*दंतेवाड़ा-किरंदुल सड़क निर्माण: भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा जनता का सपना*
छत्तीसगढ़ का दंतेवाड़ा जिला, जो खनिज संपदा से समृद्ध है, वर्षों से एक बदहाल सड़क की मार झेल रहा था। दंतेवाड़ा से किरंदुल तक का 40 किलोमीटर का यह मुख्य मार्ग, जो कभी लोगों की जिंदगी को जोड़ने का जरिया था, खस्ताहाल स्थिति में तब्दील हो चुका था। इस मार्ग पर 40 किलोमीटर का सफर तय करने में 2 से 3 घंटे लगते थे, या फिर मजबूरी में पालनार-नकुलनार होते हुए 70 किलोमीटर का लंबा रास्ता चुनना पड़ता था। इस सड़क की बदहाली ने न केवल लोगों की दिनचर्या को प्रभावित किया, बल्कि कई जिंदगियों को भी लील लिया। अब, जब इस सड़क का निर्माण कार्य शुरू हुआ, तो उम्मीद की किरण जगी, लेकिन यह उम्मीद भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। ठेकेदार एन .सी. नाहर और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की लापरवाही ने इस सड़क को फिर से खतरे का पर्याय बना दिया है।
*वर्षों की बदहाली और निर्माण की शुरुआत*
दंतेवाड़ा-किरंदुल मार्ग की बदहाली कोई नई कहानी नहीं है। इस सड़क की स्थिति इतनी खराब थी कि गड्ढों और धूल भरे रास्तों ने यात्रियों की जिंदगी को नरक बना दिया था। लगभग 4 से 5 वर्ष पहले ठेकेदार आर.सी. नाहर को इस सड़क के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई। कार्य शुरू हुआ, सड़क को पूरी तरह खोद दिया गया, पुराने पुल-पुलियों को तोड़ दिया गया, और परिवर्तित कच्चे रास्ते बनाए गए। लेकिन इसके बाद ठेकेदार की सुस्ती और लापरवाही ने इस सड़क को और भी खतरनाक बना दिया। खोदी गई सड़क पर गड्ढे, धूल, और असुरक्षित रास्तों ने यात्रियों को परेशान किया। इस दौरान सड़क की खराब स्थिति के कारण 2 से 3 लोगों की जान भी चली गई।
*राज्य सरकार का दखल और ठेकेदार की नींद*
कांग्रेस शासनकाल में इस सड़क के निर्माण में कोई खास प्रगति नहीं हुई। लेकिन राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद दंतेवाड़ा के विधायक चैतराम अटामी ने इस मार्ग को गंभीरता से लिया। उन्होंने कलेक्टर और मुख्यमंत्री के साथ लगातार चर्चा कर ठेकेदार को कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिलवाया। मीडिया में भी इस सड़क को लेकर खबरें छपने लगीं, जिसके बाद ठेकेदार आर.सी. नाहर की कुम्भकर्णी नींद टूटी। देखते ही देखते सड़क निर्माण में तेजी आई और कुछ ही महीनों में सड़क का 80% काम पूरा हो गया। लेकिन इस जल्दबाजी में गुणवत्ता को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया।
*भ्रष्टाचार की परतें: पुल-पुलियों पर लापरवाही*
सड़क निर्माण में तेजी तो आई, लेकिन भ्रष्टाचार और लापरवाही ने इस प्रोजेक्ट को अपनी चपेट में ले लिया। भांसी तक के मार्ग पर सभी नालों पर बने पुलों को ऊंचा कर नया निर्माण किया गया, जो सराहनीय है। लेकिन भांसी से किरंदुल तक के पुराने और जर्जर पुलों को वैसे ही छोड़ दिया गया। इन पुलों पर केवल गुणवत्ताहीन डामर डालकर सड़क को तैयार कर दिया गया, जो भविष्य में बड़े हादसों को न्योता दे सकता है।
*बचेली मार्ग का खतरनाक अंधा मोड़:*
भांसी से लगभग 2 किलोमीटर दूर बचेली मार्ग पर एक अंधा मोड़ है, जहां एक पुल स्थित है। इस पुल के किनारे को खुला छोड़ दिया गया है, जो किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। ठेकेदार की इस लापरवाही ने स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है।
*किरंदुल का जर्जर पुल:*
किरंदुल में बीटीओए कार्यालय से मात्र 200 मीटर दूर एक पुल है, जो दो साल पहले वाहनों की आवाजाही से टूटकर बीच में बड़ा छेद बन गया था। नगरपालिका ने इसे अस्थायी रूप से भरकर हादसे को टाला था। लेकिन ठेकेदार एन.सी. नाहर ने इस जर्जर पुल का नया निर्माण करने के बजाय, उसी पुराने ढांचे पर डामरीकरण कर दिया। यह न केवल लापरवाही है, बल्कि लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है।
*लोक निर्माण विभाग की खामोशी*
इस पूरे मामले में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) दंतेवाड़ा की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। भ्रष्टाचार और लापरवाही के इतने गंभीर आरोपों के बावजूद विभाग खामोश बैठा है। न तो ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई, न ही सड़क और पुलों की गुणवत्ता की जांच के लिए कोई कदम उठाया गया। यह खामोशी इस बात की ओर इशारा करती है कि विभाग भी इस भ्रष्टाचार में शामिल हो सकता है।
*ग्रामीणों का आक्रोश और ठेकेदार की मनमानी*
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार ने सड़क निर्माण में न केवल गुणवत्ताहीन सामग्री का उपयोग किया, बल्कि नियम-कायदों की भी धज्जियां उड़ाईं। भांसी से किरंदुल तक के पुलों की स्थिति बद से बदतर है। ग्रामीणों ने पहले भी ठेकेदार, विधायक, और कलेक्टर से शिकायत की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अक्टूबर 2024 में ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की धीमी गति के खिलाफ चक्काजाम किया, जिसके बाद ठेकेदार ने लिखित में जल्द काम पूरा करने का वादा किया था। लेकिन अब यह साफ हो चुका है कि ठेकेदार ने सिर्फ खानापूर्ति की और गुणवत्ता को पूरी तरह नजरअंदाज किया।
*सवाल जो बिना जवाब के अधूरे हैं*
@ ठेकेदार एन .सी. नाहर ने भांसी से किरंदुल तक के जर्जर पुलों का नया निर्माण क्यों नहीं किया?
@ लोक निर्माण विभाग ने ठेकेदार की लापरवाही पर कार्रवाई क्यों नहीं की?क्या गुणवत्ताहीन डामर और पुराने पुलों पर सड़क निर्माण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत है?
@ क्या इस सड़क की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच होगी, ताकि भ्रष्टाचार की परतें खुल सकें?
*आगे की राह और जनता की मांग*
दंतेवाड़ा-किरंदुल सड़क मार्ग, जो कभी इस क्षेत्र के विकास का प्रतीक बन सकता था, आज भ्रष्टाचार और लापरवाही का शिकार हो चुका है। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों की मांग है कि इस सड़क और इसके पुलों की गुणवत्ता की उच्चस्तरीय जांच की जाए। ठेकेदार एन .सी. नाहर और इसमें शामिल अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। साथ ही, भांसी से किरंदुल तक के सभी जर्जर पुलों का नया निर्माण सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में कोई बड़ा हादसा न हो।
*निष्कर्ष* दंतेवाड़ा-किरंदुल सड़क निर्माण की कहानी विकास की नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और लापरवाही की दास्तान बन गई है। यह सड़क न केवल दंतेवाड़ा की जनता की उम्मीदों का प्रतीक है, बल्कि इस क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास का आधार भी है। यदि सरकार और प्रशासन ने इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह सड़क फिर से लोगों की जिंदगी के लिए खतरा बन सकती है। समय है कि ठेकेदार और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि जनता का विश्वास विकास की इस राह पर बरकरार रहे।

