*दंतेवाड़ा में मूसलाधार बारिश बनी आफत: बाढ़,किरंदुल मांसाहारी बाजार डूबे व बस स्टैंड पुरानी रिटर्निंग वाल ढहीं, लाखों का नुकसान*
दंतेवाड़ा, 26 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में आज तड़के सुबह 4 बजे से हो रही भारी बारिश ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। नदियां और नाले उफान पर हैं, सड़कें जलमग्न हो गई हैं, और किरंदुल के मांसाहारी बाजार में बाढ़ का पानी घुसने से व्यापारियों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। इसके अलावा, पुरानी बस स्टैंड की बाउंड्री वॉल ढह गई है, जो बड़े खतरे की घंटी बजा रही है। हालांकि, इन घटनाओं में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन प्रशासन की लापरवाही और अवैध निर्माणों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण शंखनी नदी का जल स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। दंतेवाड़ा के पुराने पुल से करीब 2 फीट ऊपर पानी बह रहा है, जिससे यातायात ठप हो गया है। दंतेवाड़ा से जगदलपुर जाने वाले मुख्य राजमार्ग पर बस्तानार इलाके में हाईवे पर पानी जमा हो गया है, जिससे वाहनों की आवाजाही रुक गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह बारिश अब ‘आफत की बारिश’ बन चुकी है, जो हर साल मानसून में जिले की कमजोर बुनियादी ढांचे की पोल खोल देती है।
*किरंदुल बाजार में पांचवीं बार बाढ़, अवैध निर्माण जिम्मेदार*
किरंदुल के मांसाहारी बाजार में स्थिति सबसे विकट है। इस साल यह पांचवीं बार है जब नाले का पानी बाजार में 3 फीट तक भर गया, जिससे दुकानों में रखा सामान बर्बाद हो गया। व्यापारियों का अनुमान है कि हर बार की तरह इस बार भी लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। मुख्य वजह नगर पालिका द्वारा बनाई गई नाली पर इकबाल सिंह द्वारा अवैध रूप से तबेला (पशुशाला) का निर्माण है। इस निर्माण के कारण नाली की सफाई नहीं हो पाती, और बारिश के पानी का बहाव रुक जाता है। नतीजतन, नाला ओवरफ्लो होकर 10-15 घरों और बाजार में घुस जाता है।
स्थानीय व्यापारी संघ के एक सदस्य ने बताया, “इस वर्ष से पहले महीने भर तेज बारिश होने से भी कभी मंशाहारी मार्किट नहीं डूबा था पर इस वर्ष 1 घंटे की बारिश मे पूरा मंशाहारी मार्किट और आसपास के लगभग 15 घर नाली के पानी मे डूब जा रहे है। नगर पालिका नाली साफ नहीं कर पाती क्योंकि तबेला ऊपर बना है। हमने कई बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अगर यह अवैध निर्माण हटाया जाए, तो समस्या का 80% समाधान हो सकता है।” विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला शहरी नियोजन की विफलता को दर्शाता है, जहां छोटे अवैध निर्माण बड़े पैमाने पर नुकसान का कारण बनते हैं। अगर समय रहते कार्रवाई न हुई, तो आने वाले दिनों में और बड़े हादसे हो सकते हैं।
*पुरानी बस स्टैंड और रिटेनिंग वॉल ढही, बड़ा खतरा मंडराया*
बारिश की वजह से किरंदुल में दो बड़ी घटनाएं हुईं। सबसे पहले, वर्षों पुरानी बस स्टैंड बिल्डिंग की पीछे की बाउंड्री वॉल गिर गई। इस बिल्डिंग को पहले ही जर्जर घोषित किया जा चुका है, लेकिन कोई मरम्मत या ध्वस्तीकरण नहीं हुआ। अब पूरी इमारत कभी भी ढह सकती है, जो व्यस्त इलाके में स्थित होने से राहगीरों और यात्रियों के लिए बड़ा खतरा है। दूसरी घटना वार्ड नंबर 1 में हुई, जहां नगर पालिका की रिटेनिंग वॉल गिर गई। गनीमत रही कि दोनों घटनाओं में कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन ये हादसे प्रशासन की उदासीनता को उजागर करते हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि दंतेवाड़ा जैसे आदिवासी बहुल जिलों में बुनियादी ढांचे की अनदेखी एक पुरानी समस्या है। जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती बारिश की तीव्रता को देखते हुए, पुरानी इमारतों की नियमित जांच और मजबूतीकरण जरूरी है। अगर बस स्टैंड जैसी जर्जर संरचनाओं को नजरअंदाज किया गया, तो यह बड़े हादसे को न्योता दे सकता है। स्थानीय प्रशासन को तत्काल अवैध निर्माण हटाने, नालियों की सफाई और जर्जर भवनों की मरम्मत पर ध्यान देना चाहिए।
नगरपालिका प्रशासन से संपर्क करने पर बताया की जल्दी ही जर्ज़र भवन को दिसमेंटेल किया जाएगा म लेकिन सूत्रों का कहना है कि राहत टीमों को तैनात किया गया है। बारिश थमने तक लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए पूर्व तैयारी और सख्त प्रशासनिक कदम कितने महत्वपूर्ण हैं।
