*किरंदुल में व्यापारी संघों के बीच विवाद: पुराने संघ की एकता बनाम नई साजिश की चाल?*
किरंदुल, 02 सितंबर 2025: किरंदुल के व्यापारी समुदाय इन दिनों एक गंभीर अशांति से गुजर रहा है। एक ओर 40 वर्षों से अधिक पुराना और पंजीकृत बैलाडीला व्यापारी कल्याण संघ (पंजीयन संख्या: 122202326906) है, जिसे बुजुर्ग व्यापारियों ने वर्षों की मेहनत से स्थापित किया है। दूसरी ओर, कुछ चुनिंदा ठेकेदारों द्वारा हाल ही में गठित किरंदुल व्यापारी कल्याण संघ है, जिसका कोई आधिकारिक पंजीयन नहीं है और जिसे व्यापारियों को दो खेमों में बांटने की साजिश के रूप में देखा जा रहा है। इस विवाद ने स्थानीय व्यापारियों में भ्रम और चिंता पैदा कर दी है, खासकर ऐसे समय में जब ऑनलाइन व्यापार की चुनौतियां पहले से ही सभी को परेशान कर रही हैं।
*अम्बेडकर भवन में आयोजित बैठक*
हाल ही में अम्बेडकर भवन में आयोजित बैठक इस विवाद का केंद्र बिंदु बनी। व्यापारी बैलाडीला संघ के चुनावों पर चर्चा की उम्मीद लेकर पहुंचे थे, लेकिन बैठक की शुरुआत में ही किरंदुल व्यापारी कल्याण संघ के गठन और 15 सितंबर 2025 को वोटिंग की घोषणा कर दी गई। इस पर 70% से अधिक उपस्थित व्यापारियों ने तीखा विरोध जताया। कई ने बैठक का बहिष्कार कर दिया, क्योंकि उन्हें लगा कि बिना किसी सामूहिक चर्चा, जानकारी या सहमति के नई समिति का गठन एकतरफा फैसला है। विरोध करने वालों का कहना था कि बैठक बैलाडीला संघ के चुनाव के लिए बुलाई गई थी, न कि किसी नई इकाई को जन्म देने के लिए।
*बिना हस्ताक्षर और तारीख वाली रसीद*
विवाद और गहराया जब दोनों पक्षों ने सदस्यता अभियान शुरू किया। बैलाडीला संघ ने अपनी पुरानी परंपरा के अनुसार सदस्यता फॉर्म काटना जारी रखा, जबकि किरंदुल संघ ने भी रसीदें जारी कीं। लेकिन नई रसीदों में गंभीर खामियां सामने आईं: इनमें न तो कोई तारीख दर्ज है, न ही किसी अधिकृत व्यक्ति के हस्ताक्षर। सिर्फ सदस्य का नाम लिखा हुआ है, जो पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है। ऐसे में कई व्यापारी सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह रसीदें वैध हैं? क्या इन्हें किसी भी कानूनी या वित्तीय उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना हस्ताक्षर और तारीख वाली रसीदें सिर्फ एक कागज का टुकड़ा हैं, जो सदस्यों के अधिकारों की रक्षा नहीं कर सकतीं। इससे धोखाधड़ी या गलत उपयोग की आशंका बढ़ जाती है।
*कुछ अफवाहें भी फैलाई जा रही हैं*
इस बीच, कुछ अफवाहें भी फैलाई जा रही हैं जो विवाद को और भड़का रही हैं। एक अफवाह यह है कि बैलाडीला संघ एक एनजीओ है, जो पूरी तरह निराधार साबित हुई है। दूसरी अफवाह मुख्य बाजार में नगरपालिका द्वारा निर्मित मंगल भवन पर लगे बीएसएनएल टावर के किराए से जुड़ी है। कहा जा रहा है कि यह किराया बैलाडीला संघ को जाता है और संघ के अध्यक्ष द्वारा इसका गबन किया जा रहा है। लेकिन जब इसकी जांच के लिए नगरपालिका अध्यक्ष से बात की गई, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि टावर का किराया सीधे नगरपालिका के खाते में जमा होता है। इसमें किसी बाहरी संगठन या व्यक्ति का कोई अधिकार नहीं है। यह अफवाहें साफ तौर पर व्यापारियों को भ्रमित करने और पुराने संघ को बदनाम करने की कोशिश लगती हैं।
*विश्लेषण: एकता की जरूरत, विभाजन की साजिश?*
यह विवाद सिर्फ दो संघों का नहीं, बल्कि किरंदुल के व्यापारी समुदाय की एकजुटता का सवाल है। पुराना बैलाडीला संघ दशकों से व्यापारियों के हितों की रक्षा करता आ रहा है, जबकि नया संघ कुछ चुनिंदा लोगों द्वारा बंद कमरे में गठित किया गया लगता है, जहां नेतृत्व की घोषणा व्हाट्सएप ग्रुप में बिना सहमति के की गई। ऐसे में सवाल उठता है: क्या यह विभाजन व्यापारियों को कमजोर करने की चाल है? आज जब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स स्थानीय व्यापार को चुनौती दे रहे हैं, तब सभी को एक मंच पर आना चाहिए, न कि टूटना। नई रसीदों की खामियां—जैसे हस्ताक्षर और तारीख की कमी—यह दर्शाती हैं कि नया संघ अभी अपरिपक्व और अविश्वसनीय है। इससे सदस्यों के पैसे और अधिकारों पर खतरा मंडरा सकता है।
व्यापारियों से अपील: हम सभी व्यापारियों से अनुरोध करते हैं कि सावधानी बरतें। अफवाहों पर ध्यान न दें और जांच-पड़ताल करें। एकता ही ताकत है—पुराने, पंजीकृत और विश्वसनीय बैलाडीला संघ में बने रहें। विभाजन सिर्फ दुश्मनों को फायदा पहुंचाएगा। यदि कोई नया संघ बनाना है, तो उसे पारदर्शी तरीके से, सभी की सहमति से और कानूनी पंजीयन के साथ करें। किरंदुल के भोले-भाले व्यापारी इस साजिश से सतर्क रहें और एकजुट होकर अपने हितों की रक्षा करें। अधिक जानकारी के लिए बैलाडीला संघ से संपर्क करें।
