*किरंदुल में साइबर ठगी के खिलाफ जागरूकता अभियान: पुलिस थाना प्रभारी संजय यादव की टीम ने नगरपालिका कर्मचारियों को किया सतर्क, विश्लेषण में उजागर हुए नए खतरे*
किरंदुल, 18 सितंबर 2025 (स्पेशल रिपोर्ट): डिजिटल युग में साइबर ठगी एक आम समस्या बन चुकी है, जहां हर दिन हजारों लोग ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल में आज यह समस्या और गंभीर रूप ले रही है, जहां खनन क्षेत्र होने के कारण आर्थिक लेन-देन बढ़ने से साइबर अपराधियों की नजरें टिकी हुई हैं। इसी कड़ी में किरंदुल पुलिस थाना प्रभारी संजय यादव और उनकी पूरी टीम ने नगरपालिका परिषद किरंदुल के कर्मचारियों के बीच एक विशेष जागरूकता सत्र का आयोजन किया। इस सत्र में साइबर ठगी के विभिन्न रूपों का विस्तृत विश्लेषण किया गया, ताकि स्थानीय स्तर पर अपराधों को रोका जा सके। कार्यक्रम में मुख्य नगरपालिका अधिकारी शशिभूषण महापात्र सहित सभी कर्मचारी, पुलिस टीम के सदस्य उपस्थित रहे।
साइबर ठगी का बढ़ता खतरा: स्थानीय संदर्भ में विश्लेषण
किरंदुल जैसे छोटे शहरों में साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पुलिस थाना प्रभारी संजय यादव ने बताया कि पिछले एक वर्ष में जिले में साइबर अपराधों की संख्या में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यहां के खनन मजदूरों और सरकारी कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है, जहां फर्जी लॉटरी, इंश्योरेंस स्कीम या सरकारी योजना के नाम पर ठगी की जा रही है। यादव ने विश्लेषण के दौरान बताया कि साइबर अपराधी अक्सर फिशिंग ईमेल, फर्जी वेबसाइट्स या व्हाट्सएप कॉल्स के जरिए शिकार बनाते हैं। उदाहरण के तौर पर, एक सामान्य तरीका है जहां अपराधी खुद को बैंक अधिकारी बताकर ओटीपी मांगते हैं, जिससे खाते खाली हो जाते हैं।
यादव ने सत्र में एक केस स्टडी पेश की, जहां किरंदुल के एक स्थानीय निवासी को फर्जी हाउसिंग वेबसाइट के जरिए 45,000 रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया था। उन्होंने कहा, “साइबर अपराधी पुलिस से दो कदम आगे रहते हैं। वे बैंक कर्मचारियों और मोबाइल कंपनियों के साथ गठजोड़ कर खातों को तुरंत खाली कर देते हैं।” राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में प्रतिदिन औसतन 1,000 से अधिक साइबर ठगी के मामले दर्ज हो रहे हैं, जिनमें से 30 प्रतिशत वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े हैं। छत्तीसगढ़ में भी हाल के महीनों में इंश्योरेंस स्कैम के नाम पर लाखों रुपये की ठगी के मामले सामने आए हैं, जहां पीड़ितों को सरकारी योजना का लालच दिया जाता है।
सत्र में साइबर ठगी के प्रकारों का गहन विश्लेषण किया गया:
फिशिंग और स्मिशिंग: फर्जी मैसेज या कॉल्स से व्यक्तिगत जानकारी चुराना। किरंदुल में ऐसे मामलों में 60 प्रतिशत ठगी मोबाइल के जरिए हो रही है।
ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड: फर्जी ऐप्स या लिंक्स से खाते हैक करना। यादव ने चेतावनी दी कि 1930 हेल्पलाइन पर तुरंत कॉल करने से पैसे वापस मिलने की संभावना 50 प्रतिशत बढ़ जाती है।
सोशल मीडिया स्कैम: फर्जी प्रोफाइल से दोस्ती कर पैसे मांगना। स्थानीय स्तर पर महिलाओं और बुजुर्गों को निशाना बनाया जा रहा है।
नया खतरा – डीपफेक वीडियो: अपराधी अब एआई टूल्स से फर्जी वीडियो बनाकर ब्लैकमेल कर रहे हैं, जो किरंदुल जैसे क्षेत्रों में अभी उभर रहा है।
जागरूकता के उपाय: तत्काल कार्रवाई की सलाह
प्रभारी संजय यादव ने कर्मचारियों को सलाह दी कि साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत स्थानीय पुलिस थाने, मुख्य नगरपालिका अधिकारी, नगरपालिका अध्यक्ष या नजदीकी पत्रकारों से संपर्क करें। उन्होंने जोर देकर कहा, “समय रहते शिकायत दर्ज करने से 70 प्रतिशत मामलों में पैसे वापस हो जाते हैं। साइबर क्राइम थाने की स्थापना से अब जांच तेज हो गई है।” सत्र में व्यावहारिक टिप्स दिए गए, जैसे:
कभी भी ओटीपी या पिन शेयर न करें।
अज्ञात लिंक्स पर क्लिक न करें।
दो-चरणीय सत्यापन (2FA) चालू रखें।
नियमित रूप से बैंक स्टेटमेंट चेक करें।
मुख्य नगरपालिका अधिकारी शशिभूषण महापात्र ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा, “नगरपालिका के कर्मचारी सार्वजनिक सेवा से जुड़े हैं, इसलिए उनकी जागरूकता पूरे समुदाय के लिए फायदेमंद होगी। हम जल्द ही अन्य विभागों में भी ऐसे सत्र आयोजित करेंगे।” सत्र में उपस्थित सभी कर्मचारियों ने प्रतिबद्धता जताई कि वे अपने परिवार और सहकर्मियों को भी इस बारे में बताएंगे।
भविष्य की योजना: पुलिस की व्यापक मुहिम
किरंदुल पुलिस थाना इस अभियान को आगे बढ़ाने की योजना बना रहा है। प्रभारी यादव ने बताया कि आने वाले महीनों में स्कूलों, बाजारों और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे। साथ ही, साइबर क्राइम सेल के साथ समन्वय बढ़ाकर स्थानीय स्तर पर हेल्प डेस्क स्थापित किया जाएगा। यह अभियान न केवल ठगी रोकने में मददगार होगा, बल्कि डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देगा।
यह कार्यक्रम किरंदुल में साइबर सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो दिखाता है कि सामुदायिक सहयोग से अपराधों पर अंकुश लगाया जा सकता है। यदि आप भी साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं, तो देर न करें – 1930 पर कॉल करें या नजदीकी थाने पहुंचें।
