*किरंदुल-बचेली के अंधे मोड़: हादसों का इंतज़ार करती सड़कें और लापरवाह बीटीओए*
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित किरंदुल और बचेली, बैलाडीला की खदानों के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन इन दिनों ये इलाके एक और वजह से चर्चा में हैं—सड़कों पर लापरवाही और हादसों के बढ़ते खतरे। बैलाडीला ट्रक ऑनर एसोसिएशन (बीटीओए) के कार्यालयों के सामने, किरंदुल और बचेली में अंधे मोड़ों पर ट्रकों का अवैध रूप से खड़ा होना अब एक आम दृश्य बन चुका है। ये ट्रक न केवल यातायात को बाधित कर रहे हैं, बल्कि राहगीरों और वाहन चालकों की जान के लिए भी बड़ा खतरा बन गए हैं। स्थानीय लोग और विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो ये अंधे मोड़ किसी बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं।
*अंधे मोड़ों पर ट्रकों का जमावड़ा*
किरंदुल में बीटीओए कार्यालय के पास, बचेली जाने वाले मार्ग पर नाले के ऊपर एक तीखा अंधा मोड़ है। यहां ट्रक दिन-रात खड़े रहते हैं, जिससे सड़क का बड़ा हिस्सा अवरुद्ध हो जाता है। इसी तरह, बचेली में बीटीओए कार्यालय के सामने भी एक अंधा मोड़ है, जहां ट्रकों का जमावड़ा रहता है। ये ट्रक सड़क के दोनों ओर खड़े होने की वजह से सामने से आने वाले वाहनों को दिखाई नहीं देते। तेज रफ्तार में चलने वाले वाहन चालकों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक है, क्योंकि अचानक सामने ट्रक देखकर ब्रेक लगाने का समय भी नहीं मिलता।
स्थानीय निवासी रमेश साहू बताते हैं, “यहां रोज़ ट्रक खड़े रहते हैं। मोड़ पर विज़िबिलिटी ज़ीरो हो जाती है। कई बार छोटे-मोटे हादसे हो चुके हैं, लेकिन बीटीओए या प्रशासन कोई ध्यान नहीं देता।” एक अन्य राहगीर, श्यामलाल ने कहा, “लोगों की जान से खिलवाड़ हो रहा है। ट्रक मालिकों को सिर्फ अपने माल की चिंता है, राहगीरों की सुरक्षा से कोई लेना-देना नहीं।”
*हादसों का बढ़ता खतरा*
किरंदुल और बचेली की सड़कों पर ट्रकों की अव्यवस्थित पार्किंग के कारण हादसों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अंधे मोड़ों पर ट्रकों का खड़ा होना कई कारणों से खतरनाक है:
*सीमित दृश्यता:* अंधे मोड़ पर खड़े ट्रक सामने से आने वाले वाहनों को दिखाई नहीं देते, जिससे टक्कर की आशंका बढ़ जाती है।
*तेज़ रफ्तार:* आजकल वाहन चालक, खासकर युवा, तेज़ रफ्तार से गाड़ियां चलाते हैं। अचानक ट्रक सामने आने पर हादसा होना तय है।
*सड़क की संरचना:* किरंदुल और बचेली के ये मोड़ तीखे और संकरे हैं, जहां दो बड़े वाहनों का एक साथ गुजरना मुश्किल है। ट्रकों की मौजूदगी स्थिति को और जटिल बनाती है।
*रात में खतरा दोगुना:* रात के समय खराब रोशनी और रिफ्लेक्टरों की कमी के कारण खड़े ट्रक और भी खतरनाक हो जाते हैं।
हाल ही में रायपुर में हुए एक भीषण ट्रक हादसे ने सड़क सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। 13 मई 2025 को न्यूज़18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, रायपुर में ट्रक और ट्रेलर की टक्कर में 13 लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे में ड्राइवर की लापरवाही और टोल नाके से बचने के लिए वैकल्पिक रास्ता चुनना कारण बताया गया। किरंदुल और बचेली की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है, जहां ट्रक मालिकों की लापरवाही और बीटीओए की उदासीनता हादसों को न्योता दे रही है।
*बीटीओए की लापरवाही*
बैलाडीला ट्रक ऑनर एसोसिएशन पर आरोप है कि वह अपने सदस्यों को अनुशासित करने में पूरी तरह नाकाम रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बीटीओए को सिर्फ अपने ट्रकों में माल की लोडिंग-अनलोडिंग और ट्रक मालिकों के हितों की चिंता है। राहगीरों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। एक ट्रक ड्राइवर, जो नाम न छापने की शर्त पर बात की, ने बताया, “हमें ऊपर से निर्देश मिलते हैं कि ट्रक जहां जगह मिले, वहीं खड़ा कर दें। पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है।”
सड़क सुरक्षा के लिए काम करने वाली एक स्थानीय एनजीओ के कार्यकर्ता संतोष कुमार ने कहा, “बीटीओए को अपने ट्रकों के लिए उचित पार्किंग व्यवस्था करनी चाहिए। अंधे मोड़ों पर ट्रक खड़ा करना गैरकानूनी है, लेकिन न तो पुलिस और न ही प्रशासन इस पर कार्रवाई करता है।”
*प्रशासन की चुप्पी*
स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। किरंदुल और बचेली में ट्रकों की अवैध पार्किंग की शिकायतें कई बार पुलिस और नगर प्रशासन तक पहुंची हैं, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी न के बराबर है, और जो नियम हैं, उनका पालन नहीं हो रहा। सड़क सुरक्षा नियमों के तहत, अंधे मोड़ों और संकरे रास्तों पर वाहन पार्क करना प्रतिबंधित है, लेकिन इस नियम की खुलेआम अनदेखी हो रही है।
*हादसों का विश्लेषण*
पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ में सड़क हादसों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। न्यूज़18 की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च-मई 2025 के बीच राज्य में कई बड़े सड़क हादसे हुए, जिनमें ट्रकों की लापरवाही एक प्रमुख कारण रही। किरंदुल और बचेली में स्थिति और भी चिंताजनक है, क्योंकि ये इलाके खनन गतिविधियों के कारण ट्रकों की आवाजाही के लिए हॉटस्पॉट हैं।
*संभावित हादसों के प्रकार:* अंधे मोड़ों पर ट्रकों के कारण टक्कर, वाहनों का पलटना, और पैदल राहगीरों के साथ दुर्घटना सबसे आम खतरे हैं।
*प्रभावित समूह:* स्थानीय निवासी, स्कूली बच्चे, और छोटे वाहन चालक (जैसे मोटरसाइकिल और साइकिल सवार) सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।
*आर्थिक नुकसान:* हादसों से न केवल जान-माल की हानि होती है, बल्कि इलाके की आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं, क्योंकि ये सड़कें खनन सामग्री के परिवहन का मुख्य रास्ता हैं।
*निष्कर्ष* किरंदुल और बचेली के अंधे मोड़ों पर खड़े ट्रक न केवल सड़क सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि बैलाडीला ट्रक ऑनर एसोसिएशन की लापरवाही को भी उजागर करते हैं। ट्रक मालिकों और बीटीओए की प्राथमिकता सिर्फ माल और मुनाफे तक सीमित नहीं होनी चाहिए। राहगीरों की जान की कीमत पर इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। अगर प्रशासन और बीटीओए ने जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया, तो ये अंधे मोड़ किसी बड़े हादसे का गवाह बन सकते हैं। समय है कि बीटीओए अपनी जिम्मेदारी समझे, प्रशासन सक्रिय हो, और किरंदुल-बचेली की सड़कें सुरक्षित बनें।

