*किरंदुल का टूटता सपना: 15 साल बाद भी अधूरा ओवरब्रिज, दरारों ने उजागर की एनएमडीसी की लापरवाही*

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*किरंदुल का टूटता सपना: 15 साल बाद भी अधूरा ओवरब्रिज, दरारों ने उजागर की एनएमडीसी की लापरवाही*

दंतेवाड़ा, 7 अक्टूबर 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल में एशिया का सबसे महंगा ओवरब्रिज, जो 15 साल से अधिक समय से अधूरा पड़ा है, अब टूटने की कगार पर पहुंच चुका है। इस बहुप्रचारित परियोजना में हाल ही में लंबी-लंबी दरारें उभर आई हैं, जिसने राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) की लापरवाही और निर्माण में खराब गुणवत्ता को बेनकाब कर दिया है। स्थानीय लोग इस अधूरे पुल को अब ‘सपनों का कब्रिस्तान’ कहने लगे हैं, क्योंकि यह न केवल यातायात की समस्या हल करने में विफल रहा, बल्कि अब सुरक्षा के लिए भी खतरा बन गया है।

दरारों ने खोली लापरवाही की पोल

2009 में शुरू हुआ यह ओवरब्रिज, जिसे किरंदुल की यातायात समस्या का समाधान माना जा रहा था, आज तक पूरा नहीं हो सका। हाल ही में वार्ड नंबर 8 की ओर बने हिस्से, जो दो-तीन साल पहले बनाया गया था, में गहरी दरारें दिखाई देने लगी हैं। ये दरारें निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की खराब गुणवत्ता और तकनीकी लापरवाही की ओर इशारा करती हैं। एक स्थानीय बुजुर्ग ने निराशा जताते हुए कहा, “हमने इस पुल के पूरा होने का सपना देखा था, लेकिन अब लगता है कि यह बनने से पहले ही ढह जाएगा।”

फोटो और स्थानीय लोगों के बयानों से साफ है कि यह पुल अब उपयोग के लिए असुरक्षित हो सकता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर तुरंत मरम्मत या जांच नहीं की गई, तो यह संरचना पूरी तरह से ध्वस्त हो सकती है, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है।

जलभराव और नुकसान का जिम्मेदार कौन?

इस ओवरब्रिज के निर्माण ने न केवल समय और धन की बर्बादी की, बल्कि स्थानीय समस्याओं को और बढ़ा दिया। नगरपालिका उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी ने एनएमडीसी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “इस पुल के निर्माण के कारण नाला पूरी तरह छत्तीग्रस्त हो गया है, जिससे बारिश का पानी नहीं निकल पा रहा। वार्ड नंबर 8 में बार-बार जलभराव हो रहा है, जिससे लोगों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।” सिद्दीकी ने एनएमडीसी पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि कंपनी ने नाले की मरम्मत को नजरअंदाज कर केवल अपने प्रोजेक्ट पर ध्यान दिया, जिसका खामियाजा स्थानीय लोग भुगत रहे हैं।

एनएमडीसी की विश्वसनीयता पर सवाल

एनएमडीसी, जो किरंदुल में लौह अयस्क खनन के लिए जानी जाती है, पहले भी कई विवादों में घिर चुकी है। खनन पट्टा उल्लंघनों के लिए 1,620 करोड़ रुपये के जुर्माने से लेकर बाढ़ जैसी आपदाओं तक, कंपनी की कार्यशैली पर सवाल उठते रहे हैं। इस ओवरब्रिज की स्थिति ने एक बार फिर एनएमडीसी की जवाबदेही और प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय निवासी रामू कोर्राम ने गुस्से में कहा, “15 साल से हम इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब यह पुल हमारी उम्मीदों को तोड़ रहा है। एनएमडीसी को जवाब देना होगा कि आखिर इतना पैसा और समय कहां गया?”

क्या बचेगा किरंदुल का भविष्य?

स्थानीय लोगों का गुस्सा अब चरम पर है। इस ओवरब्रिज के कारण न केवल यातायात की समस्या बरकरार है, बल्कि जलभराव और आर्थिक नुकसान ने किरंदुलवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। प्रशासन ने तकनीकी जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन ग्रामीणों का भरोसा टूट चुका है। सामाजिक कार्यकर्ता अनिता ठाकुर ने चेतावनी दी, “अगर एनएमडीसी ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो यह पुल एक बड़े हादसे का कारण बन सकता है।”

किरंदुल का यह ओवरब्रिज, जो कभी विकास का प्रतीक बनने का वादा था, आज लापरवाही और अव्यवस्था का नमूना बन गया है। सवाल यह है कि क्या एनएमडीसी और प्रशासन समय रहते इस संकट को टाल पाएंगे, या किरंदुलवासियों का यह सपना हमेशा के लिए टूट जाएगा?

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