*दंतेवाड़ा में बाढ़ त्रासदी के बीच स्वास्थ्य विभाग का सराहनीय योगदान: अजय कुमार रामटेके के कुशल नेतृत्व में राहत कार्य जोरों पर*
दंतेवाड़ा, 2 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच जिला स्वास्थ्य विभाग, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. अजय कुमार रामटेके के कुशल नेतृत्व में, प्रभावित क्षेत्रों में राहत और स्वास्थ्य सेवाओं को सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात कार्य कर रहा है। विभाग की पूरी टीम 24 घंटे तत्परता के साथ बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में कैंप लगाकर प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखे हुए है।
*स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता और राहत कार्य*
डॉ. अजय कुमार रामटेके के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित और प्रभावी कदम उठाए हैं। विभाग की टीमें बाढ़ग्रस्त गांवों में कैंप स्थापित कर रही हैं, जहां दवाइयों, मच्छरदानी, और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सामग्री का वितरण किया जा रहा है। स्वयं डॉ. रामटेके घर-घर जाकर लोगों से मिल रहे हैं, उनकी स्वास्थ्य स्थिति का जायजा ले रहे हैं और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
इस आपदा के समय स्वच्छता और बीमारियों की रोकथाम एक बड़ी चुनौती है। मच्छरजनित रोगों जैसे डेंगू और मलेरिया से बचाव के लिए मच्छरदानी और कीटनाशक दवाओं का वितरण तेजी से किया जा रहा है। इसके साथ ही, पीने के पानी की शुद्धता और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए भी विभाग द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
*चुनौतियों के बीच स्वास्थ्य विभाग का समर्पण*
दंतेवाड़ा में बाढ़ ने सैकड़ों परिवारों को प्रभावित किया है, और कई गांवों में यातायात और संचार के साधन बुरी तरह बाधित हैं। ऐसी विषम परिस्थितियों में प्रत्येक घर तक पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना एक जटिल कार्य है। फिर भी, डॉ. रामटेके के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग ने इस चुनौती को स्वीकार किया और इसे बखूबी निभा रहा है।
डॉ. रामटेके ने बताया, “हमारी प्राथमिकता है कि कोई भी व्यक्ति स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न रहे। हमारी टीमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में न केवल दवाइयां पहुंचा रही हैं, बल्कि लोगों को जागरूक भी कर रही हैं ताकि वे बीमारियों से बच सकें।” उनकी यह सक्रियता और समर्पण न केवल स्वास्थ्य विभाग की कार्यकुशलता को दर्शाता है, बल्कि आपदा के समय मानवीय संवेदनशीलता का भी उदाहरण प्रस्तुत करता है।
*जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का समन्वय*
जिला प्रशासन के साथ मिलकर स्वास्थ्य विभाग ने राहत कार्यों को और प्रभावी बनाया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कैंपों में चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, और स्वास्थ्य कर्मी लगातार लोगों की निगरानी कर रहे हैं। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
*स्थानीय लोगों में भरोसा*
स्थानीय निवासियों ने स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों की सराहना की है। एक बाढ़ प्रभावित गांव के निवासी रामू नेताम ने कहा, “डॉ. रामटेके और उनकी टीम ने हमारे गांव में आकर न केवल दवाइयां दीं, बल्कि हमारी समस्याएं भी सुनीं। इस मुश्किल घड़ी में उनका साथ हमें हिम्मत दे रहा है।”
दंतेवाड़ा में बाढ़ त्रासदी के बीच स्वास्थ्य विभाग का कार्य न केवल एक मिसाल है, बल्कि यह दर्शाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी समर्पण और कुशल नेतृत्व से बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। डॉ. अजय कुमार रामटेके की अगुवाई में स्वास्थ्य विभाग की यह पहल न केवल बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत का सबब बनी है, बल्कि यह भी साबित करती है कि मानव सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है।
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के इस समन्वित प्रयास से दंतेवाड़ा के लोग इस आपदा से उबरने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं।
