*किरंदुल में बाढ़ से निपटने के लिए नगरपालिका व जिला प्रसाशन की बड़ी पहल: शशिभूषण महापात्र के नेतृत्व में नाला निर्माण के लिए रेखांकन शुरू*

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*किरंदुल में बाढ़ से निपटने के लिए नगरपालिका व जिला प्रसाशन की बड़ी पहल: शशिभूषण महापात्र के नेतृत्व में नाला निर्माण के लिए रेखांकन शुरू*

किरंदुल, 15 मई 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल नगरपालिका क्षेत्र में बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए नगरपालिका ने ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। नगरपालिका के मुख्य अधिकारी शशिभूषण महापात्र के नेतृत्व में राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने वार्ड नंबर 3 और 4 के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नाला निर्माण के लिए जमीन का रेखांकन किया। यह कदम क्षेत्र में बार-बार आने वाली बाढ़ की समस्या को जड़ से खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

*बाढ़ की समस्या और पिछले अनुभव*

किरंदुल के वार्ड नंबर 3 और 4 में मौजूदा नाला बेहद संकरा और अपर्याप्त है। इसकी चौड़ाई और ऊंचाई मात्र 2 से 2.5 मीटर है, जो बरसात के मौसम में बढ़ते जलस्तर को संभालने में पूरी तरह नाकाम साबित होता है। पिछले साल 21 जुलाई 2024 को भारी बारिश के कारण इस क्षेत्र में भीषण बाढ़ आई थी, जिसने न केवल स्थानीय निवासियों की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, बल्कि लोगों की जान पर भी खतरा मंडराया। इस बाढ़ ने नाले की अपर्याप्त क्षमता को उजागर किया और प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती पेश की।

जिला प्रसाशन व नगरपालिका के मुख्य अधिकारी शशिभूषण महापात्र ने इस समस्या को गंभीरता से लिया और स्वयं इस प्रोजेक्ट की निगरानी कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में शुरू हुआ यह रेखांकन कार्य नाले के विस्तार और सुदृढ़ीकरण की दिशा में पहला कदम है। शशिभूषण महापात्र ने बताया कि नाले की मौजूदा स्थिति के कारण बरसात का पानी आसपास के रिहायशी इलाकों में भर जाता है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होता है।

*रेखांकन कार्य: एक ठोस शुरुआत*

आज, शशिभूषण महापात्र की देखरेख में राजस्व विभाग और नगरपालिका की संयुक्त टीम ने वार्ड नंबर 3 और 4 में नाले के आसपास की जमीन का रेखांकन किया। इस दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि नाले का विस्तार इस तरह हो कि भविष्य में बाढ़ की स्थिति से बचा जा सके। रेखांकन के दौरान स्थानीय निवासियों की समस्याओं को भी सुना गया और उनके सुझावों को प्रोजेक्ट में शामिल करने का आश्वासन दिया गया।शशिभूषण महापात्र ने कहा पिछले साल की बाढ़ ने हमें सबक दिया है कि छोटे और अपर्याप्त नाले इस तरह की प्राकृतिक आपदा को रोकने में सक्षम नहीं हैं। इसलिए, हम नाले की चौड़ाई और गहराई को बढ़ाने के साथ-साथ इसे और मजबूत करने की योजना पर काम कर रहे हैं।”

*बाढ़ का विश्लेषण: क्यों है यह क्षेत्र संवेदनशील?*

किरंदुल में बाढ़ की समस्या का मुख्य कारण भारी बारिश के साथ-साथ अपर्याप्त जल निकासी व्यवस्था है। मौसम विभाग के अनुसार, बस्तर क्षेत्र में हर साल मानसून के दौरान भारी बारिश होती है, जिससे नदियां और नाले उफान पर आ जाते हैं। किरंदुल में एनएमडीसी के आयरन ओर 11सी माइनिंग आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों से बहकर आने वाला पानी भी बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बनाता है। पिछले साल 21 जुलाई को एनएमडीसी के 11सी माइनिंग  से स्थिति और बिगड़ गई थी, जब लाल मिट्टी मिश्रित पानी ने निचले इलाकों को जलमग्न कर दिया था।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि छोटा नाला बरसात के पानी को संभालने में असमर्थ है, जिसके कारण सड़कों और घरों में पानी भर जाता है। कई बार लोगों को अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ता है। जिला प्रशासन ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए नाले के विस्तार को प्राथमिकता दी है।

*भविष्य की योजनाएं और निवासियों की उम्मीदें*

नाले के विस्तार के बाद इसकी चौड़ाई और गहराई को बढ़ाकर इसे बरसात के पानी को आसानी से निकालने लायक बनाया जाएगा। इसके अलावा, नाले की दीवारों को मजबूत करने और आसपास के क्षेत्रों में जल निकासी की वैकल्पिक व्यवस्था करने की भी योजना है। शशिभूषण महापात्र ने आश्वासन दिया कि यह प्रोजेक्ट जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा ताकि अगले मानसून से पहले क्षेत्र को बाढ़ से बचाया जा सके।स्थानीय निवासियों ने नगरपालिका के इस कदम की सराहना की है। वार्ड नंबर 3 के निवासी रमेश साहू ने कहा, “पिछले साल बाढ़ ने हमारा बहुत नुकसान किया था। शशिभूषण महापात्र जी के इस प्रयास से हमें उम्मीद है कि अब हमें हर साल बाढ़ का डर नहीं सताएगा।”

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