*किरंदुल में सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मी देवी की लापरवाही से सड़क-नाली जाम, वार्डवासियों का आक्रोश फूटा; पार्षद पर भी सवाल*
किरंदुल, 4 अक्टूबर 2025: छत्तीसगढ़ के किरंदुल नगर पालिका के वार्ड नंबर 1 में एक पुरानी दीवार के ढहने से सड़क पर फैला मलबा न केवल राहगीरों की मुसीबत बना हुआ है, बल्कि नाली को पूरी तरह अवरुद्ध कर गंदे पानी का तालाब भी बना दिया है। इस घटना का केंद्र बिंदु वार्ड की प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मी देवी का घर है, जो खुद ठेकेदार होने के बावजूद मलबे को हटाने की जिम्मेदारी से पीछे हट रही हैं। वार्डवासियों का आरोप है कि उनकी यह लापरवाही न केवल स्थानीय सफाई व्यवस्था को चुनौती दे रही है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य को भी खतरे में डाल रही है। आज सुबह सैकड़ों की संख्या में स्थानीय निवासी सड़क पर उतर आए, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
घटना की शुरुआत मानसून के दौरान हुई, जब लक्ष्मी देवी के घर की एक पुरानी दीवार बारिश की मार झेलते हुए ढह गई। मलबा सड़क पर बिखर गया, जो अब भी वैसा ही पड़ा हुआ है। वार्डवासी बताते हैं कि यह मलबा न केवल पैदल चलने वालों को असुविधा दे रहा है, बल्कि आसपास की नालियों को पूरी तरह भर चुका है। नतीजा? नाली का गंदा पानी सड़क पर जमा होकर एक फुट गहरा गड्ढा-सा तालाब बन गया है। “यह नाली पूरे मोहल्ले के घरों से निकलने वाले गंदे पानी को ले जाती है, लेकिन अब यह सड़क पर ही रुक गया है। बच्चे-बुजुर्ग सब इसी कीचड़ भरे पानी को पार कर घर-दुकान जाते हैं,” कहते हैं वार्ड की एक बुजुर्ग निवासी सरिता बाई। उनका कहना है कि इससे मच्छरों और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, खासकर मानसून के बाद के मौसम में।
लक्ष्मी देवी, जो खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताती हैं और स्थानीय स्तर पर कई सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहने का दावा करती हैं, इस मामले में पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं। दिलचस्प बात यह है कि लक्ष्मी देवी के पास खुद का ट्रैक्टर है और वे ठेकेदार के रूप में कई निर्माण कार्य संभाल चुकी हैं। फिर भी, वे मलबा हटाने को तैयार नहीं। उनका पक्ष? “यह नगर पालिका का काम है। वे ही मलबा हटाएंगे,” जैसा कि स्थानीय लोगों ने उनकी ओर से सुना है। लेकिन वार्डवासियों का मत स्पष्ट है: “अगर घर आपका है, दीवार आपकी गिरी है, तो जिम्मेदारी भी आपकी होनी चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता बनने का मतलब सिर्फ भाषण देना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाना भी है।”
यह मुद्दा नया नहीं है। पिछले कई महीनों से वार्डवासी पार्षद को शिकायतें भेज रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। “हमने पत्र लिखे, मीटिंग में उठाया, लेकिन पार्षद साहब कहते हैं कि नगर पालिका से बात करेंगे। बात कहां हो रही है?” गुस्से में बोलते हैं युवा निवासी रामू। आज का आंदोलन इसी आक्रोश का नतीजा है, जहां सड़क जाम कर लोग लक्ष्मी देवी और नगर पालिका दोनों के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।
विश्लेषण: लापरवाही का सामाजिक आईना
यह घटना केवल एक घर की दीवार के ढहने की कहानी नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन और सामाजिक नेतृत्व की लापरवाही का आईना है। लक्ष्मी देवी जैसी कार्यकर्ता, जो खुद संसाधनों की मालकिन हैं, यदि अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेती हैं, तो यह एक खतरनाक उदाहरण पेश करता है। ठेकेदार होने के नाते वे अच्छी तरह जानती होंगी कि मलबा हटाना कितना आसान है – उनके ट्रैक्टर से मुश्किल से एक-दो घंटे का काम। लेकिन नगर पालिका पर बोझ डालकर वे न केवल सार्वजनिक धन का दुरुपयोग कर रही हैं, बल्कि वार्डवासियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को जोखिम में डाल रही हैं। नाली जाम होने से फैलने वाली बीमारियां, जैसे डेंगू या मलेरिया, पहले ही क्षेत्र में सिरदर्द बने हुए हैं।
पार्षद और नगर पालिका की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। नगर निगम अधिनियम के तहत, सार्वजनिक स्थान पर बाधा हटाना पालिका का दायित्व है, लेकिन निजी संपत्ति से उत्पन्न मलबे के लिए मालिक की प्राथमिक जिम्मेदारी तय है। यदि पार्षद ने समय पर हस्तक्षेप किया होता, तो यह आंदोलन टल सकता था। यह घटना बताती है कि स्थानीय स्तर पर ‘सामाजिक कार्यकर्ता’ शब्द की परिभाषा बदलने की जरूरत है – यह सिर्फ दिखावा नहीं, बल्कि वास्तविक सेवा होनी चाहिए।
आगे क्या?
नगर पालिका ने वादा किया है कि 48 घंटों में मलबा हटाने की टीम भेजी जाएगी, लेकिन वार्डवासी अब लिखित आश्वासन मांग रहे हैं। लक्ष्मी देवी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन वे उपलब्ध नहीं हुईं। यदि यह लापरवाही जारी रही, तो यह मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंच सकता है। किरंदुल जैसे छोटे शहरों में ऐसी घटनाएं विकास की राह में बड़ी बाधा बनती हैं। उम्मीद है कि यह आंदोलन स्थानीय प्रशासन को झकझोर देगा और लक्ष्मी देवी जैसी ‘नेताओं’ को अपनी जिम्मेदारी याद दिलाएगा।

