*किरंदुल में पोला पर्व पर गौशाला में गौमाता और नंदी की विशेष पूजा-अर्चना, सांस्कृतिक परंपराओं का उत्सव*

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*किरंदुल में पोला पर्व पर गौशाला में गौमाता और नंदी की विशेष पूजा-अर्चना, सांस्कृतिक परंपराओं का उत्सव*

किरंदुल, 23 अगस्त 2025: बैलाडीला देव स्थान समिति और गायत्री परिवार के तत्वावधान में, नगर परिवार के सेवाभावी समाजसेवकों के विशेष सहयोग और गरिमामय उपस्थिति में शनिवार को किरंदुल के गांधी नगर स्थित गौशाला में पोला पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस पावन अवसर पर कृषि और पशुधन के अटूट संबंध को मजबूत करने के उद्देश्य से गौमाता और नंदी की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। गाय को लक्ष्मी और बैल को भगवान शिव के वाहन के रूप में पूजते हुए, उपस्थित लोगों ने हरी घास, चुनी, भूसा, रोटी और फल आदि अर्पित कर अपनी श्रद्धा और आभार प्रकट किया।

इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करते हुए समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना और किरंदुलवासियों के सुख, समृद्धि और सौभाग्य की कामना करना था। पूजा-अर्चना के दौरान गौमाता और नंदी के प्रति श्रद्धा के साथ-साथ पर्यावरण और पशुधन संरक्षण का संदेश भी दिया गया।

प्रमुख उपस्थित व्यक्तित्व कार्यक्रम में नगरपालिका परिषद किरंदुल की अध्यक्ष श्रीमती रूबी शैलेंद्र सिंह, पूर्व अध्यक्ष श्री शैलेंद्र सिंह, उपाध्यक्ष श्री बबलू सिद्दीकी, पूर्व उपाध्यक्ष श्री बाल सिंग, एनएमडी कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री बी.एल. तारम सहित सम्माननीय पार्षदगण, मातृशक्ति और समाजसेवी शामिल रहे। बैलाडीला देव स्थान समिति और गायत्री परिवार के पदाधिकारी श्री अतुल सिंह, श्री ओम कुमार साहू, श्री जी.डी.पी. धारिया, श्री डी.पी. मिश्रा, श्री संजय सोनी, श्री किशोर कुमार रामटेके, श्री कृष्णानंद भंडारी, श्री ओमप्रकाश साहू, श्री जीवनलाल साहू, श्री मोहित धवन, श्री गोलू शिवानंद सहित अनेक सेवाभावी भाई-बहन और मातृशक्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और गरिमामय बनाया।

सभी उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने अपने कर-कमलों से गौमाता और नंदी को हरी घास, रोटी, केला और भूसी खिलाकर अपनी श्रद्धा अर्पित की। इस दौरान गौशाला में पीड़ित एक गौमाता के स्वास्थ्य सुधार के लिए सभी ने ईश्वर से प्रार्थना की।

आभार और भविष्य की अपेक्षा बैलाडीला देव स्थान समिति और गायत्री परिवार ने सभी उपस्थित अतिथियों, समाजसेवकों, भाइयों, बहनों और मातृशक्तियों के सहयोग के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। समिति ने अपेक्षा जताई कि भविष्य में भी नगर परिवार का इसी तरह का सहयोग प्राप्त होता रहेगा, जिससे सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों को और सशक्त किया जा सके।

सांस्कृतिक महत्व पोला पर्व छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, जो कृषि और पशुधन के बीच गहरे रिश्ते को दर्शाता है। इस अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल परंपराओं को जीवंत रखने का प्रयास है, बल्कि समाज में एकता, श्रद्धा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश भी देता है।

यह आयोजन किरंदुलवासियों के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण बन गया है, जो सामुदायिक सहभागिता और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति निष्ठा को दर्शाता है।

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