विवादास्पद पुनर्नियुक्ति: बलात्कार के मामले में विचाराधीन शिक्षक को DAV स्कूल ने फिर से नियुक्त किया, CBSE और छत्तीसगढ़ नियमों पर उठे सवाल
किरंदुल, दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़), 26 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित DAV पब्लिक स्कूल किरंदुल में एक शिक्षक की पुनर्नियुक्ति ने शिक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और बाल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षक राकेश कुमार पर धारा 376(2)(न) के तहत बलात्कार का आरोप है, जो जिला सत्र न्यायालय में विचाराधीन है। गिरफ्तारी और जेल में 24 घंटे से अधिक समय बिताने के बाद जमानत पर रिहा होने के बावजूद, स्कूल ने उन्हें दोबारा नियुक्त किया है। इस मामले ने CBSE संबद्धता नियमों, छत्तीसगढ़ शिक्षा बोर्ड के दिशानिर्देशों और POCSO एक्ट की अनुपालना पर बहस छेड़ दी है। साथ ही, जिला शिक्षा अधिकारी से सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी को स्कूल द्वारा अस्वीकार करने से पारदर्शिता की कमी उजागर हुई है।
मामला क्या है?
DAV पब्लिक स्कूल किरंदुल के शिक्षक राकेश कुमार पर एक सहकर्मी शिक्षिका से संबंधित बलात्कार के आरोप लगे थे। FIR दर्ज होने के बाद रमेश कुमार अपने गृहग्राम केरल फरार हो गया था अवेदिका की शिकायत के बाद किरंदुल पुलिस द्वारा उन्हें केरल से गिरफ्तार किया गया और जेल भेजा गया। हालांकि, जमानत मिलने के बाद स्कूल ने उन्हें पुनः नियुक्त कर लिया। स्थानीय अभिभावकों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह नियुक्ति बाल सुरक्षा के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है। एक अभिभावक ने बताया, “स्कूल में ऐसे व्यक्ति की मौजूदगी बच्चों के लिए खतरा है। प्रबंधन ने नियमों को ताक पर रख दिया।”
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से RTI के माध्यम से इस नियुक्ति के आधार और नियमों की जानकारी मांगी गई थी। लेकिन DAV स्कूल ने जवाब दिया कि वे RTI के दायरे में नहीं आते और कोई जानकारी नहीं दे सकते। इस जवाब ने स्कूल की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि CBSE संबद्ध स्कूलों को नियामक निकायों के माध्यम से जानकारी साझा करने की अपेक्षा की जाती है जो जिला शिक्षा अधिकारी की कमजोरी को दर्शाता है।
छत्तीसगढ़ शिक्षा बोर्ड के नियम: सरकारी vs निजी स्कूल
छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षिक एवं प्रशासनिक संवर्ग) भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2019 मुख्य रूप से सरकारी स्कूलों पर लागू होते हैं। इनमें आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों की स्पष्ट अयोग्यता नहीं बताई गई है, लेकिन राज्य सरकार के भर्ती विज्ञापनों (जैसे SCERT द्वारा जारी) में शर्त है कि उम्मीदवार के खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं होना चाहिए। साथ ही, ईमानदारी का प्रमाण-पत्र अनिवार्य है। यदि मामला शुरू होता है, तो उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है।
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के निर्णयों के अनुसार, राज्य सरकार निजी स्कूलों की न्यूनतम योग्यता और सेवा शर्तों को विनियमित कर सकती है। व्यावहारिक रूप से, POCSO नियम, 2020 के तहत सभी स्कूलों को शिक्षकों का पुलिस सत्यापन और बैकग्राउंड चेक अनिवार्य है। नैतिक अधमता (moral turpitude) वाले मामलों में पुनर्नियुक्ति जोखिमपूर्ण है¡
DAV जैसे निजी स्कूल मुख्य रूप से CBSE से संबद्ध हैं, इसलिए राज्य नियम सीधे लागू नहीं होते, लेकिन बाल सुरक्षा से जुड़े राष्ट्रीय दिशानिर्देशों का पालन जरूरी है।
CBSE संबद्धता नियम: बैकग्राउंड चेक अनिवार्य,
CBSE संबद्धता उपनियम (Affiliation Bye-Laws, 2018) में शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता (NCTE मानदंड) और सेवा नियमों का उल्लेख है, स्कूलों को सभी कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन और बैकग्राउंड चेक अनिवार्य है, खासकर बच्चों के संपर्क में आने वालों का। शिक्षा मंत्रालय की स्कूल सुरक्षा दिशानिर्देश (2021) में जोर दिया गया है कि शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की आवधिक पुलिस जांच होनी चाहिए। नैतिक अधमता या बच्चे से संबंधित अपराधों में शामिल व्यक्ति की नियुक्ति नहीं होना चाहिए
CBSE संबद्ध स्कूलों में कर्मचारियों के लिए आचार संहिता है, जिसमें नैतिक अधमता वाले आचरण को प्रतिबंधित किया गया है। DAV स्कूल, जो CBSE से संबद्ध हैं, अपनी आचार संहिता में गिरफ्तारी, दोषसिद्धि या आपराधिक कार्यवाही की जानकारी देना अनिवार्य करते हैं, और दोषसिद्धि को उल्लंघन माना जाता है। लेकिन लंबित मामलों पर स्पष्ट नीति की कमी से विवाद पैदा होता है।
POCSO एक्ट और बाल सुरक्षा: सबसे बड़ा उल्लंघन?
POCSO नियम, 2020 के तहत स्कूलों को बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्टाफ का बैकग्राउंड चेक अनिवार्य है। धारा 376 जैसे यौन अपराधों में लंबित मामलों वाले व्यक्ति को बच्चों के संपर्क में नहीं रखा जाना चाहिए। कई राज्यों में POCSO मामलों में आरोपी शिक्षकों को पुनर्नियुक्त नहीं करने के निर्देश हैं, जैसे आंध्र प्रदेश में। छत्तीसगढ़ में भी यह लागू होना चाहिए, लेकिन DAV स्कूल का फैसला इसकी अनदेखी दर्शाता है।
*RTI का मुद्दा: निजी स्कूलों की जवाबदेही कहां?*
DAV स्कूल का RTI अस्वीकार करना सामान्य है, क्योंकि निजी स्कूल RTI के दायरे में नहीं आते, खासकर यदि वे सरकारी सहायता नहीं लेते। लेकिन CBSE संबद्ध स्कूलों के लिए जानकारी DEO या CBSE के माध्यम से मांगी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के अनुसार, निजी संस्थाएं जो सार्वजनिक कार्य करती हैं, RTI के अंतर्गत आ सकती हैं यदि वे शिक्षा जैसे क्षेत्र में हैं। DEO को स्कूल से जानकारी मांगनी चाहिए थी, लेकिन अस्वीकार ने सिस्टम की कमजोरी उजागर की।
*स्कूल किस नियम से चल रहा है?*
DAV पब्लिक स्कूल मुख्य रूप से CBSE Affiliation Bye-Laws, 2018 के तहत चलता है, जो केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा विनियमित है।2c959d राज्य स्तर पर छत्तीसगढ़ नॉन-गवर्नमेंट स्कूल फीस रेगुलेशन एक्ट, 2020 जैसे कानून फीस को नियंत्रित करते हैं, लेकिन स्टाफ नियुक्ति पर सीधा प्रभाव नहीं।3c1631 POCSO और NCTE दिशानिर्देश बाल सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। लेकिन इस मामले में प्रबंधन की स्वायत्तता का दुरुपयोग लगता है, जो TMA Pai फाउंडेशन मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत है, जहां कहा गया कि स्वायत्तता के नाम पर लाभ कमाना या सुरक्षा की अनदेखी नहीं की जा सकती।
*आगे क्या?*
यह मामला छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों की जवाबदेही पर बहस पैदा कर रहा है। कार्यकर्ता CBSE और राज्य सरकार से जांच की मांग कर रहे है बाल अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में स्कूल की संबद्धता रद्द की जा सकती है। इस घटना से साफ है कि नियमों में स्पष्टता की जरूरत है, ताकि बच्चे सुरक्षित रहें और शिक्षा प्रणाली पारदर्शी बने।
