हक की जगह के लिए अब एसडीएम कार्यालय की चौखट पर पहुँचे ग्रामीण — सड़क पर बैठकर बाजार लगाने की मजबूरी, हादसे का बढ़ा खतरा*

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*हक की जगह के लिए अब एसडीएम कार्यालय की चौखट पर पहुँचे ग्रामीण — सड़क पर बैठकर बाजार लगाने की मजबूरी, हादसे का बढ़ा खतरा*

किरंदुल। किरंदुल के मुख्य साप्ताहिक बाजार में आसपास के ग्रामीण आदिवासियों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों और कृषि उपज की बिक्री के लिए जगह नहीं मिल पाने का मामला अब प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया है। ग्रामीणों की ओर से अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), बड़े बचेली के समक्ष आवेदन देकर बाजार में सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने तथा आदिवासियों के लिए बनाए गए टीन शेड को कब्जे से मुक्त कराने की मांग की गई है।

प्राप्त पत्र में उल्लेख किया गया है कि एनएमडीसी किरंदुल परियोजना द्वारा आसपास के ग्रामीणों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बाजार क्षेत्र में टीन शेड का निर्माण कराया गया था, ताकि ग्रामीण आदिवासी वहां अपनी सब्जियां एवं अन्य सामग्री बेच सकें। लेकिन पत्र के अनुसार वर्तमान में इस टीन शेड पर कुछ स्थानीय लोगों का कब्जा होने के कारण ग्रामीण आदिवासियों को वहां बैठने की जगह नहीं मिल पा रही है।

बाजार में दुकानों का फैलाव, ग्रामीणों के लिए जगह हुई कम

ग्रामीणों का कहना है कि किरंदुल का मुख्य बाजार सप्ताह में दो दिन लगता है। बाजार के अंदर कई दुकानदार अपनी दुकानों के सामने सड़क की ओर 3 से 4 फीट तक अतिरिक्त जगह घेर लेते हैं। सब्जी एवं अन्य दुकानों के फैलाव के कारण बाजार की आवाजाही वाली जगह भी लगातार कम होती जा रही है।

ऐसे में दूर-दराज के गांवों से अपनी उपज लेकर आने वाले ग्रामीणों को बैठने के लिए तीन फीट जगह तक उपलब्ध नहीं हो पाती। मजबूरी में उन्हें बाजार क्षेत्र के बाहर या सड़क किनारे अपनी सामग्री लेकर बैठना पड़ता है।

जहां भारी ट्रक चढ़ते हैं, वहीं बैठ रहे ग्रामीण

मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि ग्रामीणों के अनुसार बाजार में जगह नहीं मिलने पर उन्हें उस मार्ग के किनारे बैठना पड़ रहा है, जहां से भारी मालवाहक ट्रक खड़ी चढ़ाई से होकर गुजरते हैं।

ऐसे स्थान पर सब्जी और अन्य सामग्री लेकर ग्रामीणों का बैठना किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकता है। बाजार के दिनों में पैदल ग्रामीण, ग्राहक, छोटे वाहन और भारी मालवाहक वाहनों की आवाजाही एक ही क्षेत्र में होने से सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अब ‘हक की जगह’ के लिए प्रशासन के दरवाजे पर दस्तक

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि एनएमडीसी द्वारा ग्रामीणों की सुविधा के लिए निर्मित टीन शेड को वास्तविक हितग्राहियों के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाए, बाजार में अतिक्रमण एवं अनधिकृत तरीके से घेरी जा रही जगह की जांच की जाए तथा ग्रामीण आदिवासियों के लिए सुरक्षित स्थान निर्धारित किया जाए।

आवेदन में यह भी कहा गया है कि यदि ग्रामीणों को व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराया जाता है तो वे अपनी सब्जियां, कृषि उपज एवं अन्य सामग्री सुरक्षित तरीके से बेच सकेंगे और बाजार की यातायात व्यवस्था भी सुचारु हो सकेगी।

सवाल बड़ा है—जिसके लिए शेड बना, उसे ही जगह क्यों नहीं?

यह मामला सिर्फ बाजार में बैठने की जगह का नहीं, बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा, आजीविका और सार्वजनिक सुविधा के उपयोग से जुड़ा सवाल बन गया है।

यदि ग्रामीणों के आरोप सही हैं कि उनकी सुविधा के लिए बनाया गया टीन शेड वर्तमान में दूसरे लोगों के कब्जे में है, तो प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि शेड किस उद्देश्य से बनाया गया था, वर्तमान में उसका उपयोग कौन कर रहा है और वास्तविक लाभार्थियों को उसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा है?

अब ग्रामीण आदिवासी सड़क किनारे बैठकर जोखिम उठाने के बजाय प्रशासन से अपने अधिकार और सुरक्षित बाजार स्थान की मांग कर रहे हैं। देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत को केवल एक आवेदन मानकर रख देता है या मौके पर जांच कर ग्रामीणों को वास्तविक राहत दिलाता है।

— सी जी संविधान न्यूज़ | छत्तीसगढ़

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