*किरंदुल में INTUC स्थापना दिवस: आनंद मेला, सांस्कृतिक उत्सव और स्वादिष्ट व्यंजनों का संगम*
किरंदुल, 04 मई 2025: भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC) की स्थापना दिवस के अवसर पर किरंदुल में आयोजित भव्य आनंद मेला ने सामाजिक एकता, सांस्कृतिक वैभव और भारतीय व्यंजनों की विविधता का शानदार प्रदर्शन किया। यह आयोजन न केवल INTUC के गौरवशाली इतिहास का उत्सव था, बल्कि समुदायों को एकजुट करने और बच्चों की प्रतिभा को मंच प्रदान करने का भी एक अनूठा अवसर बना। बच्चों के रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम, सभी जाति-धर्म के लोगों द्वारा प्रस्तुत स्वादिष्ट व्यंजन और उत्साहपूर्ण माहौल ने इस मेले को किरंदुल के लिए एक यादगार पल बना दिया।
*INTUC का गौरवशाली इतिहास और स्थापना दिवस*
INTUC, जो भारत के मजदूर वर्ग के अधिकारों और कल्याण के लिए 1947 में स्थापित की गई थी, आज भी श्रमिकों की आवाज को बुलंद करने में अग्रणी भूमिका निभा रही है। इसकी स्थापना दिवस हर साल देशभर में विभिन्न आयोजनों के साथ मनाई जाती है, जिसमें श्रमिकों के योगदान को सम्मानित किया जाता है और सामाजिक एकता को बढ़ावा दिया जाता है। किरंदुल में इस वर्ष का आयोजन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा, क्योंकि यहाँ के INTUC इकाई ने स्थापना दिवस को एक सामुदायिक उत्सव के रूप में मनाने का निर्णय लिया। आनंद मेला का आयोजन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था, जिसमें न केवल श्रमिक समुदाय, बल्कि स्थानीय लोग, बच्चे और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि शामिल हुऐ
*आनंद मेला: सांस्कृतिक रंगों का उत्सव*
आनंद मेला का मुख्य आकर्षण रहा बच्चों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम। स्थानीय स्कूलों और समुदाय के बच्चों ने नृत्य, गीत के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया। पारंपरिक लोक नृत्यों जैसे आधुनिक नृत्य शैलियों तक, बच्चों ने अपनी प्रतिभा से दर्शकों का दिल जीत लिया। छोटी बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत आदिवासी लोक नृत्य ने विशेष रूप से सभी का ध्यान आकर्षित किया, जो स्थानीय संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन था।
इन कार्यक्रमों ने न केवल बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच प्रदान किया, बल्कि दर्शकों को भारत की सांस्कृतिक विविधता से जोड़ा। INTUC के स्थानीय नेता ए के सींग ने कहा, “यह मेला केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि हमारी युवा पीढ़ी को हमारी संस्कृति से जोड़ने और उन्हें सामाजिक एकता का महत्व समझाने का एक प्रयास है।”
*स्वादिष्ट व्यंजन: भारत के स्वाद का मेला*
आनंद मेला का एक अन्य प्रमुख आकर्षण था विभिन्न समुदायों द्वारा लगाए गए स्वादिष्ट व्यंजनों के स्टॉल। यहाँ उत्तर भारत के दही बड़ा और छत्तीसगढ़ की मड़िया पेज से लेकर दक्षिण भारत के डोसा, इडली और सांभर तक, पूर्वोत्तर भारत के मोमोज और पश्चिम भारत के कड़ी पकोड़ा और अरसा जैसे व्यंजनों की बहार थी। स्थानीय छत्तीसगढ़ी व्यंजन जैसे फरा, ठेठरी-खुरमी और मुंगेड़ी चोक्सेला और बंगला चटनी ने भी मेले में अपनी विशेष जगह बनाई।
सबसे खास बात यह थी कि इन स्टॉलों को विभिन्न जाति, धर्म और समुदायों के लोगों ने मिलकर लगाया था, जो सामाजिक सद्भाव और एकता का प्रतीक बना। मेले में आए एक आगंतुक, श्रीमती अनीता साहू ने कहा, “यहाँ एक ही जगह पर पूरे भारत के स्वाद का आनंद लेना अद्भुत अनुभव है। यह मेला हमें एक-दूसरे की संस्कृति और परंपराओं के करीब लाता है।”
*सामुदायिक एकता और INTUC की भूमिका*
आनंद मेला न केवल एक उत्सव था, बल्कि सामुदायिक एकता को बढ़ावा देने का एक मंच भी था। INTUC की किरंदुल इकाई ने इस आयोजन के माध्यम से विभिन्न समुदायों को एक साथ लाने का प्रयास किया। मेले में सभी धर्मों और जातियों के लोग एक साथ शामिल हुए, जिन्होंने न केवल व्यंजनों का आनंद लिया, बल्कि एक-दूसरे की संस्कृति को समझने और सम्मान करने का अवसर भी प्राप्त किया।
INTUC के क्षेत्रीय सचिव ए के सींग ने मेले के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “हमारा उद्देश्य केवल श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना ही नहीं, बल्कि समाज में एकता और भाईचारा स्थापित करना भी है। यह मेला इस दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम है।”
*मेले का प्रभाव और भविष्य की योजनाएँ*
आनंद मेला में सैकड़ो की सांख्य में लोग शामिल हुए, जिनमें बच्चे, युवा, महिलाएँ और बुजुर्ग सभी थे। आयोजकों के अनुसार, इस मेले ने न केवल स्थानीय समुदाय को एक मंच पर लाया, बल्कि किरंदुल को एक सांस्कृतिक और सामाजिक केंद्र के रूप में भी स्थापित किया। इसे सभी आयु वर्ग के लिए आकर्षक बनाया।
INTUC की किरंदुल इकाई ने भविष्य में इस तरह के आयोजनों को और बड़े स्तर पर आयोजित करने की योजना बनाई है। आयोजकों का कहना है कि अगले वर्ष मेले में और अधिक सांस्कृतिक गतिविधियाँ, हस्तशिल्प प्रदर्शनी और स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान किया जाएगा।


