*किरंदुल में आधा घंटे की बारिश ने खोली नगरपालिका, जिला प्रशासन और NMDC की पोल: मॉनसून से पहले बाढ़ की आशंका ने बढ़ाई चिंता*
किरंदुल, 19 मई 2025: आज शाम 5:30 से 5:45 बजे तक हुई आधे घंटे की मूसलाधार बारिश ने किरंदुल नगरपालिका, जिला प्रशासन और नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NMDC) की मॉनसून तैयारियों की पोल खोल दी। इस बारिश ने वार्ड नंबर 1, 3, 4, 6, 7, 8 और ग्राम पंचायत कोडेनार तालब पारा की गलियों को नदियों में तब्दील कर दिया। सड़कें जलमग्न हो गईं, कई घरों में पानी घुस गया, सामान नष्ट हुआ और वार्ड नंबर 8 में एक कच्चा मकान ढह गया। यह स्थिति पिछले साल 21 जुलाई 2024 को NMDC के चेक-डैम टूटने से आई विनाशकारी बाढ़ की याद दिला रही थी, जिसने किरंदुल को भारी तबाही दी थी।
*बाढ़ का डर और प्रशासन की नाकामी*
स्थानीय लोगों में अब मॉनसून को लेकर डर बढ़ गया है। पिछले साल की बाढ़, जिसमें NMDC के चेक-डैम के टूटने से बंगाली कैंप और आसपास के इलाकों में भारी नुकसान हुआ था, ने प्रशासन और NMDC की लापरवाही को उजागर किया था। उस घटना में लगभग 8800 लोग प्रभावित हुए, 40 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा और दो बच्चों को बाढ़ के पानी से बचाया गया था। NMDC ने तब भारी बारिश को दोष दिया, लेकिन जांच में पाया गया कि चेक-डैम की नियमित सफाई और रखरखाव नहीं हुआ था, जिसके कारण वह सिल्ट से भरा हुआ था।
आज की बारिश ने फिर से वही सवाल उठाए हैं। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, महिला आयोग की सदस्य ओजस्वी मंडावी ने NMDC के अधिकारी संजीव सही से मॉनसून में बाढ़ से निपटने की तैयारियों पर चर्चा की। सही ने जवाब दिया कि NMDC ने जिला प्रशासन को सुधार और मरम्मत कार्यों के लिए धन दे दिया है, और अब उनकी जिम्मेदारी खत्म हो गई है। यह बयान स्थानीय लोगों के गुस्से को और भड़का रहा है, जो मानते हैं कि NMDC, जिला प्रशासन और नगरपालिका एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं।
*अवैध अतिक्रमण: बाढ़ का प्रमुख कारण*
किरंदुल में बाढ़ की समस्या का एक बड़ा कारण नालियों पर अवैध अतिक्रमण है। वार्ड नंबर 1 में कुछ लोगों ने नालियों पर पक्के मकान और दुकानें बना ली हैं। एक व्यक्ति ने तो 3 फीट चौड़ी नाली पर तीन मंजिला इमारत खड़ी कर दी है। वार्ड नंबर 6 में भी नालियों पर दुकानों और मकानों का निर्माण हुआ है, जिसके कारण नालियों की सफाई वर्षों से नहीं हुई। नतीजतन, बारिश का पानी नालियों से निकलने के बजाय सड़कों पर बहता है और लोगों के घरों में घुस जाता है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इन अतिक्रमणों को जनप्रतिनिधियों का संरक्षण प्राप्त है। वोट बैंक की राजनीति के चलते अवैध निर्माणों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। एक प्रभावित निवासी ने बताया, “हमने कई बार नगरपालिका और प्रशासन से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। जनप्रतिनिधि अतिक्रमण करने वालों को बचाते हैं, और हम हर बारिश में परेशान होते हैं।”
*पिछले बाढ़ का विश्लेषण: सबक नहीं लिया गया*
21 जुलाई 2024 की बाढ़ ने किरंदुल को झकझोर दिया था। NMDC के 11C डिपॉजिट में स्थित संप टैंक की दीवार टूटने से बंगाली कैंप और आसपास के इलाकों में बाढ़ आ गई थी। इस टैंक की पूर्वी दीवार, जो 70 मीटर लंबी, 70 मीटर चौड़ी और 2.5 मीटर गहरी थी, भारी बारिश में ढह गई थी। जांच में पाया गया कि NMDC ने चेक-डैम की सफाई दो साल से नहीं की थी, जिसके कारण सिल्ट जमा हो गया और डैम की क्षमता कम हो गई थी।
स्थानीय लोगों ने पहले भी NMDC को चेक-डैम की सुरक्षा के लिए लिखित शिकायतें दी थीं, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। दंतेवाड़ा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) ने भी खनन क्षेत्रों में इस तरह की संरचनाओं के प्रबंधन के लिए कोई नियम-कायदे नहीं बनाए हैं। इसके अलावा, नगरपालिका ने जल निकासी व्यवस्था को ठीक करने या अतिक्रमण हटाने की कोई ठोस पहल नहीं की।
*मॉनसून से पहले क्या हो उपाय?*
आज की बारिश ने मॉनसून से पहले किरंदुल की कमजोर तैयारियों को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोग अब डर में जी रहे हैं कि मॉनसून में फिर से बाढ़ तबाही मचा सकती है। विशेषज्ञों और प्रभावित नागरिकों ने निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:
*1:-नालियों की सफाई और अतिक्रमण हटाना:*
नगरपालिका को तत्काल नालियों पर बने अवैध निर्माण हटाने चाहिए। नियमित सफाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
*2:-NMDC की जवाबदेही:* NMDC को अपने चेक-डैम और संप टैंक की नियमित निगरानी और रखरखाव करना चाहिए। धन देने के बाद भी उनकी तकनीकी जिम्मेदारी खत्म नहीं होती।
*3:-जिला प्रशासन की सक्रियता:* जिला प्रशासन को आपदा प्रबंधन योजना बनानी चाहिए, जिसमें बाढ़ की स्थिति में त्वरित बचाव और राहत कार्य शामिल हों।
*4:-जनप्रतिनिधियों की भूमिका:* वोट बैंक की राजनीति छोड़कर जनप्रतिनिधियों को अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन करना चाहिए।
*5:-जल निक ASI व्यवस्था का सुधार:* शहर में जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाई जानी चाहिए।
*निष्कर्ष:* समय रहते जागेंकिरंदुल में आज की बारिश ने एक बार फिर साबित कर दिया कि नगरपालिका, जिला प्रशासन और NMDC की लापरवाही शहर को बार-बार बाढ़ की चपेट में ला रही है। अवैध अतिक्रमण, नालियों की गंदगी और चेक-डैम की लापरवाही जैसे मुद्दों का समाधान किए बिना मॉनसून में स्थिति और भयावह हो सकती है। प्रशासन और NMDC को एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने के बजाय समन्वित प्रयास करने होंगे। स्थानीय लोगों की मांग है कि पिछले बाढ़ से सबक लिया जाए और मॉनसून से पहले ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि किरंदुल फिर से तबाही का शिकार न बने।

