*किरंदुल में रेबीज संक्रमित गौमाता की मौत: सुप्रीम कोर्ट के आदेश की रोशनी में नगरपालिका की लापरवाही उजागर, आवारा कुत्तों पर नियंत्रण की तत्काल जरूरत*

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*किरंदुल में रेबीज संक्रमित गौमाता की मौत: सुप्रीम कोर्ट के आदेश की रोशनी में नगरपालिका की लापरवाही उजागर, आवारा कुत्तों पर नियंत्रण की तत्काल जरूरत*

किरंदुल, 21 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ के किरंदुल शहर में हाल ही में एक रेबीज संक्रमित गौमाता की दर्दनाक मौत ने स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। न्यू टाइप 3 मोहल्ले के युवाओं की सतर्कता से एक बड़ा स्वास्थ्य संकट टल गया, लेकिन सवाल उठता है: आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए शेल्टर होम क्यों नहीं बनाए जा रहे? हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने दिल्ली-NCR में सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर्स में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है, जो किरंदुल जैसे छोटे शहरों के लिए एक सख्त चेतावनी है। क्या नगरपालिका रेबीज जैसे घातक मामलों में अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल हो रही है? आइए इस घटना का विश्लेषण करें और समझें कि लापरवाही के क्या परिणाम हो सकते हैं।

घटना का पुनरावलोकन: लापरवाही से बढ़ा खतरा

जैसा कि पहले रिपोर्ट किया गया, किरंदुल में एक गौमाता को आवारा कुत्तों द्वारा काटे जाने के बाद रेबीज संक्रमण हो गया। गौ सेवकों और नगरपालिका ने इसे दोपहर में पकड़कर एक पेड़ से बांध दिया, लेकिन बारिश में इसे खुले में छोड़ दिया गया। तिरपाल हट जाने से गौ भीगती रही, और रात में युवाओं ने इसे शीतला माता मंदिर के टीना शेड में पहुंचाया। सुबह गौ की मौत हो गई। यदि युवाओं की पहल न होती, तो संक्रमित गौ को कुत्तों द्वारा नोचने से रेबीज पूरे शहर में फैल सकता था, जो इंसानों के लिए जानलेवा साबित होता।

विश्लेषण से स्पष्ट है कि नगरपालिका की मुख्य लापरवाही यहां है: गौ को तत्काल गौठान में नहीं ले जाया गया, जहां दो अतिरिक्त कमरे उपलब्ध हैं लेकिन कचरा और कबाड़ से भरे पड़े हैं। ऐसे संक्रमित पशुओं को अलग रखने की कोई व्यवस्था नहीं थी, जो रेबीज नियंत्रण के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन है। भारत में रेबीज 36% वैश्विक मौतों के लिए जिम्मेदार है, और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, आवारा कुत्तों का 99% मामलों में संक्रमण का स्रोत है।d4efc5 किरंदुल जैसी घटनाएं दिखाती हैं कि अपर्याप्त वेस्ट मैनेजमेंट और कुत्तों की बढ़ती आबादी रेबीज फैलाव को बढ़ावा देती है।7d6b16

सुप्रीम कोर्ट का हालिया आदेश: आवारा कुत्तों पर सख्ती का संदेश

11 अगस्त 2025 को, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में बढ़ते कुत्तों के काटने और रेबीज मामलों के मद्देनजर एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया। कोर्ट ने सभी आवारा कुत्तों को 8 सप्ताह में कैद कर स्टेरलाइजेशन, वैक्सीनेशन और परमानेंट शेल्टर्स में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया।1c2f9879b059f0db13 कोर्ट ने एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) रूल्स को “absurd” बताते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है, और कोई भी बच्चा रेबीज का शिकार नहीं होना चाहिए।8fefac शेल्टर्स की क्षमता बढ़ाने और प्रोग्रेसिव तरीके से कुत्तों को रखने का आदेश दिया गया, जो पहले के रिलीज पॉलिसी से अलग है।625442

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यह आदेश पूरे भारत के लिए एक मिसाल है। किरंदुल नगरपालिका को भी इसी तर्ज पर कार्य करना चाहिए, लेकिन यहां शेल्टर्स की कमी और गौठान के संसाधनों का दुरुपयोग देखा जा रहा है। संविधान के आर्टिकल 243(W) के तहत, नगरपालिकाएं आवारा कुत्तों की पॉपुलेशन कंट्रोल, स्टेरलाइजेशन और शेल्टर्स बनाने के लिए जिम्मेदार हैं।671a3b प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स एक्ट 1960 और वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 भी क्रूरता से बचाव और कंट्रोल पर जोर देते हैं।adcebd फिर भी, कई नगरपालिकाएं नेग्लिजेंस दिखाती हैं, जैसे वैक्सीनेशन अभियान न चलाना या रिपोर्टिंग सिस्टम न होना।4feb3246d25a

रेबीज कंट्रोल में नेग्लिजेंस: एक राष्ट्रीय समस्या

भारत का नेशनल एक्शन प्लान फॉर डॉग मीडिएटेड रेबीज एलिमिनेशन (NAPRE) 2030 तक रेबीज मुक्त बनाने का लक्ष्य रखता है, जिसमें वैक्सीनेशन, स्टेरलाइजेशन और पब्लिक अवेयरनेस शामिल है।fe2416 लेकिन नगरपालिकाओं की लापरवाही – जैसे अपर्याप्त शेल्टर्स, खराब वेस्ट मैनेजमेंट और कोऑर्डिनेशन की कमी – इस लक्ष्य को बाधित कर रही है।a4beded5e92c किरंदुल में, अगर कुत्तों पर नियंत्रण होता, तो गौ को काटने की नौबत न आती। विशेषज्ञों के अनुसार, वेस्ट मैनेजमेंट की कमी से कुत्ते भोजन की तलाश में आक्रामक हो जाते हैं, जो रेबीज फैलाव को बढ़ावा देता है।f26913

चेतावनी: समय रहते सुधारें, वरना महामारी का खतरा

यह घटना एक सख्त चेतावनी है: अगर नगरपालिकाएं सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना को अपनाकर शेल्टर्स नहीं बनातीं और कुत्तों का वैक्सीनेशन नहीं करतीं, तो किरंदुल जैसे छोटे शहरों में रेबीज महामारी फैल सकती है। गांवों में ऐसी घटनाएं और भी घातक साबित होंगी, जहां मेडिकल सुविधाएं सीमित हैं। निवासियों को सलाह: संदिग्ध कुत्तों से दूर रहें, और बाइट होने पर तुरंत पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) लें। नगरपालिका को हेल्पलाइन, डॉग-कैचिंग टीम्स और गौठान सुधारने चाहिए।0d194c

युवाओं की बहादुरी सराहनीय है, लेकिन सिस्टेमेटिक सुधार के बिना ऐसे प्रयास अपर्याप्त रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू करने का समय है – जीवन बचाने के लिए लापरवाही को अब बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

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