*किरंदुल: बीजेपी के ‘गढ़’ में आंतरिक कलह, व्यापारियों का बंटवारा तोड़ रहा एकता; कांग्रेस को मिल रही एंट्री का मौका?*

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*किरंदुल: बीजेपी के ‘गढ़’ में आंतरिक कलह, व्यापारियों का बंटवारा तोड़ रहा एकता; कांग्रेस को मिल रही एंट्री का मौका?*

किरंदुल, 8 सितंबर 2025 (विशेष संवाददाता): छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल क्षेत्र में बैलाडीला व्यपारी कल्याण संघ, जो लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, अब आंतरिक विवादों की भेंट चढ़ रहा है। 15 अगस्त के ध्वजारोहण समारोह से शुरू हुए परिवारवाद के आरोपों ने संघ को तोड़फोड़ की स्थिति में पहुंचा दिया है। स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि बीजेपी के ही वरिष्ठ नेता बाजार को दो गुटों में बांटने का काम कर रहे हैं, जिससे व्यापारियों में आक्रोश फैल रहा है और विपक्षी दल कांग्रेस को इस गढ़ में घुसपैठ का सुनहरा अवसर मिल रहा है।

बैलाडीला व्यपारी कल्याण संघ, जो किरंदुल के प्रमुख व्यापारिक संगठन के रूप में जाना जाता है, वर्षों से बीजेपी के समर्थन में खड़ा रहा है। लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने इस एकता को चुनौती दे दी है। स्थानीय स्तर पर बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें पूर्व सांसद प्रतिनिधि रविंद्र सोनी, मंडल अध्यक्ष विजय सोढ़ी, किरंदुल मंडल के राजू विपराल, संजय सोनी  तथा वर्तमान पार्षद राजकुमार सोनी ,और जैदीप माकन, सागर साहा, संजू दास तपन दास जैसे नाम शामिल हैं, पर बाजार को विभाजित करने का आरोप लगाया जा रहा है। इन नेताओं को मंच का प्रमुख स्थान प्राप्त है, लेकिन व्यापारियों का कहना है कि उनके व्यक्तिगत हितों ने संघ की एकजुटता को कमजोर कर दिया है।

एक वरिष्ठ व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “बीजेपी के शीर्ष नेताओं द्वारा बाजार के व्यापारियों को दो भागों में बांटकर आपस में लड़ाने से पार्टी को ही नुकसान पहुंच रहा है। ये नेता जो खुद को वरिष्ठ बताते हैं, वे ही बीजेपी के गढ़ को तोड़ रहे हैं। इससे व्यापारियों का भरोसा टूट रहा है और कांग्रेस जैसी पार्टियां फायदा उठा रही हैं।” एक अन्य व्यापारी ने कहा, “15 अगस्त के ध्वजारोहण से शुरू हुआ यह परिवार मोह अब संघ को पूरी तरह बर्बाद करने पर तुला है। हम व्यापारी सिर्फ व्यापार चाहते हैं, राजनीतिक झगड़ों में नहीं उलझना चाहते।”

इस विवाद ने स्थानीय राजनीति को नई दिशा दे दी है। किरंदुल व्यपारी कल्याण संघ के निर्माण में बीजेपी के गढ़ में कांग्रेस की एंट्री की चर्चा अब आम हो चुकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह कलह नहीं रुका, तो आगामी चुनावों में बीजेपी को बड़ा झटका लग सकता है। बाजार के विभाजन से न केवल व्यापार प्रभावित हो रहा है, बल्कि सामाजिक सद्भाव भी खतरे में पड़ गया है।

बीजेपी के स्थानीय नेताओं ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन व्यापारियों की नाराजगी साफ दिख रही है। संघ के सदस्यों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही एकता बहाल नहीं हुई, तो वे स्वतंत्र रूप से अपनी आवाज बुलंद करेंगे। यह घटना न केवल किरंदुल बल्कि पूरे बैलाडीला क्षेत्र की राजनीति के लिए एक सबक हो सकती है, जहां व्यापारी वर्ग हमेशा से ही निर्णायक भूमिका निभाता रहा है।

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