*:बालोद पुलिस का स्टेनो ने बनाया कार्यालय को पैसे हड़पने का अड्डा, जनता और कर्मचारी दोनों पीसे जा रहे थे*
बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में भ्रष्टाचार का नया नमूना सामने आया है, जिसने विभाग की शर्मनाक हकीकत को उजागर कर दिया। दिनांक 19 सितंबर 2025 को पदस्थ स्टेनो शत्रुघ्न वर्मा को आरक्षकों और आम जनता से पैसे वसूलने के मामले में दोषी पाए जाने पर निलंबित कर दिया गया। यह वही स्टेनो है, जिसने वर्षों तक अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कार्यालय को लूट का अड्डा बना रखा था।
सूत्रों के अनुसार, शत्रुघ्न वर्मा ने विभागीय जांच और ट्रांसफर के बावजूद अपनी आदत नहीं छोड़ी। पहले राजनांदगांव में उनका ट्रांसफर किया गया था, ताकि बालोद में फैले उनके भ्रष्टाचार को रोका जा सके। लेकिन पैसों की भूख और भ्रष्टाचार की लत ने उन्हें फिर से बालोद खींच लिया, जहां उन्होंने पूरी बेशर्मी से अपने पुराने धंधे को दोहराया।
उनका व्यवहार इस कदर था कि कर्मचारियों और जनता दोनों ही उनके आतंक के शिकार थे। झूठी शिकायतें बनाना, कार्यवाही के नाम पर पैसों की वसूली और विभागीय अफसरों के नाम पर धमकाना उनकी दिनचर्या बन गई थी। कोई भी उनसे बच नहीं सकता था। लोगों के हक की लूट और मनोवैज्ञानिक प्रताड़ना में वह मास्टर थे।
एसपी योगेश पटेल की इस कार्रवाई की तारीफ करनी ही पड़ेगी। उन्होंने न केवल कानून के प्रति निष्ठा दिखाई, बल्कि यह संदेश भी दिया कि पद का दुरुपयोग करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। बालोद पुलिस कार्यालय में भ्रष्टाचार के इस घिनौने खेल को रोकना अब अपरिहार्य हो गया था।
राजू चंद्राकर जैसे प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि शत्रुघ्न वर्मा ने वर्षों तक विभाग और जनता दोनों का शोषण किया। उनका निलंबन यह दिखाता है कि अब भ्रष्टाचारियों के लिए बालोद में कोई छूट नहीं है। यह स्पष्ट कर रहा है कि “कानून सबके लिए बराबर” सिर्फ एक कहावत नहीं, बल्कि अब क्रियान्वित हो रही सच्चाई है।
एसपी पटेल की यह कार्रवाई उन अफसरों के लिए चेतावनी है, जो पद का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए करते हैं। बालोद में अब भ्रष्टाचारियों को खुला मैदान नहीं मिलेगा, और यह कदम विभाग के भीतर अनुशासन कायम करने और जनता में भरोसा लौटाने के लिए निर्णायक साबित होगा।

