*किरंदुल में बिजली के खंभों पर ‘कब्जा’: जानलेवा लापरवाही, विभाग सख्ती के मूड में*
दंतेवाड़ा, 10 अक्टूबर 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल शहर में बिजली व्यवस्था की लाइनों पर शहरवासियों का ‘अनधिकृत कब्जा’ अब जानलेवा साबित हो रहा है। वर्षों पुराने 33 केवी हाई वोल्टेज तारों और खंभों के ठीक बगल में घर-दुकानें बना रखे हैं, जिससे हादसों का खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय प्रशासन और छत्तीसगढ़ स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (CSEB) ने अब कमर कस ली है—सर्वे के बाद नोटिस बांटे जा रहे हैं और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। विशेषज्ञ इसे ‘हाथी के पैरों तले सोकर खुद की चटाई बिछाने’ जैसी लापरवाही बता रहे हैं।
किरंदुल के व्यस्त इलाकों में यह दृश्य आम हो चुका है। जगह-जगह CSEB के खंभों से महज एक-दो फीट की दूरी पर निर्माण कार्य हो रहे हैं। तारों को लांघकर या उनसे चिपकाकर बने ये घर-दुकानें न केवल बिजली आपूर्ति को जोखिम में डाल रहे हैं, बल्कि शहरवासियों की जान को भी खतरे में झोंक रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, हाल के वर्षों में किरंदुल में कई हादसे हो चुके हैं, जहां हाई वोल्टेज तारों के संपर्क में आने से लोग झुलस चुके हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति वार्ड नंबर 8 में है, जहां पूरे तार को ही कब्जा कर लिया गया है। यहां के निवासियों का कहना है की वार्ड के मुखिया ही नियमो को तोड़ कर मकान निर्माण किया हैं, लेकिन विशेषज्ञ चेताते हैं कि यह सीधी मौत को न्योता दे रहा है।
“यह पूरी तरह से ‘आ बैल मुझे मार’ वाली स्थिति है,” एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया। “पुराने खंभे और तार वर्षों से यहीं खड़े हैं, फिर भी लोग इन्हें नजरअंदाज कर निर्माण कर रहे हैं। वार्ड 8 में तो तार घर की दिवार के बिचौबीच से गुजरते हैं—बारिश में स्पर्श का डर हमेशा बना रहता है।” शहर के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के उल्लंघन देखे जा रहे हैं, जो न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि पूरे शहर की बिजली व्यवस्था को अस्थिर बना रहे हैं।
CSEB के अधिकारियों ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “ये खंभे और तार बिजली व्यवस्था के लिए वर्षों से लगे हुए हैं। इनके आसपास अनधिकृत निर्माण दंडनीय अपराध है। हादसों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए हमने व्यापक सर्वे शुरू कर दिया है। जिन लोगों ने तारों-खंभों पर कब्जा किया है या उनके करीब निर्माण किया है, उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं। यदि वे स्वेच्छा से निर्माण हटाते नहीं हैं, तो कानूनी कार्रवाई अपरिहार्य होगी।”
अधिकारी के अनुसार, नोटिस प्रक्रिया बहुत जल्द पूरी हो जाएगी। CSEB ने स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर जागरूकता अभियान भी चलाने का प्लान बनाया है, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो। बिजली सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हाई वोल्टेज लाइनों के आसपास न्यूनतम 10-15 मीटर का सुरक्षित दूरी अनिवार्य है, लेकिन किरंदुल जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में यह नियम धड़ल्ले से तोड़ा जा रहा है। राज्य स्तर पर भी CSEB ने ऐसे मामलों में सख्ती बरतने के निर्देश जारी किए हैं, जो दंतेवाड़ा जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक कदम है।
शहरवासी अब विभाग की इस पहल का स्वागत कर रहे हैं, लेकिन साथ ही वे अपील कर रहे हैं कि निर्माण हटाने से पहले वैकल्पिक जगहों का इंतजाम हो। यदि समय रहते कार्रवाई हुई, तो किरंदुल न केवल सुरक्षित बनेगा, बल्कि बिजली व्यवस्था भी सुचारू हो सकेगी। फिलहाल, नोटिस पाने वाले परिवारों में हलचल मच गई है—क्या वे नियम मानेंगे या अदालती जंग लड़ेंगे? आने वाले दिनों में इसका असर साफ दिखेगा।

