*प्रकाश विद्यालय में किताबों की खुली लूट: अभिभावकों का आक्रोश, जिला शिक्षा अधिकारी की चेतावनी*
छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में स्थित प्रकाश विद्यालय में किताबों और स्टेशनरी की बिक्री के नाम पर खुली लूट का मामला सामने आया है, जिसने अभिभावकों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। सी जी संविधान न्यूज़ की विशेष खोजी पत्रकारिता के माध्यम से इस गंभीर मुद्दे को उजागर किया गया, जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। विद्यालय परिसर में ही किताबों, टी-शर्ट, बेल्ट, टाई और डायरी जैसी सामग्रियों की मनमानी कीमतों पर बिक्री ने अभिभावकों की कमर तोड़ दी है, और इस मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से लोगों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
*विद्यालय परिसर में बुक स्टॉल: खुली लूट का अड्डा*
प्रकाश विद्यालय ने अपनी बिल्डिंग के एक अतिरिक्त कमरे को बुक स्टॉल में तब्दील कर दिया है, जहां किताबों से लेकर स्टेशनरी और यूनिफॉर्म तक की बिक्री हो रही है। अभिभावकों का आरोप है कि यहां बिकने वाली किताबों की कीमतें आसमान छू रही हैं। उदाहरण के लिए, कक्षा 6 की किताबों का सेट 5,000 रुपये से अधिक और कक्षा 9 की किताबें 8,000 रुपये से ज्यादा में बेची जा रही हैं। तुलनात्मक रूप से, अन्य स्कूलों में समान कक्षाओं की किताबें मात्र 2,000 से 3,000 रुपये में उपलब्ध हैं। सवाल उठता है कि प्रकाश विद्यालय की किताबों में ऐसा क्या खास है कि उनकी कीमतें इतनी अधिक हैं?
अभिभावकों ने सी जी संविधान न्यूज़ को बताया कि अन्य स्कूलों की किताबें शहर की सभी किताबों की दुकानों में आसानी से मिल जाती हैं, लेकिन प्रकाश विद्यालय की किताबें केवल स्कूल परिसर में ही उपलब्ध हैं। इस एकाधिकार के चलते स्कूल प्रबंधन मनमानी कीमतें वसूल रहा है, जिससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है। एक अभिभावक ने दुखी मन से कहा, “मेरे दो बच्चे कक्षा 6 और 7 में पढ़ते हैं। हर साल स्कूल नए नियम बनाकर नई किताबें, नया टी-शर्ट और स्टेशनरी खरीदने के लिए मजबूर करता है। पुरानी किताबें बेकार हो जाती हैं, क्योंकि स्कूल हर साल किताबें बदल देता है। यह हमारे लिए बहुत बड़ा आर्थिक बोझ है।”
*सी जी संविधान न्यूज़ की पहल: अभिभावकों की आवाज़ बनी ताकत*
सी जी संविधान न्यूज़ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अभिभावकों की शिकायतों को प्रमुखता से उठाया। न्यूज़ चैनल के संपादक किशोर कुमार रामटेके ने इस मुद्दे को जनता के सामने लाने के साथ-साथ जिला शिक्षा अधिकारी से सीधे संपर्क कर स्थिति की जानकारी ली। उनकी इस पहल ने न केवल अभिभावकों को एक मंच प्रदान किया, बल्कि प्रशासन को भी कार्रवाई के लिए मजबूर किया।
छह दिन पहले, सी जी संविधान न्यूज़ की खबर के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने दावा किया था कि खंड शिक्षा अधिकारी के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित कर दी गई है। हालांकि, जांच की प्रगति के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली, जिससे अभिभावकों में निराशा बढ़ रही थी। लेकिन सी जी संविधान न्यूज़ की लगातार निगरानी और दबाव के चलते जिला शिक्षा अधिकारी ने अब सख्त रुख अपनाया है।
*जिला शिक्षा अधिकारी का सख्त रुख: दो दिन की मोहलत*
सी जी संविधान न्यूज़ के संपादक किशोर कुमार रामटेके ने आज जिला शिक्षा अधिकारी से मुलाकात कर मामले की ताजा स्थिति जानी। अधिकारी ने बताया कि खंड शिक्षा अधिकारी ने प्रकाश विद्यालय को दो दिनों के भीतर पूरी जानकारी देने के लिए नोटिस जारी किया है। अगर स्कूल इस अवधि में संतोषजनक जवाब देने में विफल रहता है, तो तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “विद्यालय परिसर में किताबों या स्टेशनरी की बिक्री का कोई नियम नहीं है। प्रकाश विद्यालय को तुरंत स्कूल परिसर में किताबों की बिक्री बंद करनी होगी। उन्हें किसी अधिकृत दुकान के माध्यम से किताबें उपलब्ध करानी होंगी। ऐसा न करने पर स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, जिसमें मान्यता रद्द करना भी शामिल हो सकता है।”
*अभिभावकों का गुस्सा: “यह लूट कब रुकेगी?*
”प्रकाश विद्यालय की मनमानी से त्रस्त अभिभावकों का कहना है कि स्कूल का यह रवैया न केवल उनकी आर्थिक स्थिति पर बोझ डाल रहा है, बल्कि बच्चों की शिक्षा पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। एक अभिभावक ने कहा, “हम मेहनत-मजदूरी करके अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहते हैं, लेकिन स्कूल की इस लूट ने हमें परेशान कर दिया है। हर साल नई किताबें, नई यूनिफॉर्म और स्टेशनरी खरीदना हमारे लिए असंभव हो रहा है।”
अन्य अभिभावकों ने स्कूल के एकाधिकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किताबें बाहर की दुकानों में उपलब्ध हों, तो कीमतें कम हो सकती हैं और अभिभावकों को विकल्प मिलेगा। लेकिन स्कूल की नीति के चलते उन्हें मजबूरी में महंगी किताबें खरीदनी पड़ रही हैं।
*सी जी संविधान न्यूज़ की सराहना*
जिला शिक्षा अधिकारी ने सी जी संविधान न्यूज़ की इस मुहिम की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “आपके चैनल ने इस गंभीर मुद्दे को उजागर करके अभिभावकों की आवाज़ को ताकत दी है। आपकी पत्रकारिता ने प्रशासन को त्वरित कार्रवाई के लिए प्रेरित किया है। हम सुनिश्चित करेंगे कि इस मामले में न्याय हो और अभिभावकों को राहत मिले।”
सी जी संविधान न्यूज़ के संपादक किशोर कुमार रामटेके ने कहा, “हमारा उद्देश्य जनता की समस्याओं को सामने लाना और उनके हक के लिए लड़ना है। प्रकाश विद्यालय का यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शिक्षा तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और मनमानी को दर्शाता है। हम तब तक इस मुद्दे को उठाते रहेंगे, जब तक अभिभावकों को पूरी राहत नहीं मिल जाती।”
*क्या है आगे की राह?*
प्रकाश विद्यालय को अब दो दिनों की मोहलत दी गई है। अगर स्कूल इस अवधि में जवाब देने में विफल रहता है या उसका जवाब संतोषजनक नहीं होता, तो जिला शिक्षा विभाग कड़ी कार्रवाई कर सकता है। अभिभावकों की मांग है कि स्कूल परिसर में किताबों की बिक्री पर तत्काल रोक लगे, किताबें अधिकृत दुकानों से उपलब्ध कराई जाएं और कीमतों को नियंत्रित किया जाए। साथ ही, हर साल किताबें बदलने की नीति पर भी रोक लगनी चाहिए।
सी जी संविधान न्यूज़ इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और अभिभावकों के हित में हर संभव प्रयास करेगा। यह खबर न केवल प्रकाश विद्यालय की मनमानी को उजागर करती है, बल्कि उन सभी निजी स्कूलों के लिए एक चेतावनी है जो अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। शिक्षा के नाम पर लूट को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और सी जी संविधान न्यूज़ इस लड़ाई में अभिभावकों के साथ खड़ा है।
*सी जी संविधान न्यूज़* की इस खोजी पत्रकारिता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सच्चाई और जनता की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता। हम इस मामले में हर अपडेट के साथ आपके साथ रहेंगे।

