*दंतेवाड़ा में बाढ़ ने खोली बाईपास पुल की गुणवत्ता की पोल: भ्रष्टाचार की बू या निर्माण में लापरवाही?*

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*दंतेवाड़ा में बाढ़ ने खोली बाईपास पुल की गुणवत्ता की पोल: भ्रष्टाचार की बू या निर्माण में लापरवाही?*

 

दंतेवाड़ा, 26 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में मूसलाधार बारिश और बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल सड़कों और गांवों को जलमग्न किया, बल्कि दंतेवाड़ा के बाईपास पर बने नए पुल की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। 26 अगस्त को आई बाढ़ में यह नया पुल नक्शे से पूरी तरह गायब हो गया, और हैरानी की बात यह है कि इसके पीलर (स्तंभ) तक बह गए। वहीं, वर्षों पुराना पुल, जिसका केवल एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ, आज भी मजबूती से खड़ा है। इस घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, ठेकेदार की जवाबदेही, और अभियंताओं की निगरानी पर सवाल उठाए हैं। क्या यह भ्रष्टाचार का नतीजा है, या महज लापरवाही? आइए, इस मामले का गहराई से विश्लेषण करें।

*बाढ़ ने उजागर की सच्चाई*

26 अगस्त 2025 को दंतेवाड़ा में डंकनी नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया कि बाईपास पर बना नया पुल पूरी तरह बह गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले छह वर्षों में पहली बार नदी का जलस्तर इतना अधिक था कि आसपास के घर और दुकानें जलमग्न हो गईं। इस बाढ़ ने बाईपास पुल की कमजोर नींव को उजागर कर दिया। जहां पुराना पुल, जो दशकों से खड़ा है, केवल आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ, वहीं नया पुल अपने पीलरों समेत गायब हो गया। यह स्पष्ट संकेत है कि निर्माण में गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया।

*निर्माण में भ्रष्टाचार या लापरवाही?*

इस घटना ने स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों के बीच गहरी नाराजगी पैदा की है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस पुल का निर्माण भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया? क्या ठेकेदार ने सस्ती सामग्री का उपयोग किया? या फिर अभियंताओं की निगरानी में कमी रही? विशेषज्ञों का कहना है कि एक पुल के पीलर का बह जाना तकनीकी रूप से गंभीर खामी को दर्शाता है। पीलर किसी भी पुल की रीढ़ होते हैं, और अगर वे ही बाढ़ में बह गए, तो यह निर्माण की नींव और डिज़ाइन में खामियों की ओर इशारा करता है।

स्थानीय निवासी रामू नेताम ने गुस्से में कहा, “नया पुल तो पुराने पुल से भी कमजोर निकला। पुराना पुल आज भी खड़ा है, लेकिन नया पुल पानी की पहली तेज धार में ही ढह गया। क्या प्रशासन और ठेकेदार को इसका जवाब नहीं देना चाहिए?”

*प्रशासन की भूमिका और जांच की मांग*

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 28 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बस्तर संभाग के कलेक्टरों से बाढ़ के नुकसान और राहत कार्यों की समीक्षा की। दंतेवाड़ा के कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बताया कि जिले में 14 पुल-पुलिया क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें बाईपास पुल भी शामिल है। मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत के लिए युद्ध स्तर पर काम करने के निर्देश दिए। लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस घटना की गहराई से जांच करेगा?

स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि बाईपास पुल के निर्माण में शामिल ठेकेदार और अभियंताओं की जवाबदेही तय की जाए। सामाजिक कार्यकर्ता अनिता साहू ने कहा, “यह सिर्फ एक पुल का बहना नहीं है, यह जनता के विश्वास का टूटना है। प्रशासन को चाहिए कि वह ठेकेदार का नाम सार्वजनिक करे, निर्माण की गुणवत्ता की जांच करे, और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करे।”

*कौन है जिम्मेदार?*

फिलहाल, इस पुल के निर्माण में शामिल ठेकेदार और अभियंता का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है। यह जानकारी जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग के पास उपलब्ध होनी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि पुल निर्माण में कई स्तरों पर जांच होती है, जिसमें डिज़ाइन, सामग्री की गुणवत्ता, और निर्माण प्रक्रिया की निगरानी शामिल है। अगर पीलर तक बह गए, तो यह संभव है कि नींव के लिए आवश्यक गहराई, सीमेंट-रेत का अनुपात, या अन्य तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया।

*पुराने बनाम नए पुल का अंतर*

पुराने पुल का केवल एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होना, जबकि नया पुल पूरी तरह बह जाना, निर्माण की गुणवत्ता में स्पष्ट अंतर को दर्शाता है। पुराने पुल, जो दशकों पहले बने थे, उस समय की तकनीक और सीमित संसाधनों के बावजूद अधिक मजबूत साबित हुए। यह सवाल उठता है कि आधुनिक तकनीक और भारी बजट के बावजूद नया पुल इतना कमजोर क्यों था? क्या लागत में कटौती के लिए गुणवत्ता से समझौता किया गया?

निष्कर्ष

दंतेवाड़ा के बाईपास पुल का बह जाना केवल एक प्राकृतिक आपदा का परिणाम नहीं है, बल्कि यह निर्माण में लापरवाही या भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। यह घटना प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि बुनियादी ढांचे के निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। जनता का विश्वास जीतने के लिए प्रशासन को न केवल इस मामले की गंभीरता से जांच करनी होगी, बल्कि दोषियों को सजा भी देनी होगी। अगर यह मुद्दा अनदेखा किया गया, तो यह भ्रष्टाचार की बाढ़ में बह जाएगा, जैसे यह पुल 26 अगस्त की बाढ़ में बह गया।

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