीं चलता कि हमारे आसपास कौन लोग रह रहे हैं।” पुलिस की इस सक्रियता से न केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है, बल्कि लोगों में विश्वास भी बढ़ा है
*आगे की राह*
पहलगाम आतंकी हमले के बाद किरंदुल पुलिस की यह मुहिम एक मिसाल बन गई है। लेकिन यह भी सच है कि नगरपालिका और अन्य स्थानीय प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि नगरपालिका को किराये के मकानों और किरायेदारों का एक डेटाबेस तैयार करना चाहिए। साथ ही, प्राइवेट कंपनियों को भी अपने मजदूरों की जानकारी पुलिस और नगरपालिका के साथ साझा करने के लिए बाध्य करना चाहिए।किरंदुल पुलिस की इस पहल ने न केवल शहर की सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि प्रशासन की खामियों को भी उजागर किया है। अब जरूरत है कि स्थानीय प्रशासन अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से ले और पुलिस के साथ मिलकर शहर को और सुरक्षित बनाए।


