जब मासूम चेहरों पर खामोशी नहीं, *आँखों में आग* दिखने लगे,  

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जब मासूम चेहरों पर खामोशी नहीं, *आँखों में आग* दिखने लगे,  

जब डर की जगह *जवाबदेही* की माँग उठने लगे,

तो समझ लीजिए — अब *सहन की सारी सीमाएं टूट चुकी हैं।*

*मुख्यमंत्री महोदय,*  

अब सवाल आपके पास हैं।

*कौन बचाएगा इन बच्चियों को, जब पूरा सिस्टम सो रहा है?*

जब शासन की छाया खुद  

*डर और असुरक्षा का पर्याय बन जाए,*

तो न्याय अदालतों में नहीं,

*सड़कों पर तलाशा जाता है।*

इन नन्हीं बच्चियों ने वो सवाल पूछ लिए हैं,  

*जिनसे आप अब तक मुँह चुराते रहे:*

 *”सरकार, हम कब तक डरेंगे?”*  

*”क्यों हर बार बेटियाँ ही अत्याचार की शिकार बनती हैं?”*

*”क्या हमारे लिए कोई कानून, कोई सुरक्षा, कोई जवाबदेही नहीं?”*

ना पुलिस सक्रिय, ना प्रशासन संवेदनशील,  

ना नेताओं में जवाब देने की हिम्मत।

बस कैमरे के सामने भाषण,

और दीवारों पर चिपके खोखले पोस्टर।

*क्या यही है ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का सच?*  

या फिर ये सिर्फ एक चुनावी नारा था,

जिसे ज़मीन पर कभी उतरने ही नहीं दिया गया?

अब *हर बच्ची, हर बहन, हर माँ*  

पूछ रही है –

*”क्या मेरा अस्तित्व सिर्फ आँकड़ों तक सीमित रहेगा?”*

*”क्या मेरे जीवन की कीमत पोस्टर और वादों से भी कम है?”*

 हम चुप नहीं रहेंगे।

अब हर आवाज़ उठेगी, हर सड़क गूंजेगी,

हर दीवार पर सिर्फ नारों की नहीं, *क्रांति की लहर दौड़ेगी।*

क्योंकि अब लड़ाई सिर्फ किसी एक की नहीं—  

*हर बेटी, हर परिवार, हर इंसान की है।*

*हम तब तक नहीं रुकेंगे,*  

जब तक हर चेहरा *डर से नहीं, आत्मविश्वास से चमकेगा।*

 *अब सवाल उठेंगे। जवाब देना ही होगा।*  

क्योंकि ये सवाल अब सिर्फ उनका नहीं,

*हम सबका है।*

*आपका एक शेयर किसी की ज़िंदगी बदल सकता है — कभी अनजाने में ही सही।*

 *निडर। निष्पक्ष। निरंतर। देखने और बोलने की एक कोशिश।*  

*ईमानदारी की कलम से, दबाव से परे, डर से दूर — जब तक साँस है, आपकी आवाज़ बनकर साथ रहूँगा।*

 *”जब सब खामोश हो जाएं, तब जनस्वर मोर माटी बोलता है”*  

अगर आपके क्षेत्र में कोई *सच्ची घटना, जनसमस्या, भ्रष्टाचार या अनदेखा मुद्दा* है,

जो *प्रशासन, मीडिया या समाज की नज़र से ओझल है* तो *हमें फोटो, वीडियो या तथ्य के साथ भेजिए।*  *हम उसे बनाएंगे आपकी आवाज़ — और जिम्मेदारों से जवाब माँगेंगे।*

 *हमारा लक्ष्य — उन सवालों को उठाना, जो अक्सर अनसुने रह जाते हैं।*

_”जहाँ ज़मीन बोले, वहाँ ज़मीर जागता है।”_

 *हम सिर्फ खबरें नहीं बनाते, हकीकत को सामने लाते हैं।* *आप भी बनें बदलाव की एक कड़ी:* 

*रक्तदान | जनकल्याण | सामाजिक चेतना | प्रेरक पहल*

*जसराज जैन ‘रक्तमित्र’*

संस्थापक – *शबरी जन सेवा ट्रस्ट*

📍 *सुकमा, छत्तीसगढ़ 8889638101*

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