*किरंदुल: एनएमडीसी की लापरवाही और नगरपालिका की संदिग्ध उदारता का खेल*

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*किरंदुल: एनएमडीसी की लापरवाही और नगरपालिका की संदिग्ध उदारता का खेल*

छत्तीसगढ़ की सबसे धनी नगरपालिका किरंदुल एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह विकास नहीं, बल्कि एक बड़ा विवाद है। राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) की किरंदुल परियोजना की लापरवाही और नगरपालिका किरंदुल के संदिग्ध रवैये ने हजारों टन कीमती ब्लू डस्ट को लेकर सवालों का तूफान खड़ा कर दिया है। यह ब्लू डस्ट, जो 21 जुलाई 2024 को 11सी माइनिंग क्षेत्र से आए जल सैलाब के साथ वार्ड नंबर 1, 3, 4 और 6 में फैल गया, न केवल लोगों के घरों और गलियों में तबाही मचाने का कारण बना, बल्कि अब नगरपालिका कार्यालय के मैदान में लाखों-करोड़ों रुपये की इस संपत्ति को लेकर एक नया सियासी और आर्थिक खेल शुरू होने की आशंका को जन्म दे रहा है।

*ब्लू डस्ट की तबाही: एनएमडीसी की लापरवाही*

21 जुलाई 2024 को भारी बारिश के बाद एनएमडीसी की किरंदुल परियोजना के 11बी और 11सी माइंस के बीच स्थित एक चेक डैम टूट गया। यह चेक डैम, जो आयरन ओर वेस्ट को रोकने के लिए बनाया गया था, पिछले दो सालों से साफ नहीं किया गया था, जिसके लिए एनएमडीसी और नगरपालिका के बीच विवाद की बात सामने आई है। टूटने के बाद इस चेक डैम से निकला सैलाब हजारों टन ब्लू डस्ट को बहाकर किरंदुल के बंगाली कैंप और आसपास के वार्डों में ले गया। यह ब्लू डस्ट, जो उच्च गुणवत्ता वाले आयरन ओर का बारीक रूप है, न केवल लोगों के घरों में घुस गया, बल्कि सड़कों और गलियों को भी दलदल में तब्दील कर दिया।

लगभग 15 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद एनएमडीसी, जिला प्रशासन, नगरपालिका और स्थानीय लोगों के सहयोग से घरों से ब्लू डस्ट को निकाला गया। लेकिन इसके बाद जो हुआ, वह और भी चौंकाने वाला है। एनएमडीसी ने इस ब्लू डस्ट को टिप्परों में भरकर नगरपालिका किरंदुल के कार्यालय के खाली मैदान में डंप कर दिया। यह ब्लू डस्ट, जिसकी कीमत लाखों-करोड़ों में आंकी जा रही है, अब महीनों से वहीं पड़ा है, और एनएमडीसी इसे हटाने की कोई जल्दी नहीं दिखा रहा।

*नगरपालिका की उदारता या साजिश?*

सवाल यह है कि एनएमडीसी, जिसके पास विशाल खनन क्षेत्र और ब्लू डस्ट को स्टोर करने की पर्याप्त जगह है, ने इस कीमती सामग्री को नगरपालिका के मैदान में क्यों डंप किया? और उस समय के तत्कालीन नगरपालिका अध्यक्ष और मुख्य नगरपालिका अधिकारी ने इसे स्वीकार क्यों किया? क्या यह केवल प्रशासनिक लापरवाही थी, या इसके पीछे कोई गहरी साजिश थी? स्थानीय लोगों और जानकारों का मानना है कि इस ब्लू डस्ट के खेल में काली कमाई की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

एनएमडीसी ने प्रभावित लोगों को तत्काल 20,000 रुपये की सहायता राशि दी, जिसे कुछ लोग लापरवाही की स्वीकारोक्ति मानते हैं। लेकिन ब्लू डस्ट को नगरपालिका के मैदान में छोड़ देना और उसे हटाने में कोई रुचि न दिखाना कई सवाल खड़े करता है। क्या तत्कालीन अध्यक्ष और मुख्य नगरपालिका अधिकारी इस ब्लू डस्ट को बेचकर या किसी अन्य तरीके से लाभ कमाने की योजना बना रहे थे? क्या नगरपालिका आज भी इस ब्लू डस्ट को इसलिए नहीं हटा रही, क्योंकि इसमें कोई बड़ा आर्थिक लाभ छिपा है, जिसके लिए सही समय का इंतजार किया जा रहा है?

*पूर्व अध्यक्ष और मुख्य अधिकारी पर सवाल*

तत्कालीन नगरपालिका अध्यक्ष और मुख्य नगरपालिका अधिकारी की भूमिका इस पूरे मामले में संदेह के घेरे में है। सूत्रों के अनुसार, नगरपालिका ने न तो एनएमडीसी से इस ब्लू डस्ट को तुरंत हटाने की मांग की और न ही इसके लिए कोई ठोस योजना बनाई। यह भी सवाल उठता है कि इतनी बड़ी मात्रा में ब्लू डस्ट, जिसे एनएमडीसी आसानी से अपने परिसर में स्टोर कर सकता था, को नगरपालिका के मैदान में डंप करने की अनुमति क्यों दी गई? क्या यह फैसला केवल प्रशासनिक गलती थी, या इसके पीछे कोई सुनियोजित रणनीति थी?

स्थानीय निवासियों का कहना है कि ब्लू डस्ट की कीमत और इसके औद्योगिक महत्व को देखते हुए, इसे खुले में छोड़ना न केवल लापरवाही है, बल्कि चोरी या अवैध बिक्री की आशंका को भी बढ़ाता है। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि नगरपालिका के कुछ अधिकारी और पूर्व अध्यक्ष इस ब्लू डस्ट को लेकर एनएमडीसी के साथ मिलीभगत कर सकते हैं, ताकि इसे कम कीमत पर निजी कंपनियों को बेचा जा सके।

*जांच की मांग और पारदर्शिता की जरूरत*

इस पूरे मामले ने किरंदुल नगरपालिका और एनएमडीसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। 2020 में भी इसी तरह की एक घटना हो चुकी थी, लेकिन न तो एनएमडीसी ने अपनी गलतियों से सबक लिया और न ही जिला प्रशासन ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई नियम बनाए। दंतेवाड़ा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने अब तक खनन अपशिष्ट संरचनाओं के प्रबंधन के लिए कोई नियम या दिशानिर्देश जारी नहीं किए हैं, जो इस तरह की आपदाओं को और बढ़ावा देता है।

स्थानीय लोग और सामाजिक कार्यकर्ता मांग कर रहे हैं कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो। जांच में न केवल एनएमडीसी की लापरवाही की पड़ताल होनी चाहिए, बल्कि तत्कालीन नगरपालिका अध्यक्ष और मुख्य नगरपालिका अधिकारी की भूमिका की भी गहन जांच होनी चाहिए। क्या वे इस ब्लू डस्ट को लेकर कोई आर्थिक लाभ उठाने की योजना बना रहे थे? क्या नगरपालिका का मैदान इस ब्लू डस्ट को डंप करने के लिए इसलिए चुना गया, ताकि इसे बाद में गुप्त रूप से बेचा जा सके?

*निष्कर्ष:* जनता के हितों की अनदेखीकिरंदुल, जो अपनी समृद्धि के लिए जाना जाता है, आज एक ऐसी घटना का गवाह बना है, जो न केवल एनएमडीसी की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि नगरपालिका की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाती है। ब्लू डस्ट की तबाही ने लोगों के जीवन को प्रभावित किया, और अब इस कीमती सामग्री का दुरुपयोग होने की आशंका ने जनता के बीच आक्रोश को और बढ़ा दिया है।यह समय है कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे। एनएमडीसी को अपनी जिम्मेदारी लेनी होगी, और नगरपालिका को यह स्पष्ट करना होगा कि वह इस ब्लू डस्ट को अपने मैदान में क्यों सहेजे हुए है। जनता के हितों की रक्षा के लिए पारदर्शी जांच और कठोर कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों और किरंदुल की समृद्धि का लाभ वास्तव में जनता तक पहुंचे।

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