*दंतेवाड़ा में DAV पब्लिक स्कूल किरंदुल विवाद: बलात्कार के आरोप में शिक्षक की पुनर्नियुक्ति पर जिला शिक्षा अधिकारी का आदेश, लेकिन अनुपालना पर सवाल*

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

*दंतेवाड़ा में DAV पब्लिक स्कूल किरंदुल विवाद: बलात्कार के आरोप में शिक्षक की पुनर्नियुक्ति पर जिला शिक्षा अधिकारी का आदेश, लेकिन अनुपालना पर सवाल*

किरंदुल, दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़), 29 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में DAV पब्लिक स्कूल किरंदुल में शिक्षक राकेश कुमार की पुनर्नियुक्ति का मामला तूल पकड़ रहा है। राकेश कुमार पर धारा 376(2)(न) के तहत बलात्कार का गंभीर आरोप है, और उनका मामला जिला सत्र न्यायालय में विचाराधीन है। गिरफ्तारी और जेल में समय बिताने के बाद जमानत पर रिहा होने के बावजूद उनकी स्कूल में पुनर्नियुक्ति ने स्थानीय समुदाय में आक्रोश पैदा किया था। अब जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने फोन पर जानकारी दी कि शिक्षक को स्कूल से हटा दिया गया है, , यह सवाल बना हुआ है कि क्या DAV स्कूल ने DEO के आदेश का पालन किया है या इसे अनदेखी कर रहा है।

ताजा अपडेट: DEO का आदेश और कोर्ट की सुनवाई

29 अगस्त 2025 को दंतेवाड़ा DEO ने स्पष्ट किया कि राकेश कुमार को DAV पब्लिक स्कूल से हटाने का आदेश जारी किया गया है, क्योंकि उनका मामला न्यायालय में विचाराधीन है। DEO ने कहा, “बाल सुरक्षा और नैतिकता के मद्देनजर, हमने स्कूल को निर्देश दिया है कि शिक्षक को नींबित किया जाये,उसी दिन राकेश कुमार की जिला सत्र न्यायालय में पेशी थी, जहां मामला अभी भी विचाराधीन है। सूत्रों के अनुसार, अगली सुनवाई जल्द होगी, लेकिन अंतिम फैसला आने में समय लग सकता है।

DAV स्कूल की अनुपालना पर संदेह

हालांकि DEO ने शिक्षक को हटाने की बात कही, लेकिन स्थानीय लोगों और अभिभावकों का दावा है कि DAV स्कूल ने अब तक इस आदेश का पालन नहीं किया है। एक अभिभावक ने बताया, “शिक्षक को स्कूल में देखा गया है, और प्रबंधन इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है।” पहले भी स्कूल ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत जानकारी देने से इनकार कर दिया था, दावा करते हुए कि वे RTI के दायरे में नहीं आते। यह जवाब स्कूल की जवाबदेही पर सवाल उठाता है, क्योंकि CBSE संबद्ध स्कूलों को नियामक निकायों के प्रति पारदर्शिता बरतने की अपेक्षा की जाती है।

CBSE और POCSO नियम: क्या कहते हैं?

CBSE संबद्धता उपनियम (Affiliation Bye-Laws, 2018) में शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता और पुलिस सत्यापन अनिवार्य है, लेकिन लंबित आपराधिक मामलों पर स्पष्ट प्रतिबंध नहीं है। हालांकि, POCSO नियम, 2020 के तहत सभी स्कूलों को बच्चों के संपर्क में आने वाले कर्मचारियों का बैकग्राउंड चेक करना जरूरी है। धारा 376 जैसे गंभीर अपराधों में लंबित मामले वाले व्यक्ति को बच्चों के बीच काम करने की अनुमति देना POCSO दिशानिर्देशों का उल्लंघन माना जा सकता है। शिक्षा मंत्रालय की स्कूल सुरक्षा दिशानिर्देश (2021) भी आवधिक पुलिस जांच और नैतिक अधमता (moral turpitude) वाले मामलों में सख्ती की बात कहते हैं।

DAV स्कूल, जो CBSE से संबद्ध है, अपनी आचार संहिता में गिरफ्तारी या आपराधिक कार्यवाही की जानकारी देना अनिवार्य करता है। लेकिन लंबित मामलों में पुनर्नियुक्ति के लिए स्पष्ट नीति की कमी इस विवाद को जटिल बनाती है।

तुलनात्मक उदाहरण: हैदराबाद DAV स्कूल मामला

2022 में हैदराबाद के BSD DAV पब्लिक स्कूल में एक चार साल की बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था। वहां स्कूल के प्रिंसिपल के ड्राइवर को 20 साल की सजा हुई, और प्रिंसिपल की लापरवाही के लिए स्कूल की मान्यता रद्द कर दी गई थी। इस मामले में तेलंगाना सरकार और CBSE ने त्वरित कार्रवाई की थी। दंतेवाड़ा में भी ऐसी ही सख्ती की मांग उठ रही है।

*अभिभावकों और समुदाय की चिंता* 

बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। स्कूल प्रबंधन का यह रवैया अस्वीकार्य है।” कई अभिभावकों ने CBSE और छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग से जांच की मांग की है।

*निष्कर्ष: जवाबदेही और कार्रवाई की जरूरत*

DEO के आदेश के बाद अब गेंद DAV स्कूल के पाले में है। क्या स्कूल ने राकेश कुमार को वाकई हटा दिया है, या DEO के निर्देश को अनदेखी कर रहा है? यह सवाल जवाबदेही की कमी को उजागर करता है। CBSE और POCSO नियमों के तहत स्कूल को बाल सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। यदि अनुपालना नहीं होती, तो स्कूल की मान्यता पर भी सवाल उठ सकते हैं, जैसा कि हैदराबाद मामले में हुआ।

न्यायालय के अंतिम फैसले का इंतजार है, लेकिन तब तक बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को प्राथमिकता देना जरूरी है। इस मामले ने एक बार फिर निजी स्कूलों की स्वायत्तता और नियामक ढांचे के बीच संतुलन की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

Leave a Comment

और पढ़ें

Buzz4 Ai

Read More Articles