*रेडक्रॉस समिति में केवल शासकीय कर्मचारियों का वर्चस्व?*  *समाजसेवियों की उपेक्षा पर गंभीर सवाल… सेवा की आत्मा को क्यों नजरअंदाज़ किया गया?*

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*रेडक्रॉस समिति में केवल शासकीय कर्मचारियों का वर्चस्व?*
*समाजसेवियों की उपेक्षा पर गंभीर सवाल… सेवा की आत्मा को क्यों नजरअंदाज़ किया गया?*

दिनांक 01/04/2025 को *भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, सुकमा* की जिला प्रबंध समिति (2024-27) के गठन हेतु बैठक आयोजित हुई।
लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण यह रहा कि इस *महत्वपूर्ण बैठक की सूचना न तो जिले की प्रमुख सामाजिक संस्थाओं को दी गई,* और न ही *उन समर्पित समाजसेवियों को*, जो वर्षों से मानवता की सेवा में सक्रिय हैं।

*कुछ ऐसे लोग भी बाहर रह गए, जिन्होंने न केवल आजीवन सदस्यता ली है, बल्कि रक्तदान, आपदा सेवा, कोविड राहत, ग्रामीण स्वास्थ्य शिविरों जैसे कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाई है।*

*गठित समिति में अधिकांश स्थान केवल शासकीय अधिकारियों को दिया गया* — जबकि *रेडक्रॉस एक स्वतंत्र, मानवीय और गैर-राजनीतिक संस्था है*, जिसका मूलभूत सिद्धांत है: *समाज की भागीदारी और सेवा के क्षेत्र में सक्रिय लोगों को नेतृत्व में स्थान देना।*

1 *हम समाजसेवियों की ओर से यह मांग करते हैं:*
रेडक्रॉस समिति में *गैर-शासकीय समाजसेवियों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, रक्तवीरों और प्रेरणास्रोत युवाओं को भी स्थान दिया जाए।*

2 समिति गठन की प्रक्रिया *पारदर्शी होनी चाहिए* और इसकी बैठक की सूचना *पूर्व में सार्वजनिक रूप से* दी जानी चाहिए, ताकि सभी पात्र सदस्य भाग ले सकें।

3 समिति का गठन *केवल पद के आधार पर नहीं, सेवा के अनुभव और जमीनी कार्य की प्रतिबद्धता* के आधार पर किया जाए।

4  समिति में *महिलाओं, जनजातीय प्रतिनिधियों, थैलेसीमिया/ब्लड कैंप सेवियों और आपदा राहत कार्य में लगे समाजसेवियों को भी* उचित प्रतिनिधित्व मिले।

रेडक्रॉस कोई *सरकारी विभाग नहीं*, बल्कि *मानवता का मंच* है। इसकी ताकत *सरल, संवेदनशील और सेवा में लगे* लोगों से आती है — न कि केवल अधिकारियों से।

सेवा का नेतृत्व उन्हीं के हाथों में होना चाहिए जो *सड़क से लेकर शिविर तक* काम करते हैं, जो पीड़ित के साथ खड़े रहते हैं, और जिनका उद्देश्य *नाम नहीं, काम होता है।*

*समाजसेवियों की आवाज़ को दबाया नहीं जाना चाहिए, बल्कि उन्हें जोड़ा जाना चाहिए — यही रेडक्रॉस की आत्मा और संविधान दोनों की भावना है।*

*यह सिर्फ सवाल नहीं, यह एक आवाज़ है — सेवा को सम्मान और हिस्सेदारी दिलाने की।*

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— *सुकमा जिले के जागरूक समाजसेवीगण*

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*सी जी संविधान न्यूज़ छत्तीसगढ़*

*जिला संवाददाता सुकमा*

*जनजागरूकता | रक्तदान | सरोकार | प्रेरणादायक पहलें*

*संपर्क करें:*
*जसराज जैन ‘रक्तमित्र’*
संस्थापक – *शबरी जन सेवा ट्रस्ट*
*सुकमा, छत्तीसगढ़ 8889638101* 

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