*बांदा जिले के कालिंजर में बिजली की ‘आंख-मिचौली’ से त्रस्त ग्रामीण, प्रधान बोले- ‘विसर्जन में व्यस्त, बाद में देखेंगे’*
बांदा, 3 अक्टूबर 2025: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के कालिंजर ग्राम पंचायत में बिजली की अनियमित आपूर्ति ने ग्रामीणों का जीवन नर्क बना दिया है। दिन-रात चलने वाली इस ‘आंख-मिचौली’ से परेशान स्थानीय लोग अब सड़कों पर उतरने की धमकी दे रहे हैं। ऐतिहासिक कालिंजर किले की छांव में बसे इस गांव में बिजली की कटौती न केवल दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और छोटे कारोबारों को भी बुरी तरह चोट पहुंचा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई दिनों से बिजली विभाग की लापरवाही के कारण 4-5 घंटे की लगातार कटौती आम हो गई है। रात के समय तो हालात और भी खराब हो जाते हैं, जब अंधेरे में परिवारों को मोमबत्तियों की रोशनी में गुजारा करना पड़ता है। “हमारे बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे, बुजुर्गों को दवाइयां समय पर नहीं मिल पा रही। यह तो सरासर अन्याय है,” बताते हैं गांव की रहने वाली सुनीता देवी। एक अन्य ग्रामीण रामू ने गुस्से में कहा, “बिजली गोल (कटौती) से हमारी कमाई चौपट हो रही है। अगर जल्द समाधान न हुआ तो हम जिला मुख्यालय तक धरना देंगे।”
इस मामले में ग्राम प्रधान बबलू सिंह से जब बात की गई, तो उन्होंने अपनी मजबूरी बताई। “मैं अभी गणेश विसर्जन के आयोजन में व्यस्त हूं। गांव का यह धार्मिक उत्सव महत्वपूर्ण है, इसलिए फिलहाल कुछ नहीं कर पा रहा। लेकिन विसर्जन के बाद तुरंत बिजली विभाग से बात कर समाधान निकालूंगा,” उन्होंने आश्वासन दिया। प्रधान का यह बयान सुनकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है, जो मानते हैं कि लोकतंत्र में जनसेवा को त्योहारों से ऊपर रखा जाना चाहिए।
बांदा जिले में बिजली की समस्या कोई नई नहीं है। जिले के ग्रामीण इलाकों में पुरानी ट्रांसफॉर्मरों की कमी, चोरी रोकने में नाकामी और रखरखाव की अनदेखी के कारण ऐसी शिकायतें आम हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के बाद की मरम्मत कार्यों में देरी से यह समस्या और गंभीर हो जाती है। स्थानीय बिजली विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “ट्रांसफॉर्मर की क्षमता कम होने से लोड ज्यादा होने पर कटौती होती है। जल्द ही नया उपकरण लगाने का प्लान है।”
ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप करे और 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करे। कालिंजर जैसे ऐतिहासिक गांव का विकास बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं पर टिका है। क्या बबलू प्रधान विसर्जन के बाद वादा निभाएंगे, या ग्रामीणों को फिर सड़क पर उतरना पड़ेगा? यह सवाल अब जिला प्रशासन के समक्ष खड़ा है।
