*किरंदुल में सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मी देवी की दादागिरी: मलबा हटाने पर धमकी, वार्डवासियों का सड़क जाम*

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

*किरंदुल में सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मी देवी की दादागिरी: मलबा हटाने पर धमकी, वार्डवासियों का सड़क जाम*

किरंदुल, 4 अक्टूबर 2025: छत्तीसगढ़ के किरंदुल नगर पालिका के वार्ड नंबर 1 में सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जानी जाने वाली लक्ष्मी देवी की दादागिरी ने स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। बारिश में ढही उनके घर की दीवार का मलबा महीनों से सड़क पर पड़ा है, जिससे नाली जाम हो गई और गंदे पानी का तालाब बन गया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि लक्ष्मी देवी न केवल खुद मलबा हटाने से इनकार कर रही हैं, बल्कि नगर पालिका के सफाई कर्मियों को भी धमकाकर रोक रही हैं। आज गुस्साए वार्डवासियों ने सड़क जाम कर इस दादागिरी के खिलाफ आवाज बुलंद की, जिससे क्षेत्र में तनाव का माहौल है।

घटना की शुरुआत करीब एक महीने पहले हुई, जब भारी बारिश में लक्ष्मी देवी के घर की पुरानी दीवार ढह गई। मलबा सड़क पर बिखर गया, जिसने न केवल राहगीरों की आवाजाही को मुश्किल कर दिया, बल्कि नाली को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया। नतीजतन, कॉलोनी का गंदा पानी सड़क पर जमा होकर एक फुट गहरा गड्ढा-सा तालाब बन गया है। स्थानीय निवासी रमेश साहू कहते हैं, “यह गंदा पानी पार करना बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरे से कम नहीं। मच्छर और बीमारियों का डर अलग से सता रहा है।”

लक्ष्मी देवी, जो पेशे से ठेकेदार हैं और जिनके पास खुद का ट्रैक्टर है, इस मलबे को हटाने में पूरी तरह उदासीन हैं। इतना ही नहीं, जब नगर पालिका के सफाई कर्मी मलबा हटाने पहुंचे, तो लक्ष्मी देवी ने उन्हें धमकी दी कि “अगर मलबा हटाने से मेरा घर गिरा, तो नगर पालिका जवाबदार होगी और मेरा घर बनाकर देगी।” इस दादागिरी के चलते सफाई कर्मी बैकफुट पर हैं, और मलबा अब भी सड़क पर पड़ा हुआ है। वार्डवासी सविता बाई गुस्से में कहती हैं, “सामाजिक कार्यकर्ता कहलाने वाली लक्ष्मी देवी को समाज की नहीं, सिर्फ अपनी परवाह है। अगर उनके पास ट्रैक्टर है, तो मलबा हटाने में क्या दिक्कत है?”

वार्डवासियों ने इस मुद्दे को कई बार स्थानीय पार्षद के सामने उठाया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। “हमने पार्षद को लिखित शिकायत दी, मीटिंग में बात की, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है,” एक निवासी ने बताया। आज सुबह, तंग आकर सैकड़ों लोग सड़क पर उतर आए और रोड जाम कर दिया।

*विश्लेषण: सामाजिक कार्यकर्ता या दादागिरी का चेहरा?*

लक्ष्मी देवी का यह रवैया न केवल उनकी सामाजिक कार्यकर्ता की छवि पर सवाल उठाता है, बल्कि स्थानीय प्रशासन की नाकामी को भी उजागर करता है। एक ओर, लक्ष्मी देवी अपनी ठेकेदारी और संसाधनों का दम दिखाते हुए नगर पालिका पर जिम्मेदारी थोप रही हैं, तो दूसरी ओर, पालिका कर्मियों को धमकाकर मलबा हटाने से रोक रही हैं। यह दोहरा चरित्र सामाजिक नेतृत्व की विश्वसनीयता को कठघरे में खड़ा करता है। सामाजिक कार्यकर्ता का मतलब समाज की भलाई के लिए काम करना है, न कि अपनी जिम्मेदारियों से भागना और दूसरों को डराना।

नगर पालिका की निष्क्रियता भी कम जिम्मेदार नहीं। नगर निगम अधिनियम के अनुसार, निजी संपत्ति से उत्पन्न मलबा मालिक की जिम्मेदारी है, लेकिन सार्वजनिक स्थान की सफाई सुनिश्चित करना पालिका का कर्तव्य है। अगर लक्ष्मी देवी नियम तोड़ रही हैं, तो पालिका को नोटिस जारी कर कार्रवाई करनी चाहिए थी। इसकी बजाय, पालिका और पार्षद की चुप्पी ने वार्डवासियों के गुस्से को और भड़काया है। जाम नालियों से फैलने वाली बीमारियां, जैसे डेंगू और मलेरिया, पहले ही क्षेत्र में खतरा बने हुए हैं। ऐसे में लक्ष्मी देवी की दादागिरी और पालिका की ढिलाई मिलकर एक गंभीर जनस्वास्थ्य संकट को जन्म दे रही है।

*आगे की राह:*

आज के सड़क जाम के बाद नगर पालिका सफाई के लिऐ गयी तो लक्ष्मी देवी का रौद्र रूप सनमे आया लक्ष्मी देवी चिलाते हुऐ बोली मलबा हटाने से मेरा घर गिरा तो जिम्मेदारी नगरपालिका की है, लेकिन वार्डवासी अब लिखित आश्वासन की मांग कर रहे हैं। लक्ष्मी देवी से संपर्क करने की कोशिश नाकाम रही, क्योंकि वे इस मुद्दे पर बोलने से बच रही हैं। यदि यह स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो मामला जिला प्रशासन तक पहुंच सकता है। किरंदुल जैसे छोटे शहर में ऐसी घटनाएं न केवल सामाजिक विश्वास को तोड़ती हैं, बल्कि विकास की गति को भी बाधित करती हैं।

लक्ष्मी देवी को चाहिए कि वे अपनी जिम्मेदारी समझें और मलबा हटाने में सहयोग करें। साथ ही, नगर पालिका को चाहिए कि वह सख्ती से नियम लागू करे, ताकि भविष्य में ऐसी दादागिरी को रोका जा सके। यह घटना एक सबक है कि सामाजिक कार्यकर्ता का तमगा केवल नाम का नहीं, बल्कि कर्मों से सिद्ध होना चाहिए।

Leave a Comment

और पढ़ें

Buzz4 Ai

Read More Articles