*किरंदुल में बाढ़ का भयावह साया: एनएमडीसी, जिला प्रशासन, नगरपालिका और ठेकेदार की लापरवाही से खतरे में सैकड़ों जिंदगियां*
किरंदुल, दंतेवाड़ा: छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में बसे किरंदुल शहर के लिए साल 2024 का बाढ़ एक ऐसी त्रासदी बनकर आया, जिसने न केवल लोगों के घर उजाड़े, बल्कि उनके दिलों में डर का ऐसा मंजर बिठा दिया कि आज भी जरा सी बारिश की बूंदें उनकी धड़कनों को तेज कर देती हैं। एनएमडीसी की 11-सी माइनिंग से निकली लाल मिट्टी का दलदल, टूटी-फूटी नालियां, क्षतिग्रस्त चेक डैम और बंगाली कैंप का वह एकमात्र पुल, जिसे नगरपालिका प्रशासन ने तोड़ दिया, आज भी लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल रहा है। साल 2025 अपने अंतिम पड़ाव पर है, और जून की बारिश फिर से दस्तक देने वाली है, लेकिन एनएमडीसी किरंदुल परियोजना, जिला प्रशासन, किरंदुल नगरपालिका और ठेकेदार सोनी की लापरवाही ने इस त्रासदी को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। यह कहानी है सैकड़ों परिवारों की, जो डर के साये में जीने को मजबूर हैं।
*2024 की बाढ़: एक भूल न पाने वाली त्रासदी*
जुलाई 2024 में किरंदुल में आई बाढ़ ने वार्ड नंबर 1, 3 और 4 के निवासियों की जिंदगी तहस-नहस कर दी। एनएमडीसी के एन-1 बी डैम के क्षतिग्रस्त होने से कई घर पानी की चपेट में आ गए, कुछ पूरी तरह ध्वस्त हो गए। बंगाली कैंप के पास का एकमात्र पुल, जो लोगों का मुख्य आवागमन का साधन था, नगरपालिका प्रशासन ने तोड़ दिया, जिसके बाद नाला पार करना निवासियों के लिए जानलेवा चुनौती बन गया। गाटर पुलिया और सीएससी सेंटर के पास जलजमाव ने स्थिति को और भयावह बना दिया। जिला प्रशासन ने उस समय रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर लोगों को मंगल भवन में शिफ्ट किया, लेकिन यह तात्कालिक राहत थी, स्थायी समाधान नहीं।
*2025: समय बीता, लेकिन समाधान नहीं*
2024 की बाढ़ को एक साल होने को है, लेकिन किरंदुल में हालात जस के तस हैं। वार्ड नंबर 1 में डैम से कोडेनार पंचायत तालाब पारा तक बाढ़ रोकथाम के लिए कोई काम नहीं हुआ। टूटी नालियां, क्षतिग्रस्त चेक डैम और बंगाली कैंप का टूटा पुल आज भी लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। स्थानीय निवासी रमेश कुमार कहते हैं, “हर बारिश में हमें अपनी जान का डर सताता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, बुजुर्गों को नाला पार करना मुश्किल है। प्रशासन और एनएमडीसी को हमारी जिंदगी से कोई सरोकार नहीं।”
*ठेकेदार सोनी की लापरवाही और जिला लोक निर्माण विभाग की चुप्पी*
जिला प्रशासन के अनुसार, बाढ़ रोकथाम के लिए जिला लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) दंतेवाड़ा ने निविदा जारी की थी, जिसे बचेली के ठेकेदार सोनी ने हासिल किया। लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी ठेकेदार ने न तो काम शुरू किया और न ही कोई प्रगति दिखाई। यह स्थिति न केवल ठेकेदार की उदासीनता को दर्शाती है, बल्कि पीडब्ल्यूडी की लापरवाही को भी उजागर करती है। सवाल उठता है कि जब ठेकेदार कार्य करने में रुचि नहीं दिखा रहा, तो पीडब्ल्यूडी उसकी निविदा रद्द क्यों नहीं कर रहा? क्यों नहीं ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जा रहा? स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सुनिता देवी कहती हैं, “यह लापरवाही सैकड़ों जिंदगियों को खतरे में डाल रही है। अगर बारिश में फिर से बाढ़ आई, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?”
*एनएमडीसी और नगरपालिका: जिम्मेदारी से पलायन*
एनएमडीसी किरंदुल परियोजना, जो इस क्षेत्र की सबसे बड़ी खनन इकाई है, बाढ़ के लिए आंशिक रूप से जिम्मेदार मानी जाती है। इसके डैम के क्षतिग्रस्त होने और माइनिंग से निकली लाल मिट्टी ने बाढ़ की तीव्रता को बढ़ाया। लेकिन एनएमडीसी ने न तो डैम की मरम्मत की और न ही प्रभावित परिवारों के लिए कोई ठोस कदम उठाया। दूसरी ओर, किरंदुल नगरपालिका ने बंगाली कैंप के पुल को तोड़ने के बाद उसका पुनर्निर्माण नहीं किया, जिसके कारण निवासियों को रोजाना मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। नगरपालिका के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “बजट की कमी और प्रशासनिक देरी के कारण काम रुका हुआ है।”
*बारिश का इंतजार या त्रासदी का?*
मौसम विभाग ने जून 2025 के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। किरंदुल के निवासी एक बार फिर डर के साये में जीने को मजबूर हैं। वार्ड नंबर 1 की निवासी शांति बाई कहती हैं, “हम हर रात सोचते हैं कि कहीं बारिश न शुरू हो जाए। अगर नाला फिर उफना, तो हमारे पास जाने की कोई जगह नहीं होगी।” बाढ़ रोकथाम के लिए कोई कदम न उठाए जाने से लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है। वे सवाल उठा रहे हैं कि अगर फिर से बाढ़ आई और जान-माल का नुकसान हुआ, तो क्या एनएमडीसी, जिला प्रशासन, नगरपालिका और ठेकेदार सोनी इसकी जिम्मेदारी लेंगे?
*समय रहते जागें, वरना त्रासदी दोहराएगी*
किरंदुल की यह कहानी केवल एक शहर की नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और उदासीनता की है, जो हर साल बारिश के साथ लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल रही है। अगर एनएमडीसी, जिला प्रशासन, किरंदुल नगरपालिका और जिला लोक निर्माण विभाग अब भी नहीं जागे, तो 2025 की बारिश फिर से वही दर्दनाक मंजर लाएगी। सवाल यह है कि क्या प्रशासन और ठेकेदार समय रहते अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे, या किरंदुल के लोग एक और त्रासदी का शिकार होंगे? यह वक्त जवाबदेही और कार्रवाई का है, न कि बहानों और टालमटोल का।

