*दंतेवाड़ा में महिलाओं की सुरक्षा पर पुलिस की सख्ती: तीन घटनाओं में दो मामलों में गिरफ्तारियां, समुदाय की मांगों पर सकारात्मक कदम की उम्मीद*
दंतेवाड़ा, 20 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के कुंवाकोंडा ब्लॉक में पिछले एक महीने में महिलाओं से जुड़ी तीन दुखद घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था, लेकिन पुलिस की त्वरित कार्रवाई और समुदाय की एकजुटता ने अब उम्मीद की किरण जगाई है। इन घटनाओं में से दो में आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है, जबकि तीसरी घटना की जांच तेजी से चल रही है। कुंजाम समाज और सर्व आदिवासी समाज ने एनएमडीसी (नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) से महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस मांगें रखी हैं, जो क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती हैं। पुलिस अधीक्षक गौरव राय के नेतृत्व में टीमों की मेहनत से न्याय की प्रक्रिया तेज हुई है, जिससे महिलाओं और बालिकाओं में सुरक्षा का विश्वास बढ़ रहा है।
*पहली घटना: ब्लाइंड मर्डर का खुलासा, आरोपी जेल में*
29 जुलाई को सामने आई पहली घटना में पालनार ग्राम पंचायत की 45 वर्षीय महिला का शव बाजार के पास नग्न अवस्था में मिला था। जांच में पता चला कि 25 जुलाई की शाम महिला बाजार में थी, जहां अज्ञात आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म कर हत्या की। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, साइबर सेल की मदद और संदिग्धों से पूछताछ के आधार पर आरोपी भीमा राम मरकाम उर्फ बोडडा को 5 अगस्त को गिरफ्तार किया। उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया। पुलिस अधीक्षक गौरव राय, अतिरिक्त एसपी उदित पुष्कर और एसडीओपी कल्पना वर्मा के मार्गदर्शन में टीम ने इस गुत्थी को महज कुछ दिनों में सुलझाया, जो पुलिस की संवेदनशीलता और दक्षता का प्रमाण है। निरीक्षक मोहर साय लहरे सहित टीम के सदस्यों की सराहना की जा रही है।
*दूसरी घटना: जांच जारी, पीड़िता को बेहतर इलाज, समुदाय का समर्थन*
1 अगस्त को पेरपा चौक के पास जंगल में 21 वर्षीय महिला को नग्न और घायल अवस्था में साड़ी से बंधा पाया गया। परिजनों को दुष्कर्म की आशंका है, लेकिन पीड़िता की हालत गंभीर होने से वह बोलने में असमर्थ रही। किरंदुल पुलिस ने 27 जुलाई को शिकायत दर्ज की और जांच शुरू की। पीड़िता को पहले डिमरापाल रेफर किया गया, फिर किरंदुल परियोजना अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी स्थिति अब स्थिर बताई जा रही है। हालांकि अभी गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पुलिस का कहना है कि जांच तेजी से चल रही है। इस घटना ने कुंजाम समाज और आदिवासी समुदाय में आक्रोश पैदा किया, लेकिन इसी ने उन्हें एकजुट किया है। आज हुई बैठक में उन्होंने एनएमडीसी से मांग की कि ठेकेदारों के कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य किया जाए, उनकी सूची और भुगतान डिटेल्स रखी जाएं, तथा निवास स्थानीय स्तर पर सीमित किया जाए। ये मांगें क्षेत्र में महिलाओं की सुरक्षा मजबूत करने में मददगार साबित होंगी।
*तीसरी घटना: दो मामलों में त्वरित गिरफ्तारियां, फरार आरोपी को तमिलनाडु से पकड़ा*
9 अगस्त को कड़मपाल पंचायत में एक महिला को अपने घर में अर्धनग्न और बेहोश पाया गया। जांच में खुलासा हुआ कि प्रार्थी (पीड़िता का पति) लखमा कुंजाम और उसकी पहली पत्नी कुमे कुंजाम ने ही जमीन विवाद में उस पर हमला किया, गला दबाया और गुप्तांग में वस्तु डालकर हत्या का प्रयास किया। दोनों को 19 अगस्त को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। दूसरे मामले में एक नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी जितेंद्र कुमार रे को शादी का झांसा देकर फरार होने के बाद साइबर सेल की मदद से तमिलनाडु से पकड़ा गया और जेल भेजा गया। थाना किरंदुल के निरीक्षक संजय यादव के नेतृत्व में टीम ने 8 दिनों में दोनों मामलों को सुलझाया, जिसमें एसआई राजेश बघेल, अनिता चौधरी सहित कई सदस्यों का योगदान रहा। पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने इसे महिलाओं से जुड़े अपराधों पर जीरो टॉलरेंस की मिसाल बताया।
ये तीनों घटनाएं महज 15 किलोमीटर के दायरे में हुईं, जिससे क्षेत्र में भय का माहौल था, लेकिन पुलिस की सक्रियता ने इसे नियंत्रित किया। समुदाय की मांगें एनएमडीसी को भेजी गई हैं, जो ठेकेदारों के कर्मचारियों पर सख्ती बढ़ाकर घटनाओं को रोक सकती हैं। पुलिस का कहना है कि दूसरी घटना में जल्द गिरफ्तारी होगी, जबकि आदिवासी समाज की एकता से क्षेत्र में महिलाओं की सुरक्षा पर नई पहल शुरू हो रही है। यह साबित करता है कि चुनौतियों के बीच भी न्याय और समुदाय की ताकत से सकारात्मक बदलाव संभव है। स्थानीय निवासियों में अब विश्वास बढ़ रहा है कि ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी।

