*किरंदुल में सड़क हादसों का बढ़ता खतरा: मालवाहक वाहनों में ठूंसे जा रहे मजदूर, प्रशासन मौन*
दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल क्षेत्र में गौरव पथ पर खड़े 10 चक्का वाहन और मालवाहक पिकअप में मजदूरों को गाय-बकरी की तरह ठूंसकर ढोने की खतरनाक प्रथा बड़े हादसों को न्योता दे रही है। सुबह और शाम के समय किरंदुल की सड़कों पर मजदूरों को असुरक्षित तरीके से ले जाने की घटनाएं आम हो गई हैं, जिसके चलते हाल के दिनों में दंतेवाड़ा जिले में दो बड़े हादसों में दो लोगों की जान जा चुकी है और 17 ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
हादसों की वजह: लापरवाही और नियमों की अनदेखी*
पिछले कुछ दिनों में दंतेवाड़ा जिले में हुए हादसों का मुख्य कारण मालवाहक पिकअप वाहनों में जरूरत से ज्यादा लोगों को भरना रहा है। इन वाहनों में 30 से 40 मजदूरों को एक साथ ठूंसकर ले जाया जाता है, जो सड़क सुरक्षा नियमों का खुला उल्लंघन है। किरंदुल में सुबह 8 बजे और शाम 5 बजे, जब मजदूर अपने काम पर आने-जाने के लिए इन वाहनों का सहारा लेते हैं, स्थिति और भी भयावह हो जाती है। इन पिकअप वाहनों के ड्राइवर तेज रफ्तार में गाड़ियां चलाते हैं, जिससे हादसों का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
मजदूरों की जान से खिलवाड़*
किरंदुल में मजदूरों को मालवाहक पिकअप में असुरक्षित तरीके से ढोने की प्रथा लंबे समय से चली आ रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इन वाहनों में न तो बैठने की उचित व्यवस्था होती है और न ही सुरक्षा के कोई इंतजाम। मजदूरों को जानवरों की तरह एक-दूसरे पर लादकर ले जाया जाता है। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “पिकअप में इतने लोग भरे होते हैं कि अगर गाड़ी थोड़ा सा भी असंतुलित हो जाए, तो बड़ा हादसा हो सकता है। ड्राइवर भी तेजी से गाड़ी चलाते हैं, जैसे उन्हें मजदूरों की जान की कोई परवाह ही न हो।”
*हाल के हादसों ने बढ़ाई चिंता*
दंतेवाड़ा जिले में हाल ही में हुए दो हादसों ने इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान खींचा है। पहली घटना में एक मालवाहक पिकअप में सवार 10 से ज्यादा ग्रामीण घायल हो गए, जबकि दूसरी घटना में दो लोगों की जान चली गई। दोनों ही मामलों में वाहनों में क्षमता से अधिक लोग सवार थे। घायलों में से कई की हालत गंभीर बनी हुई है, और स्थानीय अस्पतालों में उनका इलाज चल रहा है। इन हादसों ने न केवल ग्रामीणों के परिवारों को सदमे में डाल दिया है, बल्कि
प्रशासन की लापरवाही पर भी सवाल उठाए हैं।
*प्रशासन की चुप्पी, नियमों का अभाव*
इस गंभीर समस्या के बावजूद स्थानीय प्रशासन और पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। गौरव पथ पर खड़े 10 चक्का वाहन और तेज रफ्तार से चलने वाले मालवाहक पिकअप सड़क सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर सड़क सुरक्षा नियमों का पालन क्यों नहीं कराया जा रहा? मजदूरों की जान को जोखिम में डालने वाली इस प्रथा को रोकने के लिए प्रशासन कब तक चुप रहेगा?
*स्थानीय लोगों की मांग: कड़ी कार्रवाई और सुरक्षित परिवहन*
किरंदुल के स्थानीय निवासियों और मजदूरों ने प्रशासन से इस समस्या का तत्काल समाधान करने की मांग की है। उनका कहना है कि मजदूरों के लिए सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था की जाए और मालवाहक वाहनों में लोगों को ढोने की प्रथा पर पूर्ण रोक लगाई जाए। इसके साथ ही, तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग करने वाले ड्राइवरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी उठ रही है।
*आगे क्या?*
किरंदुल और दंतेवाड़ा जिले में सड़क हादसों का यह सिलसिला तब तक जारी रहेगा, जब तक प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से नहीं लेता। मजदूरों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। सुरक्षित परिवहन सुविधाओं के अभाव में मजदूरों की जान हर दिन खतरे में पड़ रही है। यह समय है कि प्रशासन और संबंधित विभाग जागें और इस खतरनाक प्रथा पर रोक लगाएं, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को अपनों को खोने का दर्द न सहना पड़े।
*निष्कर्ष*
किरंदुल में मालवाहक वाहनों में मजदूरों को असुरक्षित तरीके से ढोने की प्रथा न केवल सड़क सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि मानवता के खिलाफ भी एक अपराध है। दंतेवाड़ा जिले में हाल के हादसों ने इस समस्या की गंभीरता को उजागर किया है। अब समय आ गया है कि प्रशासन इस दिशा में ठोस कदम उठाए और मजदूरों के लिए सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था सुनिश्चित करे। क्या प्रशासन इन हादसों से सबक लेगा, या फिर मजदूरों की जान यू ही खतरे में पड़ती रहेगी? यह सवाल हर किसी के मन में है।

