*किरंदुल: पत्रकारिता की आड़ में लूट का खुला खेल, प्राइवेट कंपनियों पर धावा*

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*किरंदुल: पत्रकारिता की आड़ में लूट का खुला खेल, प्राइवेट कंपनियों पर धावा*

दंतेवाड़ा जिले का किरंदुल, जो कभी अपनी लौह अयस्क खदानों के लिए जाना जाता था, अब एक नए तरह के लूट के ठिकाने में तब्दील हो चुका है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, जिले से बाहर के कुछ कथित पत्रकारों ने किरंदुल की प्राइवेट कंपनियों को अपनी अवैध वसूली का निशाना बना लिया है। यह खुलासा न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि पत्रकारिता जैसे सम्मानित पेशे पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

 

*कंपनियों की गलतियों का दबाव, लाखों की उगाही*

 

 

सूत्रों ने बताया कि ये पत्रकार प्राइवेट कंपनियों की छोटी-मोटी गलतियों को तलाश कर उनका इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के हथियार के रूप में कर रहे हैं। कंपनी प्रबंधन को डराने और दबाव बनाने के लिए ये लोग कथित तौर पर खबरें छापने या न छापने की धमकी देते हैं। बदले में, हजारों-लाखों रुपये की उगाही का खेल बेरोकटोक चल रहा है। किरंदुल और बचेली, जो लौह अयस्क (ऐरोन ओर) के लिए मशहूर हैं, अब इन पत्रकारों के लिए ‘पैसों की खान’ बन गए हैं।

 

*लाल मिट्टी और बोल्डर के नाम पर वसूली*

 

 

खबरों के मुताबिक, यह लूट सिर्फ कंपनियों तक सीमित नहीं है। कुछ पत्रकार लाल मिट्टी और बोल्डर ढोने वाली गाड़ियों से भी अवैध वसूली में जुटे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन गतिविधियों से जनता की समस्याएं बढ़ रही हैं, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा पत्रकारिता की आड़ में चल रहा यह खुला खेल न केवल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि आम जनता की परेशानियों को भी नजरअंदाज कर रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इस लूट को रोकने वाला कौन है?

*पत्रकारिता पर दाग, विश्वास का संकट*

 

 

पत्रकारिता, जो समाज का चौथा स्तंभ मानी जाती है, उसकी आड़ में इस तरह की गैरकानूनी गतिविधियां न केवल इस पेशे की साख को ठेस पहुंचा रही हैं, बल्कि जनता के बीच विश्वास का संकट भी पैदा कर रही हैं। किरंदुल और आसपास के इलाकों में यह धंधा बेदस्तूर जारी है, और स्थानीय प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। क्या यह महज कुछ पत्रकारों की करतूत है, या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है? यह सवाल जांच का विषय है।

 

*जनता की पुकार, प्रशासन की खामोशी*

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अवैध वसूली से न केवल कंपनियों का नुकसान हो रहा है, बल्कि इसका असर क्षेत्र के विकास और रोजगार पर भी पड़ रहा है। लाल मिट्टी और बोल्डर के परिवहन से जुड़े छोटे-मोटे व्यवसायी भी इस वसूली के शिकार बन रहे हैं। जनता की परेशानियों को दरकिनार कर अपनी जेबें भरने का यह सिलसिला कब तक चलेगा? लोग प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

 

*खतरनाक खेल का अंत कब?*

 

 

किरंदुल में पत्रकारिता के नाम पर चल रही इस लूट ने क्षेत्र को एक खतरनाक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। अगर समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो यह न केवल किरंदुल की छवि को धूमिल करेगा, बल्कि पूरे दंतेवाड़ा जिले में अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देगा। जरूरत है एक निष्पक्ष जांच की, जो इस लूट के मास्टरमाइंड को बेनकाब करे और दोषियों को सजा दिलाए।

 

*नोट:* यह खबर सूत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। हमारी टीम इस मामले की गहराई से पड़ताल कर रही है और जल्द ही और तथ्य सामने लाएगी। प्रशासन और संबंधित पक्षों से इस पर तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है।

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