*किरंदुल में बाढ़: नालियों पर कब्जे और लापरवाही ने बढ़ाई तबाही, क्या फिर दोहराएगी 2024 की कहानी?*
21 जुलाई 2024 की काली दोपहर को किरंदुल के लोग शायद ही कभी भूल पाएं। दोपहर करीब 3 बजे, कुछ ही मिनटों की बेमौसम बारिश ने किरंदुल नगरपालिका के आधे हिस्से को जलमग्न कर दिया। एनएमडीसी (नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) की 11सी माइनिंग से निकला जल सैलाब और लाल मिट्टी ने वार्ड नंबर 1, 3, 4, 5, 6, 7 और ग्राम पंचायत कोडेनार में भारी तबाही मचाई। सड़कों पर पानी, घरों में कीचड़, और हर तरफ “बचाओ-बचाओ” की चीख-पुकार ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। यह बाढ़ केवल प्रकृति की मार नहीं थी, बल्कि मानवीय लापरवाही और अनियोजित व्यवस्था का नतीजा थी, जिसका खामियाजा सैकड़ों लोगों को भुगतना पड़ा।
*बाढ़ की वजह: नालियों पर कब्जा और अनदेखी*
किरंदुल में बार-बार बाढ़ का मुख्य कारण है नालियों पर अवैध कब्जा और उनकी सफाई में वर्षों की उपेक्षा। शहर के कई हिस्सों में, खासकर वार्ड 6 के घड़ी चौक, वार्ड 5, 6, 7 और वार्ड 1 में, कुछ लोगों ने नालियों को पूरी तरह ढक कर उन पर मकान, दुकानें, और यहां तक कि बहुमंजिला इमारतें बना ली हैं। नालियों की सफाई न होने से ये पूरी तरह मलबे और कचरे से भरी पड़ी हैं, जिसके चलते बारिश का पानी निकलने का रास्ता नहीं ढूंढ पाता और सड़कों पर बहने लगता है।
उदाहरण के लिए, वार्ड 1 में एक बड़े नाले के ऊपर तीन मंजिला इमारत बनाई गई है, जिसने नाले को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया। घड़ी चौक में सड़क के दोनों ओर बनी नालियां कचरे और अवैध निर्माणों से भरी हैं, और इनकी सफाई के लिए कोई रास्ता तक नहीं बचा। वार्ड 5, 6, और 7 की सीमा पर कुछ लोगों ने नालियों को ही घर बना लिया, जिसके चलते पानी को निकलने का कोई रास्ता नहीं मिलता। यह स्थिति हर बारिश में बाढ़ को न्योता देती है।
*एनएमडीसी की लापरवाही: वादों से मुंह मोड़ना*
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, एनएमडीसी ने बाढ़ से हुए नुकसान की मरम्मत के लिए जिला प्रशासन को 3-4 करोड़ रुपये की राशि दी थी। लेकिन इसके बाद एनएमडीसी ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। बाढ़ के बाद तीसरी बार रात 11 बजे जब शहर फिर से जलमग्न हुआ, तो लोग एनएमडीसी गेस्ट हाउस में शरण लेने को मजबूर हुए। उस रात एनएमडीसी के महाप्रबंधक संजीव साही ने रात 12:20 बजे बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा कर लोगों से वादा किया था कि बारिश खत्म होते ही नालियों का चौड़ीकरण किया जाएगा और बाढ़ के सभी कारणों को खत्म किया जाएगा। लेकिन एक साल बीतने को है, न तो संजीव साही उन इलाकों में दोबारा नजर आए, न ही एनएमडीसी ने अपने वादों को पूरा करने की कोशिश की।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एनएमडीसी ने मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारी खत्म कर ली, लेकिन यह मुआवजा लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ का हिस्सा बन गया। नालियों की स्थिति जस की तस है, और आगामी बारिश में फिर से वही तबाही दोहराने का खतरा मंडरा रहा है।
*नगरपालिका और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता*
नगरपालिका और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की लापरवाही ने भी इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। नालियों पर अवैध कब्जों को हटाने के बजाय, जनप्रतिनिधि वोट बैंक की राजनीति में उलझे रहते हैं। कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा नालियों पर कब्जा करने की गलतियों को अनदेखा किया जाता है, जिसका खामियाजा गरीब और कमजोर वर्ग को भुगतना पड़ता है। नगरपालिका भाई-चारे का रवैया अपनाते हुए अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करने से बचती है, जिसके चलते सैकड़ों लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ रही है।
*बाढ़ का विश्लेषण: मानवीय लापरवाही का नतीजा*
किरंदुल में बाढ़ का विश्लेषण करने पर साफ पता चलता है कि यह प्राकृतिक आपदा कम, मानवीय लापरवाही का परिणाम ज्यादा है। नालियों पर कब्जा, उनकी सफाई न होना, और अनियोजित शहरीकरण ने इस समस्या को जटिल बना दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, नालियों का अवरुद्ध होना और जल निकासी की खराब व्यवस्था शहरी बाढ़ का प्रमुख कारण है। किरंदुल में भी यही स्थिति है, जहां नालियां कचरे और अवैध निर्माणों से पूरी तरह बंद हैं।
इसके अलावा, एनएमडीसी की माइनिंग गतिविधियों से निकलने वाली लाल मिट्टी और पानी ने बाढ़ को और विनाशकारी बना दिया। माइनिंग क्षेत्रों से निकलने वाला पानी बिना किसी नियंत्रण के शहर में प्रवेश करता है, जिसे रोकने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए गए।
*समाधान के लिए क्या करें?*
*किरंदुल में बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए तत्काल और दीर्घकालिक उपायों की जरूरत है:*
*नालियों की सफाई और चौड़ीकरण:* नगरपालिका और एनएमडीसी को मिलकर नालियों की नियमित सफाई और चौड़ीकरण करना होगा। अवैध कब्जों को हटाने के लिए सख्त कार्रवाई जरूरी है।
*अवैध निर्माणों पर रोक:*
नालियों और नालों पर बने अवैध मकानों और दुकानों को तुरंत हटाया जाए। इसके लिए प्रशासन को निष्पक्ष और पारदर्शी रवैया अपनाना होगा।
*जल निकासी की बेहतर व्यवस्था:* शहर में जल निकासी के लिए आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाए, जो भारी बारिश में भी प्रभावी हो।एनएमडीसी की जवाबदेही: एनएमडीसी को माइनिंग से निकलने वाले पानी और मिट्टी को नियंत्रित करने के लिए ठोस उपाय करने होंगे। साथ ही, अपने वादों को पूरा करने के लिए समयबद्ध योजना बनानी होगी।
*जनप्रतिनिधियों की सक्रियता:* जनप्रतिनिधियों को वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी।
*जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी:* स्थानीय लोगों को नालियों की सफाई और अवैध कब्जों के खिलाफ जागरूक करना होगा। सामुदायिक भागीदारी से इस समस्या को हल करने में मदद मिल सकती है।
*निष्कर्ष:* समय रहते जागें, वरना दोहराएगी तबाहीकिरंदुल में 2024 की बाढ़ ने न केवल लोगों की जिंदगी को तहस-नहस किया, बल्कि प्रशासन, एनएमडीसी, और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही को भी उजागर किया। अगर नालियों पर कब्जे, अनियोजित शहरीकरण, और खराब जल निकासी की समस्या को तुरंत नहीं सुलझाया गया, तो आगामी बारिश में 2024 की कहानी फिर से दोहरा सकती है। यह समय है कि प्रशासन और एनएमडीसी अपनी जिम्मेदारी समझें और लोगों की जिंदगी को प्राथमिकता दें। किरंदुल के लोग अब और तबाही नहीं झेल सकते। समय रहते कदम उठाएं, वरना पानी फिर से शहर को डुबो देगा।





