*किरंदुल व्यपारी कल्याण संघकी लूट : 5000 रुपये का नामांकन फॉर्म, छोटे व्यापारियों की जेब पर बोझ या साजिश की सौदेबाजी?*

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*किरंदुल व्यपारी कल्याण संघकी लूट : 5000 रुपये का नामांकन फॉर्म, छोटे व्यापारियों की जेब पर बोझ या साजिश की सौदेबाजी?*

किरंदुल, छत्तीसगढ़ (7 सितंबर 2025): किरंदुल के व्यापारियों के बीच आक्रोश की लहर दौड़ रही है। स्थानीय व्यपारी कल्याण संघ द्वारा अध्यक्ष और सचिव पदों के लिए नामांकन फॉर्म की कीमत मात्र 5000 रुपये तय करने से छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारियों को चुनाव प्रक्रिया से दूर रखने का आरोप लग रहा है। संघ की यह नीति न केवल व्यापारियों की आर्थिक स्थिति पर असर डाल रही है, बल्कि कुछ सदस्यों के अनुसार, यह ठेकेदारों को थोपने की बंद कमरों में रची गई साजिश का हिस्सा है। पुरानी और प्रतिष्ठित संस्थाओं जैसे बैलाडीला व्यपारी कल्याण संघ में सदस्यता शुल्क महज 300 रुपये होने के बावजूद, यहां 500 रुपये की सदस्यता रसीद और 5000 रुपये का नामांकन फॉर्म व्यापारियों को ‘लूट’ का शिकार बना रहा है।

किरंदुल व्यपारी कल्याण संघ, जो छत्तीसगढ़ की तीसरी सबसे बड़ी रजिस्टर्ड ट्रांसपोर्ट संस्था BTOA (बैलाडीला ट्रक ओनर्स एसोसिएशन) की तुलना में नया संगठन है, ने हाल ही में चुनाव की घोषणा की है। BTOA में अध्यक्ष और सचिव पदों के लिए नामांकन फॉर्म की फीस 5100 रुपये है, लेकिन वहां कम से कम संस्था की स्थापना और इतिहास एक मजबूत आधार प्रदान करता है। वहीं, किरंदुल संघ में 5000 रुपये का फॉर्म छोटे व्यापारियों के लिए एक बड़ा आर्थिक बाधा साबित हो रहा है। एक स्थानीय व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “ये 5000 रुपये का फॉर्म चुनाव से हमें दूर रखने का हथियार है। हम जैसे छोटे दुकानदार पहले ही महंगाई की मार झेल रहे हैं, ऊपर से यह लूट। बैलाडीला व्यपारी कल्याण संघ, जो हमारे पूर्वजों की विरासत है, वहां सदस्यता सिर्फ 300 रुपये है। यहां तो 500 रुपये की रसीद भी हजम नहीं हो रही।”

संघ के एक सदस्य से मिली जानकारी के अनुसार, अब तक 500 सदस्यता रसीदें जारी की जा चुकी हैं, जिससे 2.50 लाख रुपये की राशि एकत्रित हो चुकी है। लेकिन सवाल यह उठता है कि यह धनराशि कहां जा रही है? किरंदुल में विभिन्न सामाजिक संगठनों में अध्यक्ष या सचिव पद के लिए कहीं भी 5000 रुपये का नामांकन फॉर्म नहीं लिया जाता। यह राशि न केवल व्यापारियों की पहुंच को सीमित कर रही है, बल्कि संघ को ‘व्यापारियों को लूटने का अड्डा’ बनाने का आरोप लगा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी ऊंची फीसें संगठन को कुछ चुनिंदा लोगों या बाहरी ठेकेदारों के हितों के अधीन कर देती हैं, जहां आम व्यापारी की आवाज दब जाती है।

लूट का विश्लेषण: आर्थिक असमानता और साजिश की आशंका

यह मुद्दा किरंदुल के माइनिंग क्षेत्र में व्यापारियों की आर्थिक वास्तविकता को उजागर करता है। किरंदुल, जो NMDC के बैलाडीला आयरन ओर माइंस के निकट स्थित है, यहां छोटे व्यापारी मुख्य रूप से दैनिक जरूरतों की दुकानों, ट्रांसपोर्ट और लोकल सर्विसेज पर निर्भर हैं। 5000 रुपये का नामांकन फॉर्म उनके मासिक कमाई का एक बड़ा हिस्सा हो सकता है, जो चुनाव लड़ने की बजाय परिवार के खर्चों में लग जाता। तुलनात्मक रूप से:

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