*प्रकाश विद्यालय किरंदुल में किताबों की बिक्री: लूट का खुला खेल, जिला प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल*
किरंदुल, छत्तीसगढ़: प्रकाश विद्यालय किरंदुल में किताबों और स्कूली सामग्री की बिक्री को लेकर लूट का खुला खेल बदस्तूर जारी है। सीजी संविधान न्यूज़ द्वारा इस मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी अम्बेस्टा ने संज्ञान लेते हुए विद्यालय को परिसर में किताबें और अन्य सामग्री न बेचने की नोटिस जारी की थी। इसके बावजूद, विद्यालय प्रशासन पर कोई असर नहीं पड़ा है और स्कूल परिसर में ही मनमाने दामों पर किताबें, यूनिफॉर्म, मोजे और टाई की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने खबर के बाद दावा किया था कि कुंवाकोंडा ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजकर जांच टीम गठित कर दी गई है और जल्द ही कार्रवाई होगी। लेकिन पांच दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। विद्यालय परिसर में दुकानें सजी हैं, जहां अभिभावकों से मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्रवाई केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित है?
*नियमों की अनदेखी, अभिभावकों की मजबूरी*
जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार, किसी भी विद्यालय को अपने परिसर में किताबें, यूनिफॉर्म या अन्य सामग्री बेचने की अनुमति नहीं है। नियम यह कहता है कि विद्यालय को अपने नजदीकी बुक स्टोर को अधिकृत करना होगा, जहां निर्धारित दरों पर ये सामग्री उपलब्ध हो। लेकिन प्रकाश विद्यालय इन नियमों की खुलेआम अवहेलना कर रहा है। स्कूल की बिल्डिंग में ही दुकानें चल रही हैं, जहां किताबों और यूनिफॉर्म की कीमतें बाजार दर से कहीं अधिक हैं। अभिभावकों का कहना है कि उनके पास कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि विद्यालय ने बाहरी दुकानों पर अपनी किताबों की बिक्री पर पहले ही रोक लगा रखी है।
*बच्चों की पढ़ाई पर मंडराता खतरा*
प्रकाश विद्यालय की इस मनमानी ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यदि विद्यालय परिसर में किताबों की बिक्री पर रोक लगती है, तो बच्चे अपनी कक्षा की किताबें कहां से लाएंगे? बाहरी दुकानों में विद्यालय की किताबें उपलब्ध नहीं हैं, और स्कूल ने जानबूझकर ऐसी व्यवस्था बनाई है कि अभिभावक मजबूरी में परिसर की दुकानों से ही खरीदारी करें। यह स्थिति न केवल अभिभावकों के लिए आर्थिक बोझ है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई पर भी असर डाल सकती है।
*जिला प्रशासन की गंभीरता पर सवाल*
जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच का आश्वासन तो दिया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई। क्या यह मामला भी केवल नोटिस और जांच तक सीमित रह जाएगा? जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेगा, यह देखना बाकी है। अभिभावकों का आरोप है कि विद्यालय प्रशासन की मनमानी और शिक्षा विभाग की निष्क्रियता के कारण वे लंबे समय से शोषण का शिकार हो रहे हैं।
*क्या है आगे का रास्ता?*
जांच की पारदर्शिता: जिला प्रशासन को जांच प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाना होगा। जांच टीम की रिपोर्ट कब तक आएगी, और उसका क्या परिणाम होगा?
*नियमों का पालन*
विद्यालय को नियमों का पालन करने के लिए बाध्य करना होगा। बाहरी बुक स्टोर्स को अधिकृत कर किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
*अभिभावकों को राहत*
मनमाने दामों पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि अभिभावकों को आर्थिक शोषण से बचाया जा सके।
*बच्चों की पढ़ाई*
बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए, जैसे कि बाहरी दुकानों में किताबें उपलब्ध कराना।
प्रकाश विद्यालय किरंदुल का यह मामला केवल एक स्कूल की कहानी नहीं, बल्कि निजी विद्यालयों की मनमानी और प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक है। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के सामने अब यह चुनौती है कि वे इस लूट के खेल को रोकें और अभिभावकों-छात्रों को राहत दें। क्या प्रशासन इस मामले में निर्णायक कदम उठाएगा, या यह खबर भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चली जाएगी? यह सवाल हर उस अभिभावक और छात्र के मन में है, जो इस व्यवस्था का शिकार हो रहा है।

