*किरंदुल मार्केट में फिर बिगड़ी व्यवस्था: सब्जी व्यापारियों की मनमानी, नगरपालिका की नाकामी उजागर*
किरंदुल, 14 मई 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले का किरंदुल मार्केट एक बार फिर अव्यवस्था और अराजकता का शिकार हो गया है। मुख्य मार्ग पर सब्जी व्यापारियों की मनमानी और नगरपालिका की लचर व्यवस्था के कारण बाजार की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। पहले भी कई बार मुख्य मार्ग को व्यवस्थित करने के प्रयास किए गए, लेकिन आज सुबह फिर से बाजार का मुख्य मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया, जिससे न केवल स्थानीय लोगों को परेशानी हुई बल्कि चार पहिया वाहनों का आवागमन भी ठप हो गया।
*मुख्य मार्ग पर कब्जा, ग्रामीणों की मजबूरी*
किरंदुल मार्केट में सब्जी व्यापारियों ने न केवल बाजार के अंदर की जगह पर कब्जा किया हुआ है, बल्कि बाजार की सड़क को भी पूरी तरह घेर लिया है। आसपास के ग्रामीण, जो अपनी सब्जियां बेचने के लिए बाजार में आते हैं, उन्हें बैठने के लिए जगह नहीं मिल रही। मजबूरी में ये ग्रामीण मुख्य मार्ग पर ही अपनी दुकानें लगाने को मजबूर हैं। इससे मुख्य मार्ग पूरी तरह जाम हो गया है, जिससे आवागमन में भारी दिक्कत हो रही है। स्थानीय निवासी रमेश साहू ने बताया, “हम ग्रामीणों को बाजार के अंदर जगह नहीं दी जाती। व्यापारी अपनी दुकानों को सड़क तक फैला देते हैं, और हमें मजबूरन सड़क पर बैठना पड़ता है। नगरपालिका इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही।”
*नगरपालिका की नाकामी, कर्मचारियों की अनुपस्थिति*
नगरपालिका ने पहले बाजार को व्यवस्थित करने के लिए कर्मचारी नियुक्त किए थे, जो नियमित रूप से व्यापारियों को निर्धारित जगह पर दुकानें लगाने का निर्देश देते थे। लेकिन आज सुबह नगरपालिका का कोई भी कर्मचारी बाजार में मौजूद नहीं था, जिसके चलते पूरी व्यवस्था चरमरा गई। व्यापारियों ने इस अवसर का फायदा उठाते हुए मनमाने तरीके से दुकानें सजा लीं, जिससे बाजार का मुख्य मार्ग पूरी तरह बंद हो गया। एक स्थानीय दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “नगरपालिका के कर्मचारी कभी-कभी आते हैं, लेकिन उनकी कोई सख्ती नहीं होती। व्यापारी उनकी बात नहीं मानते, और नगरपालिका भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं करती।”
*नगरपालिका के आदेशों की अवहेलना*
सब्जी व्यापारियों की मनमानी का आलम यह है कि वे नगरपालिका के आदेशों और नोटिस को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं। पहले भी कई बार नगरपालिका ने व्यापारियों को मुख्य मार्ग खाली करने और बाजार के अंदर निर्धारित जगह पर दुकानें लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन व्यापारी इन आदेशों को ठेंगा दिखाते रहे हैं। कुछ व्यापारियों ने तो खुले तौर पर कहा कि “नगरपालिका की नोटिस का कोई असर नहीं होता, हम अपनी जगह नहीं छोड़ेंगे।” इस रवैये से नगरपालिका की कमजोरी साफ झलकती है। स्थानीय निवासी आयति माड़वी ने गुस्से में कहा, “नगरपालिका हर बार नोटिस जारी करती है, लेकिन उसका पालन कराने की हिम्मत नहीं दिखाती। व्यापारी जानते हैं कि कोई कार्रवाई नहीं होगी, इसलिए वे मनमानी करते हैं।”
*पहले की कोशिशें और बार-बार विफलता*
किरंदुल मार्केट में अव्यवस्था कोई नई समस्या नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में कई बार नगरपालिका ने बाजार को व्यवस्थित करने की कोशिश की। 2023 में एक बड़ी मुहिम चलाकर मुख्य मार्ग को दुकानों से मुक्त कराया गया था, और व्यापारियों को बाजार के अंदर दुकानें लगाने के लिए जगह आवंटित की गई थी। उस समय नगरपालिका ने सख्ती दिखाते हुए कुछ व्यापारियों पर जुर्माना भी लगाया था। लेकिन जैसे ही प्रशासन की सख्ती ढीली पड़ी, व्यापारी फिर से पुराने ढर्रे पर लौट आए। 2024 में भी एक बार बाजार को व्यवस्थित करने की कोशिश की गई, लेकिन वह भी अल्पकालिक साबित हुई। आज की स्थिति ने एक बार फिर साबित कर दिया कि नगरपालिका की नीतियों में निरंतरता और सख्ती का अभाव है।
*स्थानीय लोगों और वाहन चालकों की परेशानी*
मुख्य मार्ग के अवरुद्ध होने से न केवल स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है, बल्कि वाहन चालकों के लिए भी स्थिति मुश्किल हो गई है। चार पहिया वाहनों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे बाजार में सामान लाने-ले जाने वाले व्यापारियों को भी दिक्कत हो रही है। एक 4 पहिया चालक रामू यादव ने बताया, “मुख्य मार्ग पर दुकानें लगने से हमारा वाहन निकालना मुश्किल हो गया है। ग्राहकों को ले जाने में देरी होती है, और कई बार तो रास्ता ही बंद हो जाता है।” इसके अलावा, मुख्य मार्ग पर भीड़ होने से दुर्घटना का खतरा भी बढ़ गया है।
*नगरपालिका की कमजोरी या व्यापारियों की दादागिरी?*
किरंदुल मार्केट की अव्यवस्था के लिए नगरपालिका की लचर कार्यप्रणाली को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नगरपालिका के पास न तो पर्याप्त कर्मचारी हैं और न ही सख्त कार्रवाई करने की इच्छाशक्ति। एक सामाजिक कार्यकर्ता, प्रकाश ठाकुर ने कहा, “यह नगरपालिका की कमजोरी है कि वह अपने ही आदेशों का पालन नहीं करा पा रही। व्यापारियों का एक वर्ग इतना प्रभावशाली है कि वह प्रशासन पर दबाव बनाता है, और नगरपालिका के अधिकारी इस दबाव के आगे झुक जाते हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि बाजार में अव्यवस्था के कारण स्थानीय लोगों का विश्वास प्रशासन से उठता जा रहा है।

