*किरंदुल-बचेली मार्ग पर 8 दिनों से जंगल की खाई में सड़ रही पुरानी कार: पुलिस की नजरों से दूर, क्या छिपा है चोरी या सूखे नशे की साजिस का राज?*

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*किरंदुल-बचेली मार्ग पर 8 दिनों से जंगल की खाई में सड़ रही पुरानी कार: पुलिस की नजरों से दूर, क्या छिपा है चोरी या सूखे नशे की साजिस का राज?*

किरंदुल, 10 अक्टूबर 2025 (सी ज़ी संविधान ): छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक उदासीनता का एक और काला अध्याय जुड़ गया है। किरंदुल से बचेली मार्ग पर, मुक्तिधाम मंदिर से महज 100 मीटर दूर, एक पुरानी कार लगभग 8 दिनों से जंगल की गहरी खाई में पड़ी सड़ रही है। वाहन नंबर CG 07 9317 (दुर्ग रजिस्ट्रेशन) की यह दुर्घटना न केवल सड़क हादसों की बढ़ती संख्या को उजागर करती है, बल्कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन पर भी सवाल खड़े कर रही है। क्या यह महज एक सामान्य एक्सीडेंट था, या इसके पीछे चोरी, अपहरण या यहां तक कि सूखा नशा जैसी साजिश छिपी हुई है? आने-जाने वाले सैकड़ों लोग इस दुर्घटना की गवाही दे चुके हैं, लेकिन पुलिस थाने में अब तक कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई—यह प्रशासन की नाकामी का जीता-जागता प्रमाण है।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, कार किरंदुल से मात्र 1 किलोमीटर आगे मुक्तिधाम के पास खाई में गिरी हुई है। वाहन की हालत शोचनीय है—सभी शीशे चूर-चूर, पिछला एक चक्का गायब, और बॉडी पर  छत्तीग्रस्त है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि दुर्घटना में कोई घायल या मृत व्यक्ति क्यों नहीं मिला? क्या ड्राइवर और यात्री भाग निकले, या फिर कोई आपराधिक घटना के बाद सबूत मिटाने की कोशिश की गई? स्थानीय किसान रामू मंडावी ने बताया, “हर रोज दर्जनों गाड़ियां इस रास्ते से गुजरती हैं। सबने कार देखी, फोटो भी खींचे, लेकिन किसी ने पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी? यह इलाका तो नक्सलियों का गढ़ है, लेकिन पुलिस की नजर यहां तक नहीं पहुंची।” रामू का यह बयान प्रशासन की कमजोरी को बेनकाब करता है, जहां बुनियादी निगरानी तक नदारद है।

बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार चढ़ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में दंतेवाड़ा जिले में ही 150 से अधिक रोड एक्सीडेंट दर्ज हुए हैं, जिनमें 40 से ज्यादा मौतें हुईं। लेकिन इस कार का मामला अलग है—यह अनदेखी का शिकार हो गया है। वाहन का रजिस्ट्रेशन दुर्ग जिले का होने से संदेह और गहरा जाता है। क्या यह चोरी की कार थी, जिसे कोई गिरोह जंगल के रास्ते से ले जा रहा था? या फिर कोई व्यापारी या पर्यटक, जो नक्सली धमकी के कारण रास्ता बदलते हुए दुर्घटनाग्रस्त हो गया? स्थानीय ट्रक ड्राइवर सुरेश यादव ने कहा, “यह रास्ता पहले से ही खतरनाक है—तंग सड़कें, जंगली जानवर, और नक्सली गतिविधियां। लेकिन पुलिस पेट्रोलिंग कहां है? अगर समय पर जांच होती, तो शायद कोई बड़ा राज खुल जाता। अब तो कार जंगल में सड़ रही है, और मालिक की किस्मत का पता नहीं।”

प्रशासनिक चुप्पी ने इस घटना को और रहस्यमय बना दिया है। किरंदुल थाने के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हमें ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली। लेकिन हम जांच करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तर में सड़क सुरक्षा की कमी न केवल दुर्घटनाओं को बढ़ावा दे रही है, बल्कि अपराधियों के लिए आसान रास्ता भी मुहैया करा रही है। पर्यावरण कार्यकर्ता नेहा साहू ने टिप्पणी की, “जंगल में पड़ी यह कार न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है—तेल रिसाव से मिट्टी प्रदूषित हो रही है—बल्कि यह प्रशासन की विफलता का प्रतीक है। अगर समय पर कार हटाई जाती, तो शायद कोई सुराग मिल जाता।”

यह घटना बस्तर के निवासियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। क्या सरकार सड़क सुरक्षा पर ध्यान देगी, या फिर ऐसी अनदेखी घटनाएं बढ़ती जाएंगी? स्थानीय लोग अब सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे वीडियो और फोटो के जरिए न्याय की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन सवाल वही है—क्या पुलिस अब भी इस ओर ध्यान देगी, या फिर कोई बड़ा कवर-अप चल रहा है? यह कार जंगल में पड़ी सड़ रही है, लेकिन इसके साथ-साथ बस्तर की सुरक्षा व्यवस्था की साख भी धुंधला रही है।

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