*बचेली में ₹25 लाख का मुक्तिधाम बना सरकारी लापरवाही की मिसाल!* *कभी था खूबसूरत परिसर, आज बदहाली और कब्जे के विवाद में गुम हुई अंतिम संस्कार की व्यवस्था*

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*बचेली में ₹25 लाख का मुक्तिधाम बना सरकारी लापरवाही की मिसाल!*

*कभी था खूबसूरत परिसर, आज बदहाली और कब्जे के विवाद में गुम हुई अंतिम संस्कार की व्यवस्था*

दंतेवाड़ा जिले के बचेली में मुक्तिधाम को लेकर उठे कब्जे के विवाद के बीच सामने आई पुरानी और वर्तमान तस्वीरें नगरपालिका परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। दावा किया जा रहा है कि फरवरी 2014 में लगभग 25 लाख रुपये की लागत से निर्मित मुक्तिधाम कभी सुविधाओं से युक्त एक सुंदर परिसर था, लेकिन आज उसकी स्थिति ऐसी बताई जा रही है कि पुरानी तस्वीरों और मौजूदा हालात के बीच पहचान करना भी मुश्किल हो गया है।

सी जी संविधान न्यूज़ छत्तीसगढ़ तक सूत्रों के माध्यम से पहुंची तस्वीरें इस पूरे मामले को नए सिरे से चर्चा में ला रही हैं। तस्वीरों में दिखाई देने वाली पुरानी व्यवस्था और वर्तमान स्थिति के बीच कथित अंतर ने जनता के पैसे के इस्तेमाल, निर्माण की उपयोगिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

₹25 लाख खर्च हुए, लेकिन जनता को क्या मिला?

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2014 में बचेली नगरपालिका परिषद द्वारा लगभग 25 लाख रुपये की लागत से मुक्तिधाम का निर्माण कराया गया था। परिसर में बाउंड्रीवॉल, अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों के बैठने और विश्राम के लिए शेड, बगीचे जैसी व्यवस्था तथा पानी की सुविधा के लिए पंप लगाया गया था।

जिस उद्देश्य से इस परिसर का निर्माण किया गया था, वह बेहद संवेदनशील और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण था। किसी परिवार में मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार के लिए सम्मानजनक और व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराना स्थानीय निकाय की बुनियादी जिम्मेदारियों में शामिल है।

लेकिन सवाल यह है कि लाखों रुपये खर्च करके तैयार की गई यह व्यवस्था आखिर उपयोग में क्यों नहीं आ सकी? यदि निर्माण के बाद ही यह स्थान अनुपयोगी हो गया, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी थी? और यदि बाद में परिस्थितियां बदलीं, तो इसका वैकल्पिक समाधान क्यों नहीं निकाला गया?

टेलिंग डैम हादसे के बाद रास्ता बना, मुक्तिधाम उजड़ गया?

सूत्रों के अनुसार, एनएमडीसी के टेलिंग डैम के ढहने की घटना के बाद बैलाडीला ट्रक ऑनर एसोसिएशन के ट्रकों की लोडिंग के लिए बनाए गए मार्ग के बाधित होने की स्थिति पैदा हुई। इसके बाद मुक्तिधाम के आसपास की जमीन और बाउंड्रीवॉल सहित परिसर के कुछ हिस्सों को तोड़े जाने की जानकारी सामने आई है।

यदि यह जानकारी सही है, तो कई गंभीर सवालों के जवाब जरूरी हैं। क्या मुक्तिधाम की जमीन या उसकी संरचना को हटाने के लिए कोई आधिकारिक आदेश जारी किया गया था? क्या नगरपालिका परिषद की अनुमति ली गई थी? क्या तोड़फोड़ से पहले वैकल्पिक मुक्तिधाम की व्यवस्था सुनिश्चित की गई? और यदि सरकारी निर्माण को नुकसान पहुंचा, तो उसकी जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कार्रवाई हुई?

इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों के दस्तावेजों और आधिकारिक पक्ष से ही स्पष्ट हो सकेगा।

निर्माण हुआ, लेकिन विरोध के कारण इस्तेमाल ही नहीं हो पाया?

इस मामले का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है। सूत्रों का कहना है कि मुक्तिधाम बनने के बाद जब यहां अंतिम संस्कार करने के लिए शव लाया गया, तब आसपास के निवासियों ने विरोध किया था। इसके बाद से यह परिसर नियमित रूप से उपयोग में नहीं आ सका।

यदि निर्माण के समय ही स्थानीय विरोध की स्थिति थी, तो नगरपालिका परिषद ने उस समय जनता के सामने अपनी योजना को स्पष्ट क्यों नहीं किया? क्या स्थान का चयन करने से पहले स्थानीय निवासियों की सहमति, स्थल की उपयुक्तता और भविष्य में इसके संचालन की योजना पर गंभीरता से विचार किया गया था?

जनता के पैसे से कोई निर्माण कर देना ही विकास नहीं है। विकास तब सार्थक होता है, जब उस सुविधा का लाभ जनता को वास्तव में मिले।

यदि लगभग 25 लाख रुपये खर्च करके बनाया गया मुक्तिधाम वर्षों तक अनुपयोगी रहा, तो यह केवल एक भवन की बदहाली नहीं, बल्कि योजना निर्माण, जनसुविधा और सार्वजनिक धन के उपयोग की समीक्षा का विषय है।

बचेली में अंतिम संस्कार के लिए आज भी दूसरे क्षेत्र पर निर्भरता?

स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि बचेली नगरपालिका क्षेत्र में रहने वाले सनातनी परिवारों को अंतिम संस्कार के लिए आज भी कोड़ेनार पंचायत अथवा किरंदुल क्षेत्र की ओर जाना पड़ता है। दुख की घड़ी में परिजनों को अपने क्षेत्र में ही एक व्यवस्थित और सम्मानजनक मुक्तिधाम उपलब्ध न होना नागरिक सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, बचेली में ईसाई और मुस्लिम समुदायों के लिए कब्रिस्तान की व्यवस्था है, लेकिन सनातनी परिवारों के लिए समुचित मुक्तिधाम की उपलब्धता को लेकर शिकायतें बनी हुई हैं। यह विषय किसी समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि सभी नागरिकों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप सम्मानजनक अंतिम संस्कार की सुविधा उपलब्ध कराने से जुड़ा है।

नगरपालिका परिषद और एनएमडीसी जैसे बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान की मौजूदगी वाले क्षेत्र में ऐसी बुनियादी सुविधा का अभाव आखिर क्यों बना हुआ है? क्या संबंधित संस्थाओं ने इस जरूरत को गंभीरता से लिया है?

अब नगरपालिका परिषद बचेली को देना होगा जवाब

बचेली के इस कथित मुक्तिधाम प्रकरण में नगरपालिका परिषद की जवाबदेही तय करने के लिए निम्न सवालों पर स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए—

फरवरी 2014 में मुक्तिधाम निर्माण के लिए स्वीकृत राशि वास्तव में कितनी थी और कुल कितना भुगतान किया गया?

निर्माण कार्य की गुणवत्ता, उपयोगिता और पूर्णता की जांच किस अधिकारी ने की थी?

यदि स्थानीय विरोध के कारण मुक्तिधाम का उपयोग नहीं हो पाया, तो उसके समाधान के लिए क्या कदम उठाए गए?

बाउंड्रीवॉल और अन्य निर्माण तोड़ने के लिए किस विभाग ने आदेश दिया और इसकी अनुमति किसने दी?

सार्वजनिक धन से बने परिसर को नुकसान पहुंचने पर जिम्मेदारी किसकी तय की गई?

क्या वर्तमान स्थिति की जांच कराई गई है? यदि नहीं, तो अब तक जांच क्यों नहीं हुई?

बचेली नगरपालिका क्षेत्र में सर्वसुविधायुक्त मुक्तिधाम निर्माण या पुराने परिसर को पुनः विकसित करने की कोई ठोस योजना है या नहीं?

इन सवालों का जवाब केवल आश्वासनों से नहीं, बल्कि निर्माण संबंधी अभिलेखों, स्वीकृति आदेशों, भुगतान विवरण, निरीक्षण रिपोर्ट और वर्तमान स्थिति की आधिकारिक जांच से मिलना चाहिए।

जनता के पैसे का हिसाब कौन देगा?

एक तरफ देश विकास और आधुनिक सुविधाओं की ओर आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ बचेली में अंतिम संस्कार जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए भी लोगों को दूसरे क्षेत्र पर निर्भर रहना पड़े, तो यह स्थानीय प्रशासन के लिए आत्ममंथन का विषय है।

करीब 25 लाख रुपये की लागत से बना बताया जा रहा मुक्तिधाम यदि आज अनुपयोगी और बदहाल स्थिति में है, तो जनता यह जानना चाहती है कि इस स्थिति तक पहुंचने के लिए कौन जिम्मेदार है। क्या निर्माण से पहले उचित योजना नहीं बनाई गई? क्या बाद में निगरानी नहीं हुई? क्या परिसर को नुकसान पहुंचने के बाद जिम्मेदारी तय नहीं की गई? या फिर वैकल्पिक व्यवस्था बनाने में उदासीनता बरती गई?

सी जी संविधान न्यूज़ छत्तीसगढ़ का सवाल है—जनता के पैसे से बना मुक्तिधाम यदि जनता के काम ही नहीं आया, तो इस खर्च की जवाबदेही कौन लेगा?

अब जरूरत है कि जिला प्रशासन, नगरपालिका परिषद बचेली और संबंधित विभाग इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं, सार्वजनिक धन के उपयोग का हिसाब सामने रखें और बचेली के नागरिकों के लिए जल्द से जल्द सर्वसुविधायुक्त मुक्तिधाम की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

जनता को सिर्फ निर्माण के फोटो नहीं, धरातल पर सुविधाएं चाहिए। जनता को सिर्फ विकास के दावे नहीं, अपने पैसे का हिसाब चाहिए।

सी जी संविधान न्यूज़ छत्तीसगढ़ — निडर, निष्पक्ष पत्रकारिता; जनता की आवाज, सच्चाई की आवाज।

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