*किरंदुल में एनएमडीसी की लीज भूमि पर धड़ल्ले से अतिक्रमण: अधिकारियों की चुप्पी, CISF की निष्क्रियता, और नगरपालिका पर ठीकरा फोड़ने की साजिशकिरंदुल,*

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*किरंदुल में एनएमडीसी की लीज भूमि पर धड़ल्ले से अतिक्रमण: अधिकारियों की चुप्पी, CISF की निष्क्रियता, और नगरपालिका पर ठीकरा फोड़ने की साजिशकिरंदुल,*

 

दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़): राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) की लीज वाली जमीन पर अतिक्रमण का खेल बेरोकटोक जारी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एनएमडीसी के अधिकारी इस गंभीर मामले में आंखें मूंदे बैठे हैं, जबकि अतिक्रमणकारी तिरपाल और टीन की चादरों के आड़ में पहले अस्थायी घेराव करते हैं और फिर चुपके-चुपके पक्के मकान और दुकानें बना लेते हैं। हैरानी की बात यह है कि जब निर्माण पूरा हो जाता है, तब एनएमडीसी के अधिकारी कथित तौर पर “कुंभकरण की नींद” से जागते हैं और जिम्मेदारी नगरपालिका पर डालकर पल्ला झाड़ लेते हैं।

 

*अतिक्रमण का तरीका: तिरपाल की आड़ में पक्का निर्माण*

 

किरंदुल में अतिक्रमण का एक सुनियोजित पैटर्न देखने को मिल रहा है। पहले सरकारी जमीन को तिरपाल या टीन की चादरों से घेर लिया जाता है। इसके बाद, रातों-रात सीमेंट और कंक्रीट से पक्का निर्माण कर लिया जाता है। जब घेराव हटता है, तो सामने पक्की दुकानें या मकान तैयार मिलते हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी एनएमडीसी के अधिकारियों को होती है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जाती। सवाल उठता है कि क्या एनएमडीसी के अधिकारी निजी लाभ या मोटी रकम लेकर अतिक्रमण को अनदेखा कर रहे हैं, या फिर किसी दबाव में कार्रवाई से बच रहे हैं?

 

*CISF की फौज, फिर भी नगरपालिका पर निर्भरता*

 

एनएमडीसी के पास केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की 1300 जवानों की मजबूत टुकड़ी है, जो किरंदुल और बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती है। इसके बावजूद, अतिक्रमण हटाने के लिए एनएमडीसी नगरपालिका या स्थानीय पुलिस पर निर्भर क्यों है? यदि एनएमडीसी चाहे, तो CISF के साथ मिलकर अवैध निर्माण को तुरंत रोका जा सकता है। फिर भी, अतिक्रमण के मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है: क्या एनएमडीसी की निष्क्रियता के पीछे कोई बड़ा खेल चल रहा है? क्या अधिकारियों और अतिक्रमणकारियों के बीच कोई साठ-गांठ है?

 

*नगरपालिका को दोष, लेकिन स्वयं की जिम्मेदारी से पलायन*

 

एनएमडीसी के अधिकारी अक्सर यह तर्क देते हैं कि अतिक्रमण हटाना नगरपालिका की जिम्मेदारी है। हाल ही में जुलाई 2024 में किरंदुल में भारी बारिश के बाद हुए बाढ़ के मामले में भी एनएमडीसी ने बंगाली कैंप क्षेत्र में नाले के अतिक्रमण को दोषी ठहराया था, लेकिन स्वयं की लापरवाही पर पर्दा डाल दिया। एक एनएमडीसी अधिकारी ने गुमनाम रहते हुए दावा किया कि नाले में अतिक्रमण और कचरा जमा होने से बाढ़ की स्थिति बनी, लेकिन यह सवाल अनुत्तरित रहा कि एनएमडीसी ने इस अतिक्रमण को रोकने के लिए पहले क्या कदम उठाए?

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