*बड़ी खबर: बचेली में अतिक्रमण की हद पार! अब मुक्तिधाम के चबूतरे पर ही बना डाली दुकान, प्रशासन ने जड़ा ताला जिंदा लोगों की जमीन पर कब्जे की खबरें तो बहुत सुनीं, अब अंतिम संस्कार की जगह भी नहीं छोड़ी!*
बचेली | जिला दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़।
दंतेवाड़ा जिले के बचेली नगरपालिका क्षेत्र में अतिक्रमण का ऐसा अनोखा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। शहर से लगे ट्रांसपोर्ट नगर के पास स्थित मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार के लिए बनाए गए चबूतरे को ही अतिक्रमणकारियों ने दुकान का रूप दे दिया। चबूतरे पर शटर लगाकर कब्जा कर लिया गया। मामला सामने आने के बाद नगरपालिका प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए अतिक्रमित हिस्से पर सील लगा दी।
इस मामले की चर्चा अब पूरे जिले में हो रही है। अतिक्रमण की खबर सुनकर लोगों की जुबान पर बस एक ही सवाल है—“अब मुक्तिधाम भी नहीं बचेगा क्या?”
जहां अंतिम विदाई होनी थी, वहां दुकान खोलने की तैयारी!
बैलाडीला क्षेत्र में सरकारी नजूल भूमि, वन भूमि, रेलवे भूमि और एनएमडीसी के लीज क्षेत्र से जुड़े भूमि विवाद एवं अतिक्रमण के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं। लेकिन बचेली में सामने आया यह मामला अपनी तरह का अलग ही उदाहरण बन गया है।
जानकारी के अनुसार, बचेली के ट्रांसपोर्ट नगर के पास नगरपालिका क्षेत्र में मुक्तिधाम बनाया गया है। यहां अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों के बैठने और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए चबूतरेनुमा ढांचा तैयार किया गया था। बचेली-किरंदुल क्षेत्र के अधिकांश लोग अंतिम संस्कार के लिए पाड़ापुर स्थित मुक्तिधाम जाते हैं। ऐसे में ट्रांसपोर्ट नगर के पास स्थित मुक्तिधाम का नियमित उपयोग नहीं हो रहा था।
बताया जा रहा है कि इसी स्थिति का फायदा उठाकर किसी व्यक्ति ने मुक्तिधाम के चबूतरे पर दुकान की तरह निर्माण कर शटर लगा दिया और उस पर कब्जा कर लिया। जब मामले की जानकारी नगरपालिका प्रशासन तक पहुंची और समाचार पत्रों में खबरें प्रकाशित हुईं, तब इस अतिक्रमण को लेकर चर्चा तेज हो गई।
प्रशासन ने सील लगाया, लेकिन जिले में छिड़ी नई बहस
मामले के सामने आने के बाद नगरपालिका प्रशासन ने अतिक्रमित निर्माण पर सील लगाने की कार्रवाई की। प्रशासन की इस कार्रवाई की सराहना हो रही है, लेकिन इसके साथ ही सार्वजनिक और सरकारी भूमि पर कब्जे को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।
लोगों का कहना है कि आमतौर पर सड़क, नाली, बाजार और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की शिकायतें सुनने को मिलती हैं, लेकिन अंतिम संस्कार के लिए बनाए गए मुक्तिधाम के चबूतरे को ही दुकान में बदल देना अतिक्रमण की एक अलग ही तस्वीर पेश करता है।
लोगों में चर्चा—“मरने के बाद की जगह भी पहले से आरक्षित!”
इस अजीबोगरीब मामले को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोग व्यंग्य करते हुए कह रहे हैं कि अब तो अतिक्रमणकारियों ने मरने के बाद इस्तेमाल होने वाली जगह को भी पहले से ही अपने कब्जे में लेने की तैयारी कर ली है।
हालांकि, इस मामले में निर्माण करने वाले व्यक्ति, कब्जे की अवधि और भूमि की वास्तविक स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या नगरपालिका प्रशासन केवल इस निर्माण को सील करने तक सीमित रहेगा, या अतिक्रमण की पूरी जांच कराकर सरकारी भूमि को कब्जे से मुक्त कराने की दिशा में आगे भी कार्रवाई करेगा?
सी जी संविधान न्यूज़ | निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता

