*दंतेवाड़ा में औषधि सुरक्षा पर सख्ती: नशा मुक्त भारत की दिशा में ठोस कदम, मेडिकल स्टोर्स पर सीसीटीवी अनिवार्य*
दंतेवाड़ा, 14 मई 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में औषधि सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण अभियान शुरू किया गया है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन, छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार और कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत की निगरानी में चलाए गए इस औचक निरीक्षण अभियान ने नशा मुक्त भारत के विजन को मजबूती प्रदान की है। इस अभियान के तहत सहायक औषधि नियंत्रक और औषधि निरीक्षकों की संयुक्त टीम ने नकुलनार, बचेली, दंतेवाड़ा और गीदम क्षेत्रों में 15 औषधि प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान चार मेडिकल स्टोर्स—कर्मा मेडिकल स्टोर (दंतेवाड़ा), हिन्द मेडिकल स्टोर (गीदम), मंडल मेडिकल स्टोर (गीदम) और बालाजी मेडिकल स्टोर (दंतेवाड़ा)—में सीसीटीवी कैमरे न होने की कमी पाई गई, जो भारत सरकार के औषधि सुरक्षा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। इन प्रतिष्ठानों को तीन दिनों के भीतर सीसीटीवी स्थापित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
*नशा मुक्त भारत अभियान के तहत सख्ती*
भारत सरकार का नशा मुक्त भारत अभियान नशीली और मनभ प्रभावी दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक महत्वाकांक्षी पहल है। इस अभियान का उद्देश्य न केवल नशे की लत को कम करना है, बल्कि ऐसी दवाओं के अवैध व्यापार और बिना पर्चे के बिक्री पर भी रोक लगाना है। दंतेवाड़ा में चलाया गया यह निरीक्षण अभियान इसी दिशा में एक ठोस कदम है। औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और इसके नियम, 1945 के तहत, अनुसूचित एच, एच-1 और एक्स श्रेणी की दवाओं की बिक्री को सख्ती से नियंत्रित किया जाता है। इन नियमों के अनुसार, मेडिकल स्टोर्स को ऐसी दवाओं की बिक्री के लिए वैध चिकित्सकीय पर्चा अनिवार्य रूप से रखना होता है, और दुकानों में सीसीटीवी कैमरे लगाना भी अनिवार्य है ताकि निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
दंतेवाड़ा में पाए गए उल्लंघनों ने यह स्पष्ट किया कि कई मेडिकल स्टोर्स अभी भी इन नियमों का पूरी तरह पालन नहीं कर रहे हैं। सीसीटीवी कैमरों की अनुपस्थिति न केवल पारदर्शिता में कमी लाती है, बल्कि नशीली दवाओं के अवैध व्यापार को भी बढ़ावा दे सकती है। इस अभियान के तहत, खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने जिले के सभी औषधि विक्रेताओं को अपने प्रतिष्ठानों में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से स्थापित करने का निर्देश दिया है। यह कदम ड्रग कानून प्रवर्तन के लिए राष्ट्रीय समन्वय तंत्र (एनसीओआरडी) के तहत नशीली और मनः प्रभावी दवाओं के क्रय-विक्रय पर प्रभावी निगरानी स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
*सीसीटीवी अनिवार्यता: पारदर्शिता और जवाबदेही की ओर कदम*
सीसीटीवी कैमरों की अनिवार्यता न केवल औषधि दुकानों में पारदर्शिता लाने का एक प्रयास है, बल्कि यह नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने में भी कारगर साबित हो सकता है। किशनगंज, हरियाणा, और सोनीपत जैसे अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह के निर्देश जारी किए गए हैं, जहां दवा दुकानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है। दंतेवाड़ा में इस नियम को लागू करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिना डॉक्टर के पर्चे के नशीली दवाओं की बिक्री पर रोक लगे। सीसीटीवी फुटेज की निगरानी से अवैध बिक्री करने वाले दुकानदारों में जवाबदेही का डर पैदा होगा, और इससे नशीली दवाओं की खरीद-बिक्री पर अंकुश लगेगा।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे न केवल बिक्री की प्रक्रिया को रिकॉर्ड करेंगे, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेंगे कि नियंत्रित दवाओं का भंडारण और वितरण नियमों के अनुरूप हो। इसके अलावा, यह कदम स्थानीय प्रशासन को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के उल्लंघन की स्थिति में त्वरित कार्रवाई करने में सक्षम बनाएगा।
*भारत सरकार के नियमों का विश्लेषण*
भारत सरकार ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए कई कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाए हैं। औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत, अनुसूचित दवाओं की बिक्री और भंडारण के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं। इसके अलावा, नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत नशीली दवाओं के अवैध व्यापार पर कड़ी सजा का प्रावधान है। दंतेवाड़ा में लागू किए गए सीसीटीवी नियम इन कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन का हिस्सा हैं।
हाल के वर्षों में, हरियाणा जैसे राज्यों में एनडीपीएस अधिनियम के तहत सैकड़ों मामले दर्ज किए गए हैं, और तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। दंतेवाड़ा में भी स्थानीय प्रशासन ने इस दिशा में सक्रियता दिखाई है। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, और यह अभियान नियमित रूप से जारी रहेगा।
*नशे के खिलाफ सामुदायिक जागरूकता*
नशा मुक्त भारत अभियान केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं है। यह अभियान सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता पर भी जोर देता है। दंतेवाड़ा में प्रशासन ने स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक केंद्रों में नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है। इसके अलावा, नागरिकों को नशीली दवाओं की अवैध बिक्री की सूचना देने के लिए टोल-फ्री नंबर और एनसीबी हेल्पलाइन नंबर (जैसे 8930305020 या 9050891508) उपलब्ध कराए गए हैं।
*आगे की राह* दंतेवाड़ा का यह अभियान न केवल स्थानीय स्तर पर औषधि व्यापार को नियमबद्ध करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह पूरे देश में नशा मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक मॉडल भी प्रस्तुत करता है। सीसीटीवी कैमरों की अनिवार्यता, नियमित निरीक्षण, और कड़ी कार्रवाई जैसे कदम यह सुनिश्चित करेंगे कि नशीली दवाओं का दुरुपयोग रोका जा सके।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान निरंतर जारी रहेगा, और भविष्य में डिजिटल निगरानी और ऑनलाइन रिकॉर्ड-कीपिंग जैसे उपायों को भी लागू किया जा सकता है। इससे औषधि व्यापार में और अधिक पारदर्शिता आएगी, और जनता को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध होंगी।
*निष्कर्ष* दंतेवाड़ा में औषधि सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम नशा मुक्त भारत के सपने को साकार करने की दिशा में एक मजबूत प्रयास हैं। सीसीटीवी कैमरों की अनिवार्यता और नियमों के सख्त पालन से न केवल नशीली दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगेगी, बल्कि यह जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा को भी सुनिश्चित करेगा। यह अभियान अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकता है, और भारत सरकार के नियमों के प्रभावी कार्यान्वयन का एक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
*संपर्क:* नशीली दवाओं की अवैध बिक्री की सूचना के लिए टोल-फ्री नंबर 8930305020 या एनसीबी नंबर 9050891508 पर संपर्क करें। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।

