बारिश पर आ गई मौसम विभाग की रिपोर्ट, मानसून में इस साल खूब भिगोएंगे बादल, IMD की बड़ी भविष्यवाणी
भारत में चार महीने (जून से सितंबर) के मानसून के मौसम में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है और कुल वर्षा 87 सेंटीमीटर के दीर्घावधि औसत का 105 प्रतिशत रहने का अनुमान है.” उन्होंने कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य से कम मानसूनी बारिश से जुड़ी अल-नीनो स्थितियां इस बार विकसित होने की संभावना नहीं है.
अप्रैल से जून की अवधि में पड़ने वाली है भीषण गर्मी
देश के कई हिस्से पहले से ही भीषण गर्मी से जूझ रहे हैं और अप्रैल से जून की अवधि में बहुत ज्यादा गर्मी पड़ने का अनुमान है. इससे बिजली ग्रिड पर दबाव पड़ सकता है और पानी की कमी हो सकती है.
सामान्य बारिश का पूर्वानुमान देश के लिए एक बड़ी राहत
कुल खेती योग्य क्षेत्र का 52 फीसदी हिस्सा बारिश आधारित प्रणाली पर निर्भर है. यह देशभर में बिजली उत्पादन के अलावा पीने के पानी के लिए महत्वपूर्ण जलाशयों को फिर से भरने के लिए भी अहम है. इसलिए, मानसून के मौसम में सामान्य बारिश का पूर्वानुमान देश के लिए एक बड़ी राहत है. हालांकि, सामान्य वर्षा का यह मतलब नहीं है कि पूरे देश में हर जगह एक समान बारिश होगी. जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा आधारित प्रणाली की परिवर्तनशीलता और अधिक बढ़ जाती है.
जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि बारिश के दिनों की संख्या घट रही है, जबकि भारी बारिश की घटनाएं (थोड़े समय में अधिक बारिश) बढ़ रही हैं. इससे कुछ क्षेत्रों में बाढ़ और कुछ क्षेत्रों में सूखे की स्थिति पैदा होती है.

