*किरंदुल में बस संचालकों की लापरवाही से फैल रही गंदगी, नगरपालिका की चुप्पी पर सवाल*
किरंदुल, 17 अप्रैल 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले का किरंदुल नगर, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और खनन क्षेत्र के लिए जाना जाता है, आजकल बस संचालकों की लापरवाही का शिकार हो रहा है। रायपुर से किरंदुल और बैलाडीला के बीच रात्रिकालीन बसों के संचालन से नगर में गंदगी का अंबार लग रहा है। इन बसों से निकलने वाला कचरा, प्लास्टिक की बोतलें और सफाई के दौरान फेंका गया मलबा न केवल नगर की सुंदरता को नष्ट कर रहा है, बल्कि पर्यावरण और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि इस बढ़ती समस्या के प्रति किरंदुल नगरपालिका परिषद पूरी तरह मौन साधे हुए है।
*बसों से फैल रहा कचरे का पहाड़*
रायपुर से किरंदुल तक रात का लंबा सफर तय करने वाली बसें सुबह किरंदुल पहुंचती हैं। कुछ बसें शाम तक, तो कुछ रात 10 बजे तक नगर में रुकती हैं। इस दौरान बसों में यात्रियों द्वारा उपयोग की गई प्लास्टिक की पानी की बोतलें, खाद्य पदार्थों के रैपर और अन्य कचरा बिना किसी रोक-टोक के खुले में फेंक दिया जाता है। एक अनुमान के मुताबिक, प्रत्येक बस से औसतन 10 से 20 प्लास्टिक बोतलें और अन्य कचरा रोजाना खुले में फेंका जा रहा है। किरंदुल में प्रतिदिन सुबह 3:30 बजे से रात 10:20 बजे तक छोटी-बड़ी कुल 76 बसों का आना-जाना होता है। इस हिसाब से हर दिन सैकड़ों प्लास्टिक बोतलें और कचरा नगर की सड़कों, गलियों और खुले स्थानों पर बिखर रहा है।
*सड़कों पर कीचड़, गंदा पानी और बदबू का आलम*
बस संचालकों की लापरवाही यहीं खत्म नहीं होती। गौरव पथ के किनारे खड़ी इन बसों की धुलाई और सफाई का काम भी बिना किसी नियम-कायदे के किया जा रहा है। बसों की धुलाई के दौरान निकलने वाला गंदा पानी सड़कों पर बहता है, जो कीचड़ और गंदगी का कारण बन रहा है। सफाई के नाम पर बसों से निकलने वाली धूल-मिट्टी, खाद्य अवशेष और अन्य कचरा भी सड़कों पर ही फेंक दिया जाता है। यह गंदा पानी और कचरा न केवल सड़कों को गंदा कर रहा है, बल्कि आसपास के इलाकों में बदबू और मच्छरों की समस्या को भी बढ़ा रहा है।
स्थानीय निवासी रमेश साहू ने गुस्से में कहा, “बस वाले सुबह आते हैं, अपनी बसें धोते हैं, कचरा फेंकते हैं और शाम को चले जाते हैं। उन्हें किरंदुल की साफ-सफाई से कोई मतलब नहीं। गौरव पथ, जो नगर का मुख्य मार्ग है, अब कीचड़ और कचरे का ढेर बनता जा रहा है।”
*नगरपालिका की चुप्पी, जनता में आक्रोश*
इस गंभीर समस्या के बावजूद किरंदुल नगरपालिका परिषद की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। न तो बस संचालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई की जा रही है और न ही सड़कों पर फैल रही गंदगी को रोकने के लिए कोई प्रभावी योजना लागू की गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगरपालिका इस समस्या की अनदेखी कर रही है।
एक अन्य निवासी, शांति देवी ने कहा, “नगरपालिका को पता है कि बसों से कितनी गंदगी फैल रही है, लेकिन वे चुप्पी साधे हुए हैं। क्या उन्हें हमारी सेहत और पर्यावरण की चिंता नहीं? अगर यही हाल रहा तो किरंदुल का स्वच्छ और सुंदर स्वरूप पूरी तरह खत्म हो जाएगा।”
बस संचालकों की मनमानी, नियमों की अनदेखी*
बस संचालकों की यह लापरवाही न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि स्वच्छ भारत अभियान और प्लास्टिक मुक्त भारत जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों की भी धज्जियां उड़ा रही है। बसों में कचरा प्रबंधन के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। न तो बसों में डस्टबिन उपलब्ध हैं और न ही चालक-परिचालक यात्रियों को कचरा इकट्ठा करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। बसों की धुलाई के लिए भी कोई निर्धारित स्थान नहीं है, जिसके कारण गौरव पथ जैसे प्रमुख मार्गों पर गंदगी फैल रही है।
*क्या है समाधान?*
स्थानीय पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता अनिल कुमार ने सुझाव दिया कि इस समस्या से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा, “सबसे पहले बस संचालकों को सख्त निर्देश दिए जाएं कि वे कचरा प्रबंधन के नियमों का पालन करें। बसों में डस्टबिन अनिवार्य किए जाएं और धुलाई के लिए निर्धारित स्थान तय किया जाए। साथ ही, नगरपालिका को नियमित रूप से बस स्टैंड और गौरव पथ की सफाई सुनिश्चित करनी चाहिए। बस संचालकों पर जुर्माना लगाने जैसे कठोर कदम भी उठाए जा सकते हैं।”
*जनता की मांग, कार्रवाई हो अब*
किरंदुल की जनता अब इस गंदगी से तंग आ चुकी है और मांग कर रही है कि नगरपालिका और प्रशासन इस दिशा में तुरंत कार्रवाई करे। बस संचालकों की मनमानी पर लगाम लगाने और नगर को स्वच्छ बनाने के लिए एक ठोस कार्ययोजना की जरूरत है। अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, तो किरंदुल की पहचान एक स्वच्छ और सुंदर नगर के बजाय गंदगी के ढेर के रूप में हो जाएगी




